Monday, June 14, 2021
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ब्लैक फंगस संक्रमितों की संख्या हुई 88, छह की मौत

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  • मेडिकल कालेज में 42 और आनंद अस्पताल में 12 भर्ती

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना के बाद तेजी से बढ़ रहे ब्लैक फंगस ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। शुक्रवार तक मेरठ में ब्लैक फंगस के 88 मामले सामने आ चुके है। इनमें सबसे अधिक 42 मरीज मेडिकल कालेज में है। जबकि आनंद अस्पताल में 12 मरीज इलाज करा रहे हैं।

सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि विजन केयर, सुभारती मेडिकल कालेज, साई अस्पताल, होली फैमिली अस्पताल और होप अस्पताल में एक एक मरीज ब्लैक फंगस का भर्ती है। जबकि कनग ईएनटी अस्प्ताल में 8, केएमसी में 2, लोकप्रिय अस्पताल में 5, मेरठ किडनी अस्पताल में 4 और न्यूटिमा अस्पताल में 8 मरीज भर्ती है।

दरअसल कई जिलों में ब्लैक फंगस का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज सहित कई अस्पतालों में ब्लैक फंगस से संक्रमित जो मरीज भर्ती हैं। इनमें लगभग 50 प्रतिशत मरीज मेरठ जिले के रहने वाले हैं। जबकि अन्य मरीज आसपास के जिलों के रहने वाले हैं।

सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि इस समय मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में ‘ब्लैक फंगस’ की मेडिसिन उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन भी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से संपर्क करके वहां से दवाई ले सकते हैं।

उन्होंने बताया फिलहाल जिले के अन्य किसी अस्पताल में ब्लैक फंगस की दवाई नहीं है। उधर, लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि शासन की ओर से ब्लैक फंगस के 66 इंजेक्शन भेजे गए थे जो शुक्रवार को खत्म हो गये हैं।

वहीं मेरठ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि एडीसी और ड्रग इंस्पेक्टर से ब्लैक फंगस की दवाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है। संभावना है कि सोमवार तक बाजार में दवा उपलब्ध हो जाएगी।

कमजोर इम्युनिटी वालों पर हमला कर रहा ब्लैक फंगस

कोरोना के बाद ब्लैक फंगस ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। जिस रफ्तार से ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। उसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर इम्युनिटी वालों पर ब्लैक फंगस ज्यादा हमला कर रहा है। वो लोग जो ज्यादा स्टेरायड ले रहे हैं उनके लिये खतरा बना रहता है।

डॉक्टरों ने बताया कि ब्लैक फंगस वातावरण में मौजूद है। खासकर मिट्टी में इसकी मौजूदगी ज्यादा होती है। यह स्वस्थ और मजबूत इम्युनिटी वाले लोगों पर यह अटैक नहीं कर पाता है और जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उन्हें यह अपना शिकार बनाता है।

सफेद फंगस के बारे में सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि यह भी ब्लैक फंगस का ही रूप है। दरअसल ब्लैक फंगस का असली रंग सफेद होता है। लेकिन संक्रमण के बाद ब्लड में टिशू खराब होने के कारण इस फंगस का रंग काला पड़ जाता है।

जिसके चलते इसे ब्लैक फंगस कहा जाता है। फिजिशियन डा. तनुराज सिरोही ने बताया कि स्टेरॉइड्स की बहुत ज्यादा डोज दिए जाने पर भी मरीज को खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोगों के खून में मिठास की मात्रा बढ़ जाती है जो हाई ब्लड शुगर के रूप में सामने आता है।

अगर लंबे वक्त तक स्टेरॉइड्स दिए जाएं तो भी लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आ सकते हैं। डाक्टरों का कहना है कि बिना डाक्टरी सलाह के स्टेरॉइड लेना खतरनाक हो सकता है। स्टेरॉइड बिल्कुल उचित मात्रा में लें और कम-से-कम समय तक लें।

ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं हो तो डॉक्टर से बिना पूछे स्टेरॉइड लेना नहीं छोड़ें। जो लोग डायबिटिक हैं, उन्हें अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने का अतिरिक्त प्रयास करना चाहिए। जो डायबिटिक नहीं हैं, लेकिन नियमित तौर पर स्टेरॉइड्स ले रहे हैं, उन्हें अपना ब्लड शुगर हमेशा चेक करते रहना चाहिए।

ब्लैक फंगस के लक्षण

अगर आपको नाक में दिक्कत महसूस हो रही हो। अगर सिरदर्द हो। चेहरे के एक हिस्से में दर्द महसूस हो या वो सूज जाए। चेहरा सुन्न पड़ रहा हो। चेहरे का रंग बदल रहा हो। पलकें सूजने लगी हों और दांत हिलने लगे हों।

मवाना: मीवा पूर्व प्रधान ब्लैक फंगस से ग्रस्त, हड़कंप

ग्रामीणों क्षेत्रों में जहां कोरोना कातिल रूप धारण किये हुए हैं तो वहीं शुक्रवार को हस्तिनापुर ब्लॉक एवं नजदीकी सीएचसी मवाना अंतर्गत गांव मीवा में पूर्व प्रधान को ब्लैक फंगस की स्थिति पनपने से परिवार के सदस्यों में हड़कंप मच गया और मामले की जानकारी स्थानीय सरकारी चिकित्सकों को बताई।

रिपोर्ट देखने के बाद चिकित्सकों ने स्थिति नाजुक बताते हुए रेफर कर दिया। परिजनों ने ब्लैक फंगस से ग्रस्त मरीज को दिल्ली के मेदांता नर्सिंग होम में भर्ती करने से पहले मिलिट्री हॉस्पिटल में चिकित्सक को दिखाया गया है। चिकित्सकों ने बताया कि हस्तिनापुर ब्लॉक में ब्लैक फंगस का पहला मामला प्रकाश में आया है।

चिकित्सकों ने मामले की पुष्टि की है। हस्तिनापुर ब्लॉक एवं सीएचसी मवाना अंतर्गत आने वाले गांव मीवा में पूर्व प्रधान रामभूल सिंह (60) की शुक्रवार को शुगर साढ़े चार सौ से अधिक बढ़ने के बाद हालत नाजुक हो गई और आंखों के पास काले रंग के स्पाट जम गये।

आंख के पास काले चक्का जमने के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में स्थानीय सीएचसी मवाना के चिकित्सकों को दिखाया। चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया। सीएचसी प्रभारी डा. सतीश भास्कर ने बताया कि हस्तिनापुर ब्लॉक अंतर्गत आने वाले गांव मीवा में पूर्व प्रधान रामभूल सिंह को ब्लैक फंगस का पहला मामला प्रकाश में आया है।

इसी क्रम में पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि गत दिनों से पूर्व प्रधान रामभूल सिंह जुकाम, खांसी एवं बुखार से ग्रस्त चले आ रहे थे तो वहीं, शुगर साढ़े चार सौ से अधिक होने के बाद हालत नाजुक हो गई। चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए मेरठ रेफर कर दिया, लेकिन भाई आर्मी में होने के चलते मिलिट्री हॉस्पिटल में चिकित्सक को दिखाया गया है। चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जा रहा है।

स्थिति के बाद दिल्ली मेदांता नर्सिंग होम में भर्ती कराया जाएगा। मवाना सीएचसी चिकित्सक प्रभारी डा. सतीश भास्कर ने हस्तिनापुर ब्लॉक एवं मवाना सीएचसी में पहला केस ब्लैक फंगस का पहला मामला प्रकाश में आने की पुष्टि की है।

ब्लैक फंगस: इंजेक्शन नहीं मिला तो जा सकती है 14 मरीजों की जान

शहर में ब्लैक फंगस के 14 मरीज आॅपरेशन होने के बाद भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जिंदगी बचाने के लिए जिस इंजेक्शन की मांग प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर मांग रहे हैं, उस इंजेक्शन को प्रशासन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। कमिश्नर ने भी शासन से इंजेक्शन की मांग की है, ताकि आॅपरेशन हो चुके मरीजो की जान बचाई जा सके। एक मरीज को 20 इंजेक्शन दिये जाते हैं।

15 दिन तक ये इंजेक्शन लगेंगे, जिसके बाद ही मरीज ब्लैक फंगस से ठीक हो सकते हैं, अन्यथा ब्लैक फंगस के मरीजों का आॅपरेशन भले ही कर दिया गया हो, लेकिन उनको बचा पाना मुश्किल है। ऐसा कहना है कि प्राइवेट चिकित्सकों का। शहर के आनंद हॉस्पिटल में वर्तमान में 14 मरीज ब्लैक फंगस के इलाज करा रहे हैं।

इन सभी का आॅपरेशन भी हो चुका हैं, लेकिन अस्पताल को बीस इंजेक्शन कहीं से मिल पाए थे, लेकिन प्रशासन इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं करा पा रहा है, जिसके चलते ब्लैक फंगस के शिकार मरीजों को बचा पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है।

डॉक्टर भी अब इंजेक्शन नहीं मिलने पर हाथ खड़े कर रहा हैं। अभी तक इसके सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं,लेकिन मेरठ में भी ब्लैक फंगस के मरीज लगातार निकल रहे हैं। ब्लैक फंगस से पांच की मौत भी हो चुकी है।

इसका इलाज क्या है?
ब्लैक फंगस एक इनवेसिव फंगस है, यानी शरीर को चीरते हुए जाता है, ये ब्लड वेसेल्स यानी धमनियों को क्रॉस करता है और उसे खत्म कर देता है. जहां-जहां ये फैलता है, उस एरिया में काला निशान पड़ जाता है। इसलिए इसे ब्लैक फंगस कहते हैं। एक बार ऐसा होने पर वहां पर ब्लड सप्लाई खत्म हो चुकी होती है।

ऐसे में कोई दवा काम नहीं करती। ऐसी कंडीशन में सर्जरी के जरिए उस एरिया को हटाया जाता है। इसी तकनीकी का इस्तेमाल किया है आनंद हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने, जिसमें 14 मरीजों के आॅपरेशन भी कर दिये हैं। एडवांस केसेज में आंखों को निकालना भी पड़ सकता है।

क्योंकि अगर उसे नहीं निकाला गया तो यह फैल कर मरीज के मष्तिष्क तक पहुंच सकता है और इससे जान भी जा सकती है। अगर शुरूआत में ही इसका पता चल जाए तो इंट्रावेनस एंटीफंगल ड्रग्स से इसका इलाज किया जा सकता है। यह एक तरह का इंजेक्शन होता है। जिसे ब्लैक फंगस इंफेक्शन की शुरूआत होने के वक्त दिए जाना फायदेमंद होता है।

ये कौन-सा इंजेक्शन है जो मार्केट से गायब हो रहा?

ब्लैक फंगस का इलाज करने के लिए एंटीफंगल इंजेशन दिया जाता है। ऐसा ही एक इंजेक्शन है एम्फोटेरिसिन बी। इस पीले रंग के इंजेक्शन की डिमांड इतनी ज्यादा है कि लोगों ने इसे जमा करना शुरू कर दिया है। इसकी वजह से मार्केट में इस दवाई की कमी आ गई है।

अब सरकार ने दवा कंपनियों से इसका प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। नेशनल फार्मास्यूटिक प्राइसिंग अथॉरिटी के अनुसार भारत में यह दवा भारत सीरम एंड वैक्सीन, वैक्हाड्ट एबट हेल्थकेयर , यूनाइटेड बायोटेक, सन फार्मा और सिप्ला जैसी कंपनियां बनाती हैं।

वेबएमडी नाम की वेबसाइट पर साफ बताया गया है कि इस इंजेक्शन का इस्तेमाल सिर्फ गंभीर तरह के फंगल इंफेक्शन के लिए ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा इसे साधारण तरह के फंगल इंफेक्शन के लिए इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है।

नमी से रहे मरीज दूर

बारिश की वजह से वातावरण में नमी 90 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा बहुत से घरों में पानी रिसने से दीवारों पर भी नमी आ गई है। इससे ब्लैक फंगस पनप सकता है। खासतौर पर कोरोना विजेताओं को सलाह दी गई है कि वह नमी वाली जगहों पर रहने में एहतियात बरतें। आम सेहतमंद व्यक्ति को तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन जो कोरोना संक्रमित अस्पतालों में भर्ती रहे हैं या फिर होम आइसोलेशन में रहकर दवाएं खा रहें।

स्टेरॉयड लिया है, ब्लड शुगर लेवल हाई है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है, उन्हें संक्रमण का खतरा हो सकता है। चेस्ट स्पेशलिस्ट एवं सीनियर फिजिशियन डा. विरोत्तम तोमर ने बताया कि कोरोना विजेता या संक्रमित पुराना कई दिनों का रखा मास्क न लगाएं। नमी से इसमें फंगस लग सकती है।

इसके अलावा पानी टपकने से नम हुई दीवार से दूर रहें। नम तौलिया वगैरह इस्तेमाल न करें। इसे ढंग से सुखा लें। उन्होंने बताया कि आम व्यक्ति का इम्युनिटी सिस्टम ठीक होने कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन पोस्ट कोविड स्थिति के रोगियों को परेशानी हो सकती है।


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