Tuesday, July 27, 2021
- Advertisement -
- Advertisement -
HomeUttar Pradesh NewsMeerutगाजियाबाद के संतोष प्रकरण में मेडिकल के डाक्टरों का अमानवीय चेहरा उजागर

गाजियाबाद के संतोष प्रकरण में मेडिकल के डाक्टरों का अमानवीय चेहरा उजागर

- Advertisement -
  • कोविड प्रभारी डा. सुधीर राठी सस्पेंड, कमिश्नर को सौंपी जांच
  • डा. राठी ने भर्ती के अगले दिन मरे संतोष को लेकर लापरवाही बरती

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल कालेज में गाजियाबाद के कोविड मरीज संतोष की मौत और अज्ञात में अंतिम संस्कार करने के मामले में शासन ने मेडिकल कालेज के कोविड प्रभारी डा. सुधीर राठी को निलंबित और डा. अंशु सिंह के खिलाफ जांच के आदेश दिये है। कमिश्नर को इस पूरे मामले की जांच सौंपी गई है।

राज्यपाल के सचिव जी एस प्रियदर्शी ने मेडिकल कालेज के सर्जरी विभाग के हेड डा. सुधीर राठी के निलंबित कर कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह को जांच सौंप कर एक सप्ताह के अंदर चार्जशीट दाखिल कर रिपोर्ट दें। इसके अलावा पैथालाजी विभाग की सहायक आचार्य डा. अंशु सिंह के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिये गए हैं।

डा. अंशु पर आरोप हैं कि उन्होंने संतोष के परिजनों को पन्द्रह दिनों तक भ्रामक सूचना देकर कहती रही कि मरीज का इलाज हो रहा है और वो सही हो रहे है जबकि उनकी मौत भर्ती होने के अगले दिन हो गई थी।

प्राचार्य की रिपोर्ट

21 अप्रैल को संतोष कुमार को गाजियाबाद से मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था। 22 अप्रैल को कोविड अस्पताल में डा. के यू कौशिक को बताया गया कि सुबह आठ बजे बाथरुम में एक मरीज की लाश पडी हुई है। लाश को वहां से हटा दिया गया।

डा. अंशु सिंह ने रात 11 बजे कोविड अस्पताल के सीएमएस डा. सुधीर राठी को इसकी जानकारी दी और शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया। 23 अप्रैल को संतोष नाम की एक अन्य मरीज भर्ती हुई और उसकी भी मौत हो गई। इस संतोष के परिजनों को मौत की सूचना दे दी गई लेकिन दूसरे शव के शिनाख्त के प्रयास नहीं किये गए।

जबकि सुबह आठ बजे मरे अज्ञात व्यक्ति के बारे में उसकी बेटी बार बार मेडिकल आकर पिता के बारे में पूछताछ कर रही थी लेकिन उनको भ्रमित किया जाता रहा।

जब बेटी ने अपने पापा की फोटो दिखाई तो पता चला कि मेडिकल कालेज ने अज्ञात में शव का अंतिम संस्कार करा दिया। इस मामले में मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने 16 अप्रैल को अधीनस्थों को निर्देश दिये थे कि जिन मरीजों की कोविड जांच होती है उनके आधार कार्ड पर पूरा पता लिखा होता है।

आरटीपीसीआर जांच होने के बाद भी उस वार्ड में तैनात डाक्टरों ने परिजनों को न बता कर घोर लापरवाही की है। जब प्राचार्य ने कोविड प्रभारी डा. सुधीर राठी से आख्या मांगी तो राठी ने कोई उत्तर नहीं दिया। 28 अप्रैल को फिर से राठी से जबाव मांगा गया लेकिन राठी ने फिर उत्तर नहीं दिया।

क्या था मामला

मेडिकल विभाग द्वारा संतोष मामले पर दोषियों पर सख्त कार्रवाई न करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शासन से जवाब मांगा है। उसके पश्चात से मेडिकल प्रशासन पर दबाव बना रहा था। मामला न्यायालय में होने के कारण गुरुवार को मेडिकल परिचार्य द्वारा मामले में लापरवाही बरतने वाले संबंधित लोगों पर कार्रवाई की गई।

जिसमें सर्जरी विभाग अध्यक्ष एवं कोविड प्रमुख अधीक्षक डॉक्टर सुधीर राठी को कार्य मुक्त करते हुए उनके स्थान पर डॉ धीरज राज को सर्जरी विभागाध्यक्ष एवं कोविड प्रमुख अधीक्षक नामित किया गया। वहीं, मेट्रन को सीएमएस कार्यालय अटैच एवं संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त कर दी गई है।

इससे पूर्व इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में 64 वर्षीय बुजुर्ग संतोष कुमार के आइसोलेशन वार्ड में मृत होने और उनके शव का लापरवाही बरतते हुए लावारिस में अंतिम संस्कार कराने के मामले में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और आश्रित परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया।

दरअसल मेडिकल कॉलेज में गाजियाबाद के एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी, लेकिन परिवार के सदस्यों को मेडिकल के कर्मचारियों ने 15 दिन तक धोखे में रखा।


What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -

Recent Comments