Wednesday, July 24, 2024
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कप्तान प्रभाकर चौधरी को कार्यशैली से मिला पुरस्कार

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  • सोतीगंज के बदनाम बाजार को बनाया इतिहास
  • 200 से अधिक भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर की सख्त कार्रवाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: क्रांतिधरा पर आये पुलिस अधिकारियों में प्रभाकर चौधरी ही ऐसे एसएसपी साबित हुए जिसने चोरी के वाहनों के कटने के बदनाम बाजार सोतीगंज को मिट्टी में मिलाकर इतिहास मिटा दिया। शासन के खास अधिकारियों में शामिल एसएसपी ने पहले दिन से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अभियान चलाया उसके तहत 200 से अधिक भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्ती का चाबुक चलाकर दहशत पैदा कर दी थी।

एक साल 10 दिन के कार्यकाल में एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाया और उन 75 पुलिसकर्मियों को जनपद का बाहर का रास्ता दिखा दिया जो थानेदारों के लिये दलाली का काम करते थे। एक साल तक इन पुलिसकर्मियों को लाइन में रखकर बेगारी करवाने के बाद उनको दूसरे जनपद भिजवा दिया। इसके अलावा सवा सौ से अधिक दारोगा और सिपाहियों के खिलाफ भ्रष्टाचार साबित होने पर न केवल निलंबित किया बल्कि जेल तक भिजवाया।

प्रभाकर चौधरी ने सोतीगंज के बदनाम कबाड़ियों हाजी गल्ला, इकबाल, मन्नू कबाड़ी, राहुल काला आदि की न केवल संपत्ति जब्त करवाई बल्कि जेल की हवा भी खिलवाई। इन कबाड़ियों पर गैंगस्टर के तहत कार्यवाही भी हुई। यही कारण रहा कि जनपद में चार पहिया वाहनों की चोरी में 87 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों की चोरी में 75 प्रतिशत की कमी आई। सोतीगंज की जिन चार सौ दुकानों में गाड़ियों के कटान और चोरी के वाहन खपाये जाते थे

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उनमें जूते, कोल्ड ड्रिंक, सरसों का तेल और कपड़े बिकने लगे। सात महीने से सोतीगंज में सन्नाटा छाया हुआ है। एसएसपी ने जनता दरबार में आने वाले पीड़ितों की सुविधा के लिये पीली पर्ची शुरु की और इसको लेकर थानेदारों पर सख्ती भी की गई। सबसे उल्लेखनीय काम ट्रैफिक पुलिस के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने पर हुआ। पहले दूसरे राज्यों की गाड़ियों पर गिद्ध की तरह टूटने वाले पुलिसकर्मियों पर अंकुश लगाया गया।

राज्य मंत्री के सहयोगियों के दावों की पोल खुली

एक टेम्पो चालक के साथ सिपाही की मारपीट के प्रकरण में चार दिन तक कार्रवाई न होने और बाद में क्रास रिपोर्ट दर्ज होने को प्रतिष्ठा का विषय बनाने वाले राज्यमंत्री दिनेश खटिक के सहयोगियों ने दावा किया था कि एसएसपी का तबादला करा दिया जाएगा। शनिवार को जब प्रदेश में 12 आईपीएस अधिकारियों का रुटिन में तबादला हुआ तब शासन ने प्रभाकर चौधरी को जिस तरह मेरठ से बड़ा और सम्मानित आगरा जनपद देकर उनके बेहतरीन कार्यों के लिये जहां पुरस्कृत किया वहीं राज्य मंत्री के सहयोगियों के दावों की पोल खुल गई।

प्रधानमंत्री ने दो बार नाम लिया

सोतीगंज पर एसएसपी प्रभाकर चौधरी के सख्त कदम की गूंज अकेले वेस्ट यूपी में ही नहीं पूरे देश में सुनाई दी थी। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी रैलियों में दो बार सोतीगंज का नाम लेकर कहा था कि मेरठ को बदनाम करने वाले सोतीगंज बाजार को मेरठ पुलिस ने नेस्तनाबूद कर दिया है। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोतीगंज का जिक्र न केवल सार्वजनिक सभाओं में कई बार किया बल्कि विधानसभा में बहस का जवाब देते हुए लिया।

डीआईजी सहारनपुर और एसएसपी मेरठ का तबादला

शासन ने शनिवार को डीआईजी सहारनपुर डा. प्रीतेन्द्र सिंह और एसएसपी मेरठ प्रभाकर चौधरी का तबादला कर दिया। शासन ने सहारनपुर के डीआईजी डा. प्रीतेन्द्र सिंह को आईजी कारागार लखनऊ, एसएसपी मेरठ प्रभाकर चौधरी को एसएसपी आगरा, एसएसपी आगरा सुधीर कुमार सिंह को डीआईजी सहारनपुर रेंज, एसएसपी बरेली रोहित सिंह सजवान को एसएसपी मेरठ, पुलिस उपायुक्त गौतमबुद्धनगर अभिषेक को एसपी शामली, सेना नायक छठी वाहिनी चारु निगम को एसपी औरेया, एसपी मुख्यालय सुनीति को एसपी कानपुर देहात और एसपी औरेया अभिषेक वर्मा को पुलिस उपायुक्त कमिश्नरेट नोएडा बनाया गया है।

वैज्ञानिक से आईपीएस बने रोहित सजवान

रोहित सिंह सजवान यूपी कैडर के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें नरम दिल के सख्त अधिकारी के रूप में माना जाता है। बहुत कम समय में उन्होंने गोरखपुर, महाराजगंज और बरेली में एसपी सिटी और एसएसपी रहे रोहित सिंह सजवान की ईमानदारी और व्यावसायिक दक्षता के कारण उनको शासन के चहेते अधिकारियों में माना जाता है।

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रोहित सिंह ने राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद में अपने प्रशिक्षण के दौरान कई पदक और सम्मान जीते हैं। उन्हें संस्थान में गृह मंत्री रहे राजनाथ सिंह ने सम्मानित भी किया था। आईपीएस रोहित सिंह के पिता राजेन्द्र सिंह सजवान शिक्षक है। 2003 में बीटेक आईटी से करने के बाद उन्होंने परमाणु ऊर्जा आयोग के भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिक के रूप में काम किया। इसके बाद वह आईपीएस बने।

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