Wednesday, September 22, 2021
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Homeसंवादसेहतईटिंग सिंड्रोम कहीं मानसिक बीमारी तो नहीं

ईटिंग सिंड्रोम कहीं मानसिक बीमारी तो नहीं

- Advertisement -


भोजन में अधिकांशत: सादा भोजन, जल्दी पचने वाला भोजन, फल और हरी सब्जी वाला भोजन विधिपूर्वक सेवन करना चाहिए। विटामिन का अधिक प्रयोग करना चाहिए। विटामिन क्या हैं? हम जो कुछ खाते हैं उन खाद्य पदार्थों में कई प्रकार के गुण होते हैं और उनमें जीवनदायी तत्व मौजूद रहते हैं-उन्हीं तत्वों को विटामिन कहते हैं। याद रखिए-भोजन रोग का जन्मदाता है तो एक औषधि भी है। हमें यह तय करना है कि हम भोजन को किस रूप में स्वीकार करें।

अधिक खाना, खाने को देखकर कंट्रोल न होना, स्वादिष्ट खाने की चाहत बढ़ना एक बीमारी है। आज के युवा वर्ग में ऐसी आदतें काफी देखी जा रही हैं। खाने को देखकर कंट्रोल न कर पाना ईटिंग डिस्आर्डर की श्रेणी में आता है। जो एक तरह की मानसिक बीमारी मानी जाती है।

कुछ लोग डिप्रेशन में अधिक खाते हैं। वे इमोशनल ईटिंग की श्रेणी में आते हैं। कुछ लोग किसी विशेष खाने को देखकर स्वयं को नहीं रोक पाते चाहे उन्होंने थोड़ी देर पहले ही क्यों न खाना खाया हो। वे कंपलसिव ओवरईटिंग की श्रेणी में आते हैं। कुछ लोगों को देर रात तक भूख लगनी शुरू हो जाती है। वे फ्रिज या रसोई से कुछ भी मिले खा लेते हैं। ऐसे लोगों में लेट नाईट ईटिंग सिंड्रोम होते हैं।

इमोशनल ईटिंग के शिकार

पारिवारिक समस्याओं के चलते ब्रेकअप हो जाने पर, आफिस काम की टेंशन होने पर, बॉस की ज्यादा उम्मीदें होने पर ये सब बातें जब उन्हें तनावग्रस्त रखती हैं तो उन्हें अच्छा खाना खाने या अधिक खाने से उसमें राहत महसूस होती है। तनाव में ऐसे लोग ज्यादा खाते हैं उन्हें खाना ही समाधान नजर आता है। कुछ लोगों का मानना है अच्छा खाना पीना ही जीवन जीने का बेहतर तरीका है इसलिए वे खाने का पूरा आनंद उठाते हैं।

इनसे कैसे बचें

अगर आप मीठा खाने के ज्यादा शौकीन हैं तो मिठाई, चाकलेट के स्थान पर संतरा या अंगूर खा सकते हैं। अगर आपको हैल्दी खाना याद नहीं रहता तो मोबाइल पर रिमाइंडर लगाएं। इस प्रकार कुछ अच्छी आदतें बदलने में मदद मिलेगी। आफिस में अगर आपका अधिक खाने की तरफ ध्यान रहता है तो अपने किसी खास मित्र को कहें कि वह आपको बार बार खाने पर रोक लगाए।

कंपलसिव ओवरईटिंग के शिकार

जो लोग इस आदत के शिकार होते हैं, वह खाने को देखकर स्वयं को रोक नहीं पाते। विशेषकर अपनी पसंद का खाना दिखते ही उसको एंजाय करते हैं और मात्र पर ध्यान नहीं देते। चाय, काफी, शराब, मिठाई, चाकलेट केक, पेस्ट्री, जंक फूड के शौकीन लोग इसकी गिरफ्त में बंधे रहते हैं।

इनसे कैसे बचें

अगर आप चाय-कॉफी के शौकीन हैं तो पहले इसकी मात्र कम करें, धीरे-धीरे अधिक दूध वाली चाय कॉफी लें। शायद स्वाद न आने पर धीरे-धीरे इसकी आदत कम हो जाए। अगर आप शराब के शौकीन हैं तो नीट न पीकर पानी और बर्फ की मात्र अधिक मिलाना शुरू कर दें शायद आप इसकी आदत पर जल्दी कंट्रोल पा सकें।

लेटनाइट ईटिंग के शिकार

कुछ लोगों को देर से सोने की आदत होती है और देर रात जागने के कारण उन्हें भूख भी लगती रहती है। वे फ्रिज या किचन में जो भी कुछ खाने को मिलता है, निकाल कर खाना शुरू कर देते हैं। अगर कुछ नहीं मिला तो इतना परेशान रहते हैं कि नींद भी नहीं आती। मूड भी बिगड़ जाता है और क्रोध भी आता है।

इनसे कैसे बचें

रात्रि में समय पर सोने और प्रात: जल्दी उठने की आदत डालें ताकि भूख रात्रि में न लगे। अगर कभी नींद खुल भी जाए तो हैल्दी स्नैक्स और फल ही खाएं।

नींबू लहसुन एक साथ प्रयोग न करें। चावल का माढ़ या पानी न निकालें। माढ़ में ही सारे विटामिन होते हैं। अंग्रेजी दवाई खाली पेट न लें। तली चीज खाने के तरुन्त बाद पानी न पिएं। भोजन में खाने वाला सोडा डालकर प्रयोग करने से भोजन में विटामिन सी की मात्र नष्ट हो जाती है।

खाने के तुरन्त बाद व्यायाम न करें। कई तरह के मांस एक साथ न खाएं। तरबूज खरबूजा इत्यादि खाने के बाद उसे फेंक दें। दुबारा उसका प्रयोग न करें। चाय बनाकर तुरन्त प्रयोग में लें। आधा घंटे पहले रखी हुई चाय का प्रयोग सेहत के लिए हानिकारक है। कटी हुई प्याज का प्रयोग भी तुरंत कर लें। कटी हुई प्याज कुछ घंटे रखे होने पर प्रयोग न करें।

क्या भोजन भी एक औषधि है?

यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो भोजन की सेवन विधि सुधारें। स्वस्थ रहने के लिए भोजन को ही दवा बना लें। पथ्य में ही आरोग्य है और पथ्य ही दवा है। स्वस्थ होने पर भोजन पोषण के लिए और रोग होने पर भोजन को दवा की भांति सेवन करना चाहिए।

अधिकांश रोग पेट की गड़बड़ी से होते हैं। भूख से अधिक खाना, ऋतु के प्रतिकूल भोजन करना, अपनी प्रकृति के विपरीत भोजन करना, रात्रि में देर से भोजन करना, भोजन के बाद तुरंत सो जाना, पानी की कमी, जलवायु के विरुद्ध भोजन, बाजारू चटपटा खाना, विशेष अपक्य एवं अधिक मात्र में तला हुआ भोजन आदि सब रोग के कारण हैं, अत: इनका भोजन करते वक्त यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए।

भोजन में अधिकांशत: सादा भोजन, जल्दी पचने वाला भोजन, फल और हरी सब्जी वाला भोजन विधिपूर्वक सेवन करना चाहिए। विटामिन का अधिक प्रयोग करना चाहिए। विटामिन क्या हैं? हम जो कुछ खाते हैं उन खाद्य पदार्थों में कई प्रकार के गुण होते हैं और उनमें जीवनदायी तत्व मौजूद रहते हैं-उन्हीं तत्वों को विटामिन कहते हैं। याद रखिए-भोजन रोग का जन्मदाता है तो एक औषधि भी है। हमें यह तय करना है कि हम भोजन को किस रूप में स्वीकार करें।


What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

- Advertisment -spot_img

Recent Comments