Wednesday, June 17, 2026
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मुआवजे को लेकर किसानों का उग्र प्रदर्शन

  • आयुक्त कार्यालय गेट पर दिया धरना, भाकियू की मासिक बैठक में आठ सूत्रीय मांगों को लेकर दिया ज्ञापन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भारतीय किसान यूनियन मेरठ मंडल की मासिक पंचायत मेरठ कमीश्नरी पार्क में आयोजित की गई। पंचायत में किसानों की समस्याओं पर चर्चा हुई। किसानों की प्रमुख मांगों पर आधारित तैयार किया गया ज्ञापन मंडल आयुक्त कार्यालय में दिया गया। हालांकि किसानों को नारेबाजी करते हुए आते देख सुरक्षा बलों ने गेट बंद कर दिया। जिसके चलते किसान वहीं धरना देकर बैठ गए।

बाद में अधिकारियों ने किसानों को अंदर बुलाते हुए ज्ञापन लेकर स्थिति को संभाला। दोपहर करीब एक बजे भाकियू के बैनर तले कमिश्नरी पार्क में एकत्र हुए किसानों ने आठ सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया। जिसमें भाकियू मेरठ मंडल की ओर से किसानों का गन्ना भुगतान अविलंब कराने, आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान कराने, गन्ना मूल्य बढ़ाकर कम से कम 500 रुपये प्रति कुंतल कराने की मांग उठाई गई।

इनके अलावा जनपद हापुड़ गढ़मुक्तेश्वर के ग्राम ठौलपुर में जलभराव की समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराने, सूबे में बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों का उचित मुआवजा दिलाए जाने, बिजली के पेनाल्टी बिलों पर ओटीएस का लाभ देने, नवनिर्मित जागृति विहार एक्सटेंशन में तत्काल प्रभाव से पुलिस चौकी की स्थापना कराने की मांग भी रखी गई। मासिक बैठक के दौरान एकत्र किसान अधिकारियों से अपने बीच आकर ज्ञापन लेने की मांग करते रहे।

किसी अधिकारी के न आने पर वे नारेबाजी करते हुए आयुक्त कार्यालय की ओर बढ़ गए। जिन्हें देखकर सुरक्षा बलों ने प्रवेश द्वार बंद कर दिया। इस पर किसानों ने गेट पर ही धरना देते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। जिसको देखते हुए अधिकारियों ने किसानों को अंदर बुलाकर उनसे ज्ञापन लिया। इस बीच बैठक की अध्यक्षता महकार सिंह दौरालिया व संचालन युवा मंडल अध्यक्ष जीते चौहान ने किया।

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मेरठ मंडल अध्यक्ष गुड्डू प्रधान, युवा मंडल अध्यक्ष जीते चौहान, मेरठ जिला प्रभारी अशोक खटान, दिनेश त्यागी, सुभाष चंद्र, राकेश सचान, रविन्द्र दौरालिया, मनोज त्यागी, सुशील पटेल, रविन्द्र दौरालिया, छोटू गेझा, हरबीर गिरी, भवेंद्र सिसोदिया, विनेश, हरेंद्र यादव, प्रदीप चौधरी, विकल नागर, संजय दौरालिया, अमित पाल, सुभाष चौहान, राकेश चौहान, साजिद, अशफाक प्रधान, राजकुमार करनावल, अजय दबथुवा आदि ने विचार रखे।

तो पीएम की सभा में आएंगे आवारा पशु!

भाकियू की मासिक बैठक के दौरान मंडल अध्यक्ष गुड्डू प्रधान ने कहा कि एक साल की अवधि में अनेक ज्ञापन मंडल आयुक्त को दिए हैं। जिस पर अभी तक कोई विशेष कार्रवाई नहीं की गई है। आवारा पशुओं की रोकथाम की कार्रवाई आज तक फाइलों से जमीन पर नहीं निकल पाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसका निस्तारण नहीं हुआ, तो अगले माह मेरठ में होने वाली प्रधानमंत्री की रैली में हजारों आवारा पशु भी भाग लेंगे। जिसका बैठक में मौजूद किसानों ने समर्थन किया।

आलू से कोल्ड स्टोरेज हुए फुल, पड़ोसी जिलों का लेना पड़ रहा सहारा

मंडी में बहुत कम रेट मिलने के कारण आलू उत्पादक अपनी पैदावार को कोल्ड स्टोरेज में रखने को विवश हो रहे हैं। लेकिन वहां भी अधिक फसल और भंडारण की स्थिति बन रही है। स्थिति यह हो चली है कि जनपद के सभी 26 कोल्ड स्टोरेज अपनी क्षमता के अनुसार भंडारण कर चुके हैं, ऐसे में आलू उत्पादकों को हापुड़ आदि दूसरे जनपद के कोल्ड स्टोरेज का सहारा लेने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

किसानों और विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस वर्ष मेरठ जनपद की आठ हजार हेक्टेयर भूमि में लगभग दो लाख 20 हजार मैट्रिक टन आलू की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन हुआ है। मेरठ जनपद में मौजूद 26 कोल्ड स्टोरेज की भंडारण क्षमता एक लाख 50 हजार मैट्रिक टन की है। आम तौर पर आलू उत्पादक फसल के समय 40 प्रतिशत को मंडी में ले जाकर बेच देते हैं,

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जबकि अधिकतम 60 प्रतिशत आलू का भंडारण शीतगृहों में किया जाता है। इस आंकड़े के आधार पर अगर बात की जाए, तो मेरठ जनपद के शीतगृह कम नहीं होते। लेकिन इस बार मंडी में जो भाव किसान को मिल रहे हैं, वह बहुत कम हैं। आम तौर पर खुदाई के समय किसान को 450 रुपये 59 किग्रा बोरा की दर से मंडी में रेट मिलते रहे हैं। लेकिन इस बार यह रेट आधे से भी कम मिल पा रहे हैं।

ऐसे में अधिकांश किसानों का प्रयास है कि कम से कम मई माह तक आलू को सुरक्षित रख लिया जाए। जिसके बाद मंडी में रेट बढ़ जाने के बाद ही आलू को निकालकर बेचा जाए। इस संबंध में आलू एवं साग भाजी विकास अधिकारी एनके सहानिया का कहना है कि मेरठ में सरधना रोड स्थित एक शीतगृह में अभी आलू के लिए 20 हजार कुंतल की गुंजाइश है। जबकि किला और खरखौदा की बैल्ट अभी आलू को भंडारण नहीं कर पाई है।

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उनका कहना है कि अभी मेरठ जनपद के लिए पांच हजार कुंतल का लाइसेंस और मिला है। जबकि आगामी वर्ष तक दो कोल्ड स्टोरेज भी शुरू हो जाएंगे। उनका कहना है कि किला और खरखौदा क्षेत्र के किसान हापुड़ जनपद के कोल्ड स्टोरेज तक अपना आलू ले जा रहे हैं।

इसके अलावा विभाग के स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं कि दूसरे प्रदेशों की मंडी में आलू को भेजा जाए। वहीं यूएई में निर्यात के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। एनके सहानिया का कहना है कि आलू की स्थिति बेहतर बनाने की दिशा में हर संभव कदम उठाया जा रहा है।

किसानों को फ्री बिजली देने की तारीख नजदीक

मार्च महीने के तीन दिन बचे हैं, लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार के स्तर से एक अप्रैल से किसानों को नलकूपों के लिए फ्री बिजली दिए जाने की योजना को लेकर ऊर्जा निगम की ओर से कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त दिए जाने की घोषणा जोर-शोर से की हुई है। इसी को लेकर किसान भी एक अप्रैल से फ्री बिजली मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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मेरठ और बागपत जिलों में नलकूपों के कुल कनेक्शनों की संख्या करीब 76 हजार है। मौजूदा स्थिति में सरकार की ओर से किसानों को दी जाने वाली बिजली में 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। हालांकि ऊर्जा निगम इससे भी यह कहकर संतुष्ट नहीं है कि नलकूपों पर खर्च होने वाली बिजली स्वीकृत भार से कहीं अधिक होती है। इसी कारण विभाग की ओर से नलकूपों पर मीटर लगाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

वहीं किसान मीटर लगाए जाने का विरोध करते चले आ रहे हैं। इसी कशमकश के बीच सरकार की ओर से घोषित एक अप्रैल की तिथि भी आ पहुंची है। तीन दिन बाद सरकार के इस वादे को अमलीजामा पहनाया जाना है, लेकिन अभी तक इस बारे में शासन या ऊर्जा निगम की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया जा सका है, कि मुफ्त बिजली दिए जाने का प्रारूप क्या रहने वाला है।

इस संबंध में ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर का कहना है कि भाजपा के संकल्प पत्र में किसानों को नलकूप चलाने के लिए मुफ्त बिजली देने की घोषणा को एक अप्रैल से लागू किया जाएगा। इसमें अब किसी को कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए। डा. सोमेन्द्र तोमर ने पूछने पर यही जवाब दिया कि राज्य सरकार की ओर से एक अप्रैल से किसानों को मुफ्त बिजली मिलना शुरू हो जाएगा।

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हालांकि उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया, कि इस योजना को लागू करने के लिए किस प्रकार की नीति या शर्तों को लागू किया जाएगा। अधिशासी अभियंता और मेरठ के नोडल अधिकारी एके वर्मा का कहना है कि अभी तक मुख्यालय से इस संबंध में कोई आदेश नहीं आए हैं। उनका कहना है कि अभी तक किसानों को दी जाने वाली बिजली के लिए राज्य सरकार की ओर से 50 प्रतिशत बिल की राशि सब्सिडी के रूप में दी जाती है।

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