Sunday, July 21, 2024
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हत्यारोपियों को बचा रहे हैं पूर्व दर्जा राज्यमंत्री

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  • शिवा ढाबे पर अभिषेक की हत्या का मामला

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पूर्व दर्जा राज्यमंत्री पंडित सुनील भराला हत्या के एक मामले में आरोपियों को बचाने में लगे हैं। ऐसी चर्चा चल रही हैं। सुनील भराला का हत्याकांड में आरोपियों के बचाव में आने से उनकी और भाजपा की छवि धूमिल हो रही हैं। आरोपियों की तरफ से ऐसी चर्चा चला दी है कि उनकी मदद पंडित सुनील भराला कर रहे हैं, इसमें इसी वजह से थाने से ही जमानत मिल जाएगी। इस चर्चा से सुनील भराला की खुद की छवि भी प्रभावित हो रही हैं। दरअसल, हम बात कर रहे एनएच-58 पर शिवा ढाबे पर दिल्ली निवासी अभिषेक की हत्या की घटना की।

दरअसल, शिवा ढाबे पर टूरिस्ट बस से अभिषेक उसके दोस्त आये थे। यहां पर खाने का आॅर्डर दे दिया गया था। इसी दौरान सब्जी खराब होने की बात अभिषेक ने कही, जिसके बाद ढाबे के स्टाफ ने अभिषेक के साथ मारपीट कर दी। उसको डंडा लेकर दौड़ाया गया। डंडों से उस पर हमला किया गया। हमलावरों से जान बचाने के लिए अभिषेक हाइवे की तरफ को दौड़ा। वहां ट्रक ने अभिषेक को रौंद दिया, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद हमलावर भाग निकले। ये हमला ढाबा संचालक के कहने पर किया गया था। ऐसा आरोप प्रत्यक्षदर्शियों ने लगाया हैं।

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उसी को आधार बनाते हुए अभिषेक के परिजनों ने परतापुर थाने में हत्या की तहरीर देते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया हैं। घटना तो बीत गई, लेकिन पुलिस इसमें कुछ कर पाती तो दर्जाप्राप्त पूर्व राज्यमंत्री पंडित सुनील भराला आरोपियों के पक्ष में कूद गए। परतापुर थाना पुलिस को आरोपियों का नाम निकलने के लिए दबाव में लिया जा रहा हैं। ऐसा पुलिस सूत्रों का भी दावा है। भाजपा की छवि भी पूर्व राज्यमंत्री के कृत्य से खराब हो रही हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव हैं, ऐसे में हत्या जैसे मामले में भाजपा के नेता आरोपियों को पक्ष कर रहे हैं, ये संदेश भी दूर तक जा रहा हैं।

पीड़ित परिवार को न्याया दिलाने की बजाय आरोपियों का सिर्फ इसलिए पक्ष लिया जा रहा है कि वो उनकी जाति के हैं। पुलिस कुछ इस तरह से लीपापोती कर रही है कि अभिषेक पर हमला करने वाले बाहरी युवक थे। बाहरी युवकों ने ही अभिषेक पर हमला किया था। पुलिस की ये कार्यप्रणाली समझ नहीं आ रही हैं। सब्जी खराब ढाबे की थी और अभिषेक ने आपत्ति भी खाना परोस रहे ढाबा कर्मियों से की गई थी।

मारपीट भी उनके द्वारा हुई। केश काउंटर पर भी आपत्ति जतायी। बाहरी युवक क्यों मारपीट करेंगे। ये बाहरी युवक नहीं बल्कि ढाबा संचालक के ही गुर्गे थे। पुलिस ने गैर इरादत्तन हत्या का मामला भी दर्ज नहीं किया। सिर्फ मामूली मारपीट और हादसा दर्शाकर इस पूरे मामले में लीपापोती कर दी हैं। अब रही सही कसर भाजपा नेता के दबाव में आरोपियों को थाने से ही जमानत देने की तैयारी चल रही हैं। इसमें पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ये ढाबा मनोज शर्मा का है।

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