Wednesday, April 22, 2026
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शहर के बाजारों में हफ्ता वसूली का ठेका

  • ठेले खोमचे वालों के अलावा दुकान के बजाय सड़क पर दुकान लगाने वालों से होती है अवैध उगाही
  • इलाके के व्यापारी नेता और चौकी वालों की कमाई का धंधा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर के तमाम प्रमुख बाजारों में सड़कों का ठेका छोड़ दिया गया है। सड़कों का यह ठेका बाजार के कुछ व्यापारी नेताओं और इलाके के कुछ पुलिस वालों का सॉलिड कमाई का मुफीद धंधा बन गया है। जितने भी प्रमुख बाजार हैं, उन सभी में सड़कों का ठेका छोड़ा हुआ है।

यही वजह है कि अभी तो त्योहारी सीजन है, लेकिन यदि त्योहारी सीजन ना भी हो तो भी महानगर तमाम प्रमुख बाजारों में चौड़ी-चौड़ी सड़कें होने के बावजूद लोगों की भीड़ बजाए चलने के रेंगती नजर आती है। इस दौरान यदि एक बार जाम में फंस गए तो फिर घंटों जाम खुलने वाला नहीं।

ये है पूरा सिस्टम

यूं तो इलाके के थाना व चौकी का काम कानून व्यवस्था के साथ-साथ यह भी है कि इलाके में कहीं जाम न लगे, कोई भी सरकारी जगह पर स्थायी या स्थायी कब्जा ना करे। बाजारों में जाम ना लगे। सड़क पर कोई भी अपना सामान रखकर दुकान न सजा ले। दरअसल जब किसी पर्व पर मेला लगता है तो मेले के आयोजन के लिए बाजारों से दूर किसी मैदान में व्यवस्था की जाती है। ऐसे ही मेलों में लोग खुले में अपने दुकान व स्टाल सजाते हैं,

लेकिन इस प्रकार के मेलों से इतर अब बारह महीनों तीसों दिन मेले सरीखा माहौल बाजार का बना रहे, इसके लिए तमाम प्रमुख बाजारों में कुछ व्यापारी नेता व प्रभावशाली अपने इलाके के कुछ पुलिस वालों की मदद से सड़कें ही ठेके पर दे रहे हैं। यह किसी एक बाजार की बात नहीं है, महानगर के जितने भी प्रमुख बाजार हैं, उन सभी में ऐसा ही कुछ सुनने को मिल रहा है, शायद यही कारण है कि बाजारों में चलने के बजाए रेंगना पड़ता है।

ऐसे छोड़ा जाता है ठेका

शहर के तमाम प्रमुख बाजारों में जो ठेका छोड़ने का सिस्टम है कुछ साल पहले तक पर इलाके के चौकी इंचार्ज या फिर उनके बेहद विश्वास पात्र या संबंधित थाने के मुंशी के हाथों से होकर सारा काम गुजरता था, लेकिन सदर थाना के आबूलेन मार्केट का जब से डिवाइडर सिस्टम मसलन डिवाइडर पर वाहनों की पार्किंग का सिस्टम खत्म हुआ है उसक बाद से शहर के जितने भी प्रमुख बाजार हैं उनमें सड़कों को जो अब तक ठेका छोड़ा जाता था,

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उसमें इलाके के व्यापारी नेता व ऐसे ही अन्य ने हिस्सा मांग लिया और सुनने में आया है कि वो हिस्सा पुलिस वालों का देना पड़ा। हालांकि इससे नुकसान तो हुआ, लेकिन जितनी भी कलेक्शन मामले को लेकर सिरदर्दी थी वो खत्म हो गयी, यह सारी सिरर्ददी जिन्होंने हिस्सा मांग उनके सिर मढ दी गयी। अब हो यह रहा है कि जितने भी बाजार जहां कहा जा रहा है कि सड़कें ठेके पर दे दी गयी हैं, वह कलेक्शन का सारा काम बाजार के व्यापारी नेता के हाथों कराया जाता है।

सबके रेट तय

शहर के जिन प्रमुख बाजारों में सड़का ठेका छोड़े जाने की प्रथा जारी है उनमें बाजार में जितने भी खोमचे वाले, खाने पीने का सामान बेचने वाले दूसरे रहड़ी व ठेले वाले, छोटे मोटे स्टाल लगाते हैं, इनके अलावा आइसक्रीम के ठेले व स्टाल, फास्ट फूड वेन और जो भी बाजार के व्यापारी दुकान के बजाए सड़क तक अपना सामान रखते हैं उन सभी एक प्रतिदिन के हिसाब से तय रकम ली जाती है। ऐसा नहीं कि जो कलेक्शन किया जाता है

वो 10-20 या 50-100 रुपये हो, चाट पकोड़ी का ठेला लगाने वाले का प्रतिदिन का रेट 300 रुपये सुनने में आया है। इसके आसपास आईसक्रीम का ठेला लगाने वाले से कलेक्ट किया जाता है। मतलब जिसकी जैसी सेल उसको उसके अनुपात में ही एक निश्चित रकम प्रतिदिन या प्रति सप्ताह देनी होती है। बाजार के जो व्यापारी दुकान के बजाए सामान सड़क पर रखकर बेचते हैं, उनका भी रेट तय है, शायद यही कारण है कि बाजारों में पैदल निकला भी मुश्किल होता है।

ये हैं ज्यादा चर्चित बाजार

जिन बाजारों में उक्त सिस्टम की बात सुनने में आती है उनमें सबसे ज्यादा चर्चा छावनी को सदर बाजार, सदर सब्जी मंड़ी, बॉम्बे बाजार, इसके अलावा लालकुर्ती पैंठ एरिया इसको सिस्टम को लेकर सबसे ज्याद चर्चित है। पूरे पैंठ एरिया में एक भी ठेला व रेहड़ी वाला बगैर हफ्ता दिए एक दिन में भी ठहर सकता।

इस बात पर यकीन इसलिए भी किया जा सकता है, क्योंकि पैंठ एरिया इलाके में पूरे दिन टैÑफिक तड़पता नजर आता है, पुलिस मौजूद होती है, लेकिन हालत जस के तस रहते हैं। इसी प्रकार के किस्से शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट, शहर कबाड़ी बाजार और शारदा रोड समेत मेट्रो प्लाजा का एरिया सरीखे कई मार्केट हैं।

उगाही पुलिस करती है, व्यापारी नहीं

संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता का कहना है कि बाजारों में ठेलों व अन्य से उगाही पुलिस करती है कोई व्यापारी नहीं। यदि कोई व्यापारी ऐसा कर भी रहा है तो पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करे। यदि कोई व्यापारी अपने प्रतिष्ठान के सामने खडेÞ ठेले वाले से पैसे लेता है तो भी वो गलत है।

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