Monday, October 3, 2022
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मनहूस सुबह पिता सतेंद्र के पास आई कॉल, …और छिन गयीं तमाम खुशियां

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  • दुर्घटना में शहीद हुए मेरठ के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर अभिनव चौधरी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पंजाब के मोगा में एयरफोर्स का फाइटर विमान मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें मेरठ के लाल स्क्वाड्रन लीडर अभिनव चौधरी शहीद हो गए। बागपत जिले के पुसार गांव के मूलरूप निवासी अभिनव के शहीद होने की खबर उनके पिता को फोन के जरिए दी गई। जिसके बाद परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।

वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। अभिनव के अलावा परिवार में उनकी बहन भी हैं। गुरुवार देर रात एयरफोर्स का यह विमान तकनीकी खराबी के चलते क्रैश हो गया। जिसमें लेफ्टिनेंट अभिनव को जान गंवानी पड़ी।

गंगानगर निवास स्थान पर शुक्रवार को अभिनव के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं, दुर्घटना में शहीद हुए बेटे का दुख उनके पिता का हाल देखकर ही जान पड़ता था। अभिनव के पिता सत्येंद्र चौधरी ने कहा कि एयरफोर्स के जवान पुराने विमान अभी तक उड़ा रहे हैं।

जिससे जवानों को जिंदगी गंवानी पड़ रही है। कई नौजवान अभी तक अपनी जान गंवा चुके हैं। सरकार से उन्होंने मांग की है कि पुराने विमानों को तत्काल रुप से बंद कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि मेरा लाल तो चला गया, अब किसी और जवान की जान न जाए।

अभिनव के पिता ने कहा कि इस बात का ज्यादा दु:ख है कि तकनीकि खराबी के चलते उनके बेटे की जान गई। अगर जंग में शहीद होता तो गर्व होता। उधर, उनके चचेरे भाई भाई अनुज ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मिग 21 विमान उड़ते हुए ताबूत हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में कई मिग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। जिनमें जवानों को जान गंवानी पड़ी है। भले ही इनमे बदलाव करके बाइसेन बना दिया गया हो।

सातवीं कक्षा में ही देख लिया था पायलट बनने का सपना

गंगानगर निवासी अभिनव ने बचपन में ही पायलट बनने की ठान ली थी। पिता ने बताया कि बेटे ने सातवीं कक्षा में ही एयरफोर्स में जाने का मन बना लिया था। जिसके बाद सपना पूरा करने के लिए परिवार ने उन्हें पढ़ाई के लिए देहरादून भेज दिया। इसके बाद उन्होंने देहरादून आरआईएमसी से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद एनडीए में चयन हुआ और पुणे में तीन साल व हैदराबाद एएफए में एयरफोर्स का प्रशिक्षण लिया। उनके पिता प्रॉपर्टी का काम करते थे। वहीं, परिवार में मां सत्या चौधरी के अलावा एक छोटी बहन मुद्रिका भी हैं, जो कि पढ़ाई कर रही हैं।

सितंबर में आए थे घर, वर्ष 2019 में हुई थी शादी

लेफ्टिनेंट अभिनव चौधरी आखिरी बार सितंबर में घर आए थे। वहीं, वर्ष 2019 में उनका विवाह एपेक्स कालोनी निवासी सोनिका के साथ हुआ था। अपने विवाह में भी उन्होंने दहेज प्रथा को समाप्त करने का संदेश दिया था। जिसमें उन्होंने रस्म के रूप में मात्र एक रुपया ही लिया था।

उनका परिवार दहेज प्रथा का कड़े तौर पर विरोध करता है। वहीं, बता दें कि अभिनव की धर्मपत्नी ने फ्रांस से मास्टर आॅफ साइंस की पढ़ाई पूरी की है। अभिनव पठानकोट एयरबेस में तैनात थे। हाल ही में उन्हें 15 मई को घर आना था, लेकिन पिता ने उन्हें कोरोना काल में घर लौटने के बजाय देश की सेवा करने के लिए कहा।

समय की विडंंबना, मुझे उसके कंधों पर जाना था

गंगानगर स्थित निवास स्थान पर बेटे के शहीद होने की खबर से परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पिता ने रुंदन ध्वनि में कहा कि मुझे उसके कंधों पर जाना था, लेकिन समय की विडंबना में विपरीत हो रहा है। अभिनव के शहीद होने पर रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने फोन पर उनके पिता से हाल जाना। वहीं, पड़ोसियों ने भी घर पहुंचकर दुख व्यक्त किया। वह बेहद ही मिलनसार स्वभाव के थे।

कांग्रेसियों ने परिजनों को दी सांत्वना

हादसे में शहीद हुए पायलेट अभिवन चौधरी के गंगानगर स्थित आवास पर पहुंचकर कांग्रेसियों ने उनके परिजनों सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि अभिनव बहुत साहसी थे। वह देश के लिये कुर्बान हुए हैं, देश उन्हें हमेशा याद रखेगा। उन्होंने परिजों को ढांढस बंधाया। इस मौके पर महानगर अध्यक्ष जाहिद अंसारी, अखिल कौशिक, युगांश राणा आदि मौजूद थे।

शादी में दहेज नहीं लेकर अभिनव ने कायम की थी मिसाल

फाइटर पायलट अभिनव ने शादी में दहेज नहीं लेकर, एक रुपया का रिश्ता कर एक मिशाल कायम की थी। जिसके बाद ही वे सुर्खियों में आए थे। उन्होंने ऐसा कारनामा कर दहेज के लालची लोगों की आंख खोलने का काम किया था। उनके साथ उनके इस मिशाल कायम करने वाले कार्य को भी हमेशा याद रखा जाएगा।

वायुसेना के फाइटर पायलट अभिनव चौधरी की शादी करीब डेढ़ वर्ष पूर्व 25 दिसंबर 2019 को बिनौली ब्लॉक के मवीकलां गांव निवासी प्रधानाध्यापक शिवकुमार की पुत्री सोनिका उज्जवल के साथ हुई थी। करोड़ों के रिश्ते ठुकराकर युवा लेफ्टीनेंट के परिवार ने पूरे समाज को सकारात्मक संदेश दिया था।

परिवार ने रस्म में युवती पक्ष से भेंट की गई नकद धनराशि भी ससम्मान वापस लौटा दी। ऐसा मिशालपूर्ण कार्य करके दहेज के लोभियों पर सबक सिखाने का काम किया था। फाइटर पायलट होने के बाद भी एक रुपया का रिश्ता करके अभिनव सुर्खियों में आ गए थे।

बता दे कि उनकी पत्नी सोनिका उज्ज्वल ने फ्रांस में रहकर मास्टर आॅफ साइंस की डिग्री हासिल की थी। बताया कि हाल में वह कहीं पर कोई नौकरी नहीं करती थी और अभिनव के साथ ही रह रही थी। जांबाज फाइटर पायलट अभिनव के साथ-साथ उनके कार्यो को भी कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

बचपन में ही माता-पिता के साथ चले गए थे मेरठ

परिजनों ने बताया कि अभिनव चौधरी व उनकी छोटी बहन मुद्रिका चौधरी बचपन से ही अपने माता सत्य चौधरी व पिता सतेन्द्र चौधरी के साथ गांव छोड़कर मेरठ में चले गए थे। गांव में उनके परिवार के लोग रह गए थे, जो हाल ही में भी यहीं रह रहे हैं। पिता की जमीन जायदाद भी गांव में ही है।

अभिनव स्कूल की पढ़ाई के दौरान छुट्टियों में गांव में घूमने आते थे और बचपन के दोस्तों के साथ खूब मौच मस्ती करते थे। बताया कि सभी के साथ उनका अच्छा व्यवहार था और अपने बड़ों का आदर करते थे।

कुक्कु के नाम से चलता था पुसार में मेडिकल स्टोर

पायलट अभिनव चौधरी को घर के सभी लोग प्यार में कुक्कु पुकारते थे। घर व रिश्तेदारी में उनका यह नाम बहुत प्रसिद्ध था। अभिनव के नाम से बहुत कम लोग उन्हें जानते थे। गांव में भी उनके दोस्त व कुक्कु कहकर पुकारते थे। उनके इस प्यार के नाम से उनके पिता ने पुसार बस स्टैंड पर एक मेडिकल स्टोर खोला गया था।

अभिनव जब भी गांव में आते थे तो वह मेडिकल स्टोर पर जरूर बैठते थे। यह मेडिकल स्टोर कई वर्षों तक चला। लेकिन अब यह मेडिकल स्टोर किसी दूसरे नाम से चल रहा है। जिसको देखकर आज भी पायलट के बचपन की याद ताजा हो जाती है।

पांच साल में 483 मिग क्रैश, 170 पायलट शहीद

पंजाब के मोगा में मिग 21 क्रैश होने से शहीद हुए अभिनव चौधरी के चचेरे भाई की यह टिप्पणी मौजूद है कि मिग विमानों के रूप में आसमान में ताबूत उड़ रहे हैं। इन विमानों को अपग्रेड किये जाने के बाद भी यह विमान उड़ान में सही नहीं बैठ रहे हैं। पिछले पांच सालों में 483 मिग विमान हादसे के शिकार हो चुके हैं और इनमें 170 पायलट शहीद हो चुके हैं।

इस हादसे में एयरफोर्स ने न केवल मिग फाइटर जेट गंवा दिया, बल्कि एक जांबाज पायलट भी खो दिया। एयरफोर्स सूत्रों ने बताया कि पश्चिमी सेक्टर में इन दिनों इंडियन एयरफोर्स की ट्रेनिंग चल रही है। इसमें बड़ी संख्या में फाइटर जेट्स हिस्सा ले रहे हैं। गुरुवार की रात करीब एक बजे स्क्वाड्रन लीडर अभिनव चौधरी ने अपना मिग-21 बाइसन लेकर उड़ान भरी।

युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के बाद रात करीब दो बजे वे सूरतगढ़ एयरबेस की तरफ वापस लौट रहे थे। मोगा के ऊपर से निकलते समय उनके विमान के इंजन में आग लग गई। अभिनव ने आखिरी समय तक विमान को संभालने का प्रयास किया, ताकि वे इसे आबादी क्षेत्र से दूर ले जा सकें। आबादी से दूर मोड़ उन्होंने इजेक्ट किया, लेकिन तब तक विमान काफी नीचे आ चुका था। ऐसे में इजेक्ट करने के बावजूद उनका पैराशूट खुल नहीं पाया। इसके बाद विमान एक जोरदार धमाके के साथ नीचे जा गिरा। उससे थोड़ी दूरी पर अभिनव का शव मिला है।

मार्च में भी बाइसन क्रैश हो गया था

इससे पहले 17 मार्च को भी एक हादसे में फाइटर विमान मिग 21 बाइसन उड़ान के दौरान क्रैश हुआ था। इस हादसे में एयरफोर्स के कैप्टन की जान चली गई थी। इससे पहले जनवरी में राजस्थान के सूरतगढ़ में भी मिग-21 बाइसन क्रैश हुआ था। उस वक्त उड़ान के दौरान विमान में तकनीकी खराबी आ गई थी।

मिग-21 को इंडियन एयरफोर्स का बैकबोन कहा जाता था, लेकिन अब ये विमान पुराने हो चुके हैं। अपग्रेड के बावजूद ये न तो युद्ध के लिए फिट हैं और न ही उड़ान के लिए। बीते पांच साल में 483 से ज्यादा मिग विमान हादसे के शिकार हो चुके हैं। इन हादसों में 170 से ज्यादा पायलटों की जान जा चुकी है।


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