Tuesday, January 25, 2022
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हो गए शहरी, लेकिन हालात गांव से भी बदतर

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम की सीमा में तो विस्तार हो गया, लेकिन उसकी सुविधाओं में विस्तार अभी तक नहीं हो पाया है। जो गांव नगर निगम में शामिल हुए थे उनके हालात आज पहले से भी बदतर स्थिति में हैं। न तो वहां जल निकासी की कोई सुविधा है और न ही लाइटिंग की कोई व्यवस्था है।

नालियों का पानी गलियों में बहता है। सही ड्रेनेज सिस्टम न होने के कारण लोगों को परेशान होना पड़ता है। वार्ड-33 के जाहिदपुर, घोसीपुर समेत कई गांवों में हालात बदतर हैं, लेकिन स्थिति में सुधार होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। उधर, अभी नगर निगम और गांवों को भी सीमा में शामिल करने की योजना तैयार कर रहा है।

बता दें कि नगर निगम की ओर से लगातार गांवों को नगरीय क्षेत्र में शामिल करने की योजना तैयार की जा रही है। नगरीय सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन के पास पहुंच चुका है। जिसमें नगर निगम की ओर से एक दर्जन से अधिक गांवों को नगर निगम में शामिल करने की योजना है। यह पिछले चार सालों से शासन के पास स्वीकृति के लिये अटका है।

हालांकि इनमें से कई गांव सीमा में शामिल भी हो चुके हैं। वर्तमान सत्र के शुरू में ही काजीपुर, घोसीपुर हाजीपुर समेत कई गांव सीमा में शामिल हुए थे। अब अभी और गांवों को भी नगर निगम में शामिल किये जाने की योजना है। नगर निगम लगातार सीमा में विस्तार तो कर रहा है, लेकिन यहां सुविधाएं न के बराबर हैं। कुछ सालों पहले ही नगर निगम में सीमा विस्तार कर वार्डों की संख्या 80 से 90 की, जिसमें काफी गांव शमिल हुए।

वार्ड में बढ़ोतरी, सफाई कर्मचारियों की संख्या घटी

दरअसल, शहर जहां राज्य स्मार्ट मिशन में शामिल है। रैपिड रेल का कार्य भी तेज गति से हो रहा है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं से शहर वासी अब भी अछूते हैं। यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। नगर निगम की ओर से सीमा का तो विस्तार किया गया, लेकिन सफाई कर्मचारियों की संख्या को नहीं बढ़ाया गया।

सफाई कर्मचारी उतने के उतने ही बल्कि उनकी संख्या हर महीना घटती जा रही है। उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर संघटन के महामंत्री कैलाश चंदौला व स्थानीय निकास सफाई मजदूर संघठन के जिलाध्यक्ष दीपक मनोठिया ने बताया कि नगर निगम ने सीमा का तो विस्तार कर लिया, लेकिन सफाई कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई।

पहले जब 80 वार्ड थे तो सफाई कर्मियों की संख्या 3000 के पास थी, लेकिन अब 90 वार्ड हुए तो सफाई कर्मचारियों की संख्या और भी घट गई है। सफाई कर्मियों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हुआ है।

बल्कि लोग रिटायर्ड हो रहे हैं और उनकी संख्या कम हो रही है। उन्होंने बताया कि यहां आधार कार्ड के आधार पर भी कर्मचारियों को रिटायर्ड किया जा रहा है। जोकि गलत है। उन्होंने नगरायुक्त को ज्ञापन देकर कर्मचारियों का मेडिकल कराकर रिटायर्ड कराये जाने की भी मांग की है।

वार्ड-33 के गांव जाहिदपुर में हालात बद से बदतर

नगर निगम की लापरवाही का जीता जागता उदाहरण वार्ड-33 का गांव जाहिदपुर है। जाहिदपुर समेत घोसीपुर, काजीपुर वार्ड-33 में शामिल हुए थे। यहां लोगों को शहरी क्षेत्र में शामिल होने का सौभाग्य तो मिला, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाएं अभी तक नहीं मिल पाई है।

जाहिदपुर की बात करें तो यहां अभी तक खंभों पर लाइटें नहीं लगी हैं। यहां का ड्रेनेज सिस्टम इतना खराब है कि जरा-सा पानी नालियों में आया तो वह सड़कों पर आ जाता है। गांव के बाहर अभी तक नाले का निर्माण नहीं हो पाया है। जिस कारण सड़कों पर पानी भर आता है।

कई बार इस संबंध में पार्षद से शिकायत की गई, लेकिन पार्षद की ओर से कोई सुनवाई नहीं होती। गांव में लाइटें तक नहीं लगी हैं। शाम होते ही यहां अंधेरा छा जाता है। यहां नगर निगम की ओर से प्रत्येक वार्ड के लिये मात्र 25 लाइटें ही पास की गयीं , लेकिन यह लाइटें भी अभी तक नहीं लग पाई है। कूड़ा यहां सड़कों पर ही पड़ा रहता है। कई बार अधिकारियों को भी अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।

जनता सुधरे तो बने बात कूड़े में रोज लग रही आग

मेरठ: शहर में कूड़ा जलना बंद नहीं हो पा रहा है। अगर यही हालात रहे तो वायु प्रदूषण और भी तेजी के साथ बढ़ेगा। नगर निगम की ओर से निगरानी टीम तो बनाई गई हैं, लेकिन ये टीमें कहां-कहां जा रही हैं ये तो वही जाने।

क्योंकि अगर टीमे शहर में घूम रही हैं तो कूड़ा क्यों जल रहा है? शहर में दिनभर में न जाने कितने स्थानों पर कूड़े में आग लगाई जा रही है, लेकिन कोई देखने वाला नही है। बता दें कि मंगलवार को वार्ड-33 के जाहिदपुर में कूड़ा जलता मिला।

यहां किसी ने कूड़े के ढेर में आग लगा दी जिससे काला धूआं निकलता रहा। आग लगी रही, लेकिन नगर निगम की ओर से कोई भी टीम यहां नहीं पहुंची और न ही उन्हें इसकी जानकारी मिल पाई।

अगर टीम इसी प्रकार से कार्य करती रही तो उन्हें मुश्किल ही कोई जगह ऐसी मिले जहां आग लगी हो। उनकी लापरवाही के कारण यहां वायु प्रदूषण और अधिक बढ़ रहा है और इसे रोक पाना मुश्किल होगा।

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