- भद्रा काल एक बजकर 54 मिनट तक रहेगा
- होली की पूर्व संध्या पर अग्नि पूजन का होता है विधान
जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: रविवार को होलिका दहन का शुभ समय 6 बजकर37 मिनट से रात आठ बजकर 56 मिनट तक रहेगा। रंगों का पर्व होली एक सांस्कृतिक, धार्मिक व पारंपरिक त्यौहार है। होली वसंतोत्सव के रुप में फाल्गुन मास को पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।
होली का पर्व दो दिनों का मनाया जाता है। नक्षत्र और ज्योतिष के अनुसार होलिका दहन की रात काफी प्रभावशाली होती है। होलिका दहन के समय की जाने वाली पूजा से घर में सुख समृद्धि तो आती है जीवन में कष्ट भी दूर हो जाते है।
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योषिविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस साल होलिका दहन 28 मार्च रविवार को होगा। होलिका दहन का शुभ समय शाम छह बजकर 37 मिनट से आठ बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस साल होली पर कोई विशेष योग नहीं बन रहे हैं। इस बार होली पर सर्वाथ सिद्धी योग, अमृत सिद्धी योग, ध्रुव योग बन रहे है।
होलिका दहन में अशुभ माना गया भद्रा इस बार बाधा नहीं बनेगा। इस साल भद्रा काल एक बजकर 54 मिनट तक रहेगा। कोई भी शुभ कार्य भद्रा काल में नहीं होता। पुरणों में भद्रा को सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन बताया गया है। रंग पर्व होली की पूर्व संध्या पर होलिका दहन से पूर्व अग्निदेव की पूजा का विधान है। अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते है।
इसलिए सनातन धर्म को मानने वाले लोग भक्त प्रहलाद पर आये संकट को टालने और अग्निदेव द्वारा ताप के बदली उन्हे शीतलता देने की प्रार्थना करते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने की बात कहीं गई है।
नारद पुराण के अनुसार होलिका दहन को भद्रा रहित प्रदोषकाल में सर्वाेंत्तम माना गया है। होहिका दहन के समय परिवार के सभी को एक साथ गेहूं की हरी बालियों को लेकर पवित्र अग्नि में समर्पित करना चाहिए। ऐसा करने में घर में सुख समृद्धि का आगमन होता है। होली पर्व में रंगों का भी अपना महत्व है।
रंग हमारी भावनाओं को दर्शाते हैं। रंगों के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रुप से प्रभावित होता है। इस कारण हमारी भारतीय संस्कृति में होली का पर्व फूलों, रंगों और गुलाल के साथ खेलकर मनाया जाता है। सौहार्दपूर्ण ढंग से होली खेलने से आस पास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होत है। होलिका दहन के बाद भस्म को मस्तक पर लगानी चाहिए।
होलिका की बची हुई अग्नि व राख को अगले दिन प्रात: घर पर लकर आनी चाहिए। इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती है। होली पूजन करते समय मुख पूर्व व उत्तर दिशा में होना चाहिए। मनोकामना पूर्ति के लिए 11 गोमती चक्र हाथ में रखकर 21 बार मानसिक रुप से कहकर गोमती चक्र होलिका की अग्नि में डाल देने चाहिए।

