Wednesday, December 8, 2021
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संक्रमित अधिवक्ता का दर्द: मेडिकल से बेहतर घर में मरना

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  • कई बार कहने के बाद भी मेडिकल स्टाफ ने टेस्ट के लिए ब्लड तक नहीं लिया

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रमुख सचिव स्वास्थ्य की नसीहत के बाद भी मेडिकल में बनाए गए कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड की हालात में रत्तीभर भी सुधार नहीं है। आइसोलेशन वार्ड के बद से बदतर हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां भर्ती शहर के सीनियर अधिवक्ता रिपुदमन कोशिश का कहना है कि यहां मरने से बेहतर है कि घर पर जाकर मर जाऊं। रिपुदमन का हालचाल पूछने के लिए एक अन्य अधिवक्ता केपी जोशी ने उन्हें कॉल किया था।

उस फोन कॉल की वायरल हो रही रिकॉर्डिंग ने खामियों से पर्दा हटा दिया। ये कोई पहला वाक्या नहीं है। इससे पूर्व शुक्रवार को जब प्रमुख सचिव स्वास्थ्य मेडिकल का निरीक्षण कर रहे थे। उसी दौरान एक सिख कोविड संक्रमित वार्ड से बाहर आ गया था, उसने इलाज को लेकर किए जा रहे तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी थी।

कंट्रोल रूम से शिकायत बेअसर

मेडिकल के आइसोलेशन वार्ड की बद इंतजामी की शिकायत अधिवक्ता ने कंट्रोल रूम पर की। वहां से अभी दिखवाते हैं कहकर काल दी गयी। घंटों बाद भी जब कोई नहीं आया तो दोबारा कॉल किया गया, इस बात उत्तर दिया कि हमने तुम्हारी नौकरी नहीं कर ली है। ये हमारा काम नहीं।

सीजेएम और बार सेक्रेटरी की भी नहीं सुनी

रिपुदमन की माने तो उन्होंने अपनी व्यथा सीजेएम व बार के सेक्रेटरी को भी सुनायी। उन्होंने भी मेडिकल प्रशासन के अधिकारियों से मामले को दिखवाने को कहा, लेकिन फिर भी कोई चिकित्सक बार्ड में नहीं आया। एक वार्ड ब्वॉय आकर एक गोली व सिरप दे गया। कोई नर्स या डाक्टर चेक करने नहीं आए।

भर्ती कर भूला स्टाफ

संक्रमित अधिवक्ता रिपुदमन की माने तो सुबह करीब 11 बजे उन्हें भर्ती किया गया था। उन्होंने खुद स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी थी, लेकिन मेडिकल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करने के बाद स्टाफ ने उन्हें भूला दिया। कोई सुध लेने नहीं आया।

आक्सीजन मास्क तक नहीं

कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड की बद इंतजामी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भीतर संक्रमितों के लिए आक्सीजन मास्क तक नहीं है। एक मरीज का यूज किया आक्सीजन मास्क दूसरे मरीज को लगा दिया जाता है। जब रिपुदमन के साथ ऐसा करने लगे तो उन्होंने मना कर दिया। वह अपने साथ एक मास्क रखकर ले गए थे। वहीं, उन्होंने फिर यूज किया।

नस बांधने को बैल्ट तक नहीं

संक्रमित मरीज का टेस्ट के लिए बल्ड लेने को हाथ की नसों पर बांधने के लिए वार्ड में बैल्ट तक नहीं है। बांधने के लिए बैल्ट के बजाय ग्लब्ज का यूज किया जा रहा है। संक्रमित अधिवक्ता ने जब इसका विरोध किया तो कहा कि बाजार से सामान मंगवा लो। उन्होंने अपने साथी अधिवक्ता से कहा कि वह यहां रहकर नहीं मरना चाहते। यदि मरना ही है तो फिर अपने घर जाकर क्यों न मरा जाए।

लगातार मिल रहीं शिकायत

अधिवक्ता रिपुदमन कोशिश की कोई अकेली शिकायत नहीं है। शुक्रवार को जब प्रमुख सचिव मेडिकल में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के लाव लश्कर के साथ दौरा कर रहे थे, उसी दौरान एक संक्रमित सिख मरीज वार्ड से बाहर आ गए थे। वो चाहते थे कि प्रमुख सचिव वार्ड के भीतर आकर मरीजों से फीड बैक लें, लेकिन साथ चल रहे अफसरों का अमला पूरी तरह से सावधान था। प्रमुख सचिव को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गयी।

ये कहना है प्राचार्य का

मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि पर्याप्त सामान है। यदि किसी कारण से देरी हुई है तो इसकी जांच करायी जाएगी। आइसोलेशन वार्ड में निरंतर सीनियर डाक्टरों की ड्यूटी लगायी जा रही है। यदि किसी को कोई असुविधा है तो उनके परिजन सीधे प्राचार्य कक्ष में आकर संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह खुद नियमित रूप से फीड बैक ले रहे हैं।

कोरोना संक्रमण से निपटने को निजी चिकित्सकों से मांगी मदद

प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आलोक कुमार ने शनिवार को आईएमए प्रतिनिधियों, प्राइवेट डाक्टर व र्नसिंग होम संचालको के साथ एलएलआरएम मेडिकल कालेज के आडिटोरियम में बैठक की। प्रमुख सचिव ने कहा कि प्राइवेट डाक्टर व नर्सिंग होम संचालक कोरोना नियंत्रण में सहयोग करें व कोरोना के संदिग्ध मरीजो की सूचना नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग को दें।

उन्होंने कहा कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक मास्क का उपयोग अत्यंत आवश्यक है, इसके लिए आमजन को प्रेरित करे। उन्होंने प्राइवेट डाक्टर्स व र्नसिंग होम में कोरोना जांच के सैम्पल लेने की व्यवस्था हो तथा सैम्पल को मेडिकल कालेज व अन्य जांच केन्द्रों पर भेजा जाये इसके लिए उन्होंने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करने के लिए कहा जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मेडिकल प्राचार्य व आईएमए के अध्यक्ष होंगे।

केजीएमयू लखनऊ में ईसीसीएस (इलेक्ट्रॉनिक कोविड केयर सपोर्ट) नेटवर्क जिसके माध्यम से वरिष्ठ चिकित्सक से वर्चुअल संवाद कर किसी भी मरीज के संबंध में सलाह ले सकते हैं। मेरठ से भी र्नसिंग होम व कोरोना का इलाज कर रहे अस्पताल इसका उपयोग करें।

आयुक्त अनीता सी. मेश्राम ने कहा कि जिस भी मरीज को बुखार है या सांस लेने में तकलीफ है उनकी कोरोना जांच अवश्य करायी जाये। आईएलआई व सॉरी के मरीजों की भी कोरोना जांच आवश्यक रूप से करायी जाये। डीएम के. बालाजी ने कहा कि व्यक्ति की जितनी जल्दी कोरोना जांच होगी तो वह अपने व अपने परिवार को सुरक्षित रख सकता है। अस्पतालों से समय रहते मेडिकल कालेज को मरीज को भेजना आवश्यक है ताकि उसका जीवन बचाया जा सके।

केजीएमयू लखनऊ के डा. सूर्यकान्त त्रिपाठी ने किस स्थिति होने पर मरीज को मेडिकल कालेज (एल-3 कोविड अस्पताल) में भेजा जाना है, के संबंध में कहा कि इसके लिए सात मुख्य कारक है जिसमें अल्टर्ड सेन्सोरियम या कमजोर सामान्य स्थिति, दो या तीन दिन से लगातार उपचार के बावजूद 101 डिग्री से ऊपर बुखार रहना, 120 से ज्यदा पल्स रेट होना, सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 से कम होना, श्वांस गति 30 प्रति मिनट से ज्यादा होना, आॅक्सीजन स्तर/सेचुरेशन 90 से कम होना व विभिन्न अंगों के अक्रियाशील होने पर मरीज को समय रहते तत्काल एल-3 अस्पताल भेजें।

एसजीपीजीआई लखनऊ के डा. संदीप कुबा ने कहा कि कोरोना मरीज के इलाज में प्रथम दस दिवस अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोविड-19 से संबंधित विभिन्न दिशा-निर्देश व अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि जरा सी सावधानी से रिकवरी रेट बढ़ाया जा सकता है।

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