- एक माह में अविरल, निर्मल बहेगी बूढ़ी गंगा
- प्रशासन सख्त, अतिक्रमण पर लेखपालों को दिए सख्त आदेश
- बूढ़ी गंगा पर पर कब्जा करने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महाभारतकालीन हस्तिनापुर का गौरव लौटाने के लिए नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट और जनवाणी की मुहिम का असर दिखना शुरू हो गया है। बूढ़ी गंगा के उद्धार के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मिल रहे समर्थन के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी नींद से जागे और उसने बूढ़ी गंगा के अविरल, निर्मल प्रवाह के लिए एक माह का समय अधिनस्तों को दिया। इस पूरे मामले पर एसडीएम मवाना अखिलेश यादव ने बैठक ली और बूढ़ी गंगा की हो रही ‘ना-कद्री’ (अपमान) पर सख्ती दिखाते हुए तमाम लेखपालों को निर्देश दिए कि वो यहां अतिक्रमण कारियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्रशासन को उपलब्ध कराएं।

बैठक में एसडीएम ने सख्त निर्देश दिए कि हर हाल में पूरी बूढ़ी गंगा का अविरल निर्मल प्रवाह सुनिश्चत करें अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। बैठक के दौरान नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं के खिलाफ भी सख्ती की गई और उनसे पूछा गया कि आखिर क्यों नालों का पानी बिना ट्रीटमेंट के बूढ़ी गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है। लेखपालों को चेतावनी देते हुए एसडीएम ने कहा कि भविष्य में यदि बूढ़ी गंगा की जमीन पर कोई भी अवैध निर्माण वजूद में आया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन लोगों ने बूढ़ी गंगा पर अवैध कब्जे कर रखे हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. प्रियंक भारती ने बताया कि बैठक में यह भी तय हुआ है कि बूढ़ी गंगा पर वृहद पौधरोपण कार्यक्रम होगा जिसके लिए प्रशासन ने सहमति प्रदान कर दी है। इसके अलावा यहां बूढ़ी गंगा की जमीन का सीमांकन भी किया जाएगा।

