Friday, July 19, 2024
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महामारी की रफ्तार पकड़ रही लंपी स्किन डिजीज

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  • पशुपालन विभाग का आंकड़ा 242, लेकिन वास्तविक संख्या हो सकती है कहीं ज्यादा
  • जिला पशु चिकित्सा अधिकारी ने की डीएम को रिपोर्ट भेजकर बैठक बुलाने की अपील
  • पशुपालकों को जागरूक करने के लिए पत्रक वितरित करने का भी चलाया गया अभियान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लंपी स्किन रोग से ग्रस्त गोवंशों की संख्या महामारी के संकेत देने लगी है। पशुपालन विभाग की टीम सुबह से रात तक बीमार पशुओं के उपचार में लगी है, लेकिन खास तौर पर जिस गति से गोवंश चपेट में आते जा रहे हैं, उसे देखते हुए उपचार के संसाधन बौने साबित होने लगे हैं। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी ने इस संबंध में रिपोर्ट तैसार करके डीएम को भेजी है, जिसमें तत्काल बैठक बुलाकर प्रभावी कदम उठाने की अपील की गई है।

इस बीच विभागीय आंकड़ों के अनुसार रोग्रस्त गोवंश की संख्या 157 से बढ़कर 242 तक पहुंच चुकी है। पशुपालन विभाग की ओर से जनहित में पत्रक प्रकाशित कराते हुए पशुपालकों के बीच वितरण का अभियान भी शुरू कर दिया गया है, जिसमें लंपी स्किन रोग को लेकर भयभीत न होने के साथ-साथ इसकी रोकथाम और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए जागरूक रहने की अपील की गई है।

मंगलवार को जिले भर से ली गई रिपोर्ट के आधार पर जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश गर्ग ने बताया कि सबसे ज्यादा रोगग्रस्त 72 गोवंश दौराला-सकौती क्षेत्र में पाए गए हैं। दूसरे स्थान पर सरूरपुर क्षेत्र से 26 गोवंश के रोगग्रस्त होने की रिपोर्ट प्रेषित की गई है। इसी प्रकार पूरे जनपद में रोगग्रस्त गोवंश की संख्या 242 तक पहुंच चुकी है।

इन आंकड़ों के बीच जनवाणी संवाददाता ने गंगानगर क्षेत्र में कुछ पशुपालकों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया। जिसमें चिंताजनक बात यह सामने आई कि एक संस्थान में बनी गोशाला में मौजूद 35 गोवंशों में 20 लंपी स्किन डिजीज की चपेट में आ चुके हैं। जबकि एक और पशुपालक ने बताया कि उनके यहां दो गाय और दो गोवंश हैं, इन चारों में रोग के लक्षण नजर आ रहे हैं।

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इसके अलावा छुट्टा पशुओं में शामिल अधिकांश गोवंश में चमड़ी पर चकत्ते और गांठें नजर आ रही हैं। वहीं कैंट क्षेत्र में छुट्टा गायों में कई इस रोग की चपेट में नजर आई हैं। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश गर्ग का कहना है कि इस संबंध में डीएम को रिपोर्ट प्रेषित करते हुए उनसे बैठक बुलाने की अपील की गई है। साथ ही तहसील स्तर पर तैनात पशु चिकित्साधिकारियों को नोडल अधिकारी और ब्लॉक स्तर के पशु चिकित्सकों को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है।

पशु पालन विभाग से जुड़े चिकित्सकों और पशुधन प्रसार अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि रोगग्रस्त पशुओं के बारे में सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचा जाए। उपचार प्रारंभ कराते हुए पशुपालकों को रोग की रोकथाम और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए। साथ ही निरंतर भ्रमण करके लंपी स्किन डिजीज की चपेट में आने वाले पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की व्यवस्था कराने के निर्देश भी अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए गए हैं।

जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश गर्ग की ओर से पशुपालकों के लिए जारी की गई एडवाइजरी को पत्रक के रूप में वितरित कराने की मुहिम भी शुरू की गई है। जिसमें बताया गया है कि वायरस से फैलने वाले लंपी स्किन डिजीज में पशुओं की चमड़ी पर चकत्ते होने, गांठें नजर आने, बुखार होने, खाना-पीना छोड़ देने के लक्षण सामने आते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय पर सूचना अवश्य दी जाए।

बीमार पशुओं को पशु बाजार, मेले आदि न ले जाने, एक स्थान से दूसरे स्थान पर न ले जाया जाए। बीमार पशुओं की सेवा में लगे व्यक्ति को भी स्वस्थ पशुओं से दूर रहने की सलाह दी गई है। उनका कहना है कि लंपी त्वचा रोग मच्छरों, मक्खियों, जूं-चिचड़ी की वजह से फैलता है। रोगग्रस्त गाय का दूध डेयरी पर न बेचने और उबालकर ही प्रयोग करने की सलाह भी दी गई है। इसके अलावा अपने क्षेत्र में फॉगिंग और कीटनाशक का छिड़काव कराने के लिए भी कहा गया है।

देशी नुस्खे और होम्योपैथिक दवाइयां हैं कारगर

डा. अखिलेश गर्ग ने बीमार पशुओं के सेंपल लेने में सहयोग की अपील करते हुए पशुपालकों से आग्रह किया है कि गलत जानकारी से गुमराह होने के बजाय पशु चिकितसक से संपर्क करके भ्रांतियों को दूर कर लिया जाए।

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उन्होंने बताया कि लंपी स्किन डिजीज में देशी नुस्खे और होम्योपैथिक दवाइयां कारगर हुई हैं, जिन्हें पशु चिकित्सा अधिकारी के परामर्श से रोगग्रस्त पशुओं को दिया जा सकता है।

पशु चिकित्सकों ने ऐसे निकाला है उपचार का फार्मूला

  • बुखार की दवा पैरासिटामोल अपने पशु को खिला सकते हैं।
  • होमियोपैथी दवा बीएच अडर पॉक्स की दो एमएल की खुराक दिन में तीन बार लाभकारी है।
  • 20 ग्राम काली मिर्च, 20 ग्राम हल्दी, 100 ग्राम देशी घी के साथ दें। पशु को लाभ होगा।
  • 100 ग्राम सफेद फिटकरी को 100 लीटर पानी में घोलकर अपने पशुओं को नहलाएं।
  • 500 ग्राम लाल फिटकरी को 20 लीटर पानी में घोलकर गाय को अच्छी तरह नहलाकर 10 मिनट बाद चार बाल्टी साफ पानी से गाय को नहला दें।
  • 20 ग्राम हल्दी 100 ग्राम वनस्पति घी के साथ रोटी पर रखकर रोज शाम को एक बार खिलाएं।
  • 500 ग्राम मोटा पिसा बाजरा लेकर उसमें दो बड़ा चम्मच हल्दी मिलाएं। एक बड़ा चम्मच देशी घी मिलकर गूंद लें। दो बड़ी रोटी बनाकर एक तरफ से चूल्हे पर सेककर बीमार पशु को खिलाएं।
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