Saturday, June 12, 2021
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वैक्सीनेशन में भारी कमी, स्वास्थ्य विभाग की सांसे थमी

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वैक्सीनेशन करना स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती

हजारों की संख्या में 200 का आंकड़ा भी नहीं हो रहा पार


दानिश अंसारी |

सरधना: ग्रामीण क्षेत्र में वैक्सीनेशन करना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। क्योंकि गांवों में लोग वैक्सीन का टीका लगवाने को तैयार नहीं हैं। हजारों की आबादी वाले गांवों में 200 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पा रहा है।

वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव कैंप भी लगवाए जा रहे हैं। बावजूद इसके टीकाकरण का आंकड़ा नहीं बढ़ पा रहा है। यहां तक कि रोजाना मिलने वाला टारगेट भी पूरा नहीं हो रहा है। जिससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उच्च स्तर पर जवाब देना भारी पड़ रहा है।

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शासन स्तर से गांव-गांव वैक्सीनेशन कारने का आदेश दिया गया है। शहरों में आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद वैक्सीन का टीका लगाया जा रहा है। मगर गांव में रजिस्ट्रेशन को लेकर आ रही परेशानी को देखते हुए शासन ने यह फैसला लिया था।

अब प्रत्येक ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव कैंप लगाकर टीकाकरण कर रही है। सरधना क्षेत्र में भी कैंप लगाए जा रहे हैं। मगर ग्रामीणों का टीकाकरण की ओर कोई रुझान नहीं है। मुफ्त टीकाकरण और वह भी घर बैठे। इसके बाद भी टीके लगवाने को तैयार नहीं हैं।

जिससे स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालत यह है कि हजारों की आबादी वाले गांव में टीकाकरण का आंकड़ा 200 की संख्या भी पार नहीं कर पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा निगरानी टीम का भी सहयोग लिया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है।

इसके बाद भी टीकाकरण की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। हालत यह है कि रोजाना मिलने वाला टारगेट भी स्वास्थ्य विभाग पूरा नहीं कर पा रहा है। जिससे उच्च स्तर पर जवाब देना भारी पड़ रहा है। ऐसे में जहां वैक्सीन की कमी का शोर मचा रहा है। उसके उलट अब कोई टीका लगवाने वाला नजर नहीं आ रहा है।

टीका लगवाने को किया जा रहा जागरूक

गांवों में टीकाकरण के लिए निगरानी समिति के साथ ही जिम्मेदार लोग ग्रामीणों को जागरुक करने का काम कर रहे हैं। जिसका परिणाम भी सामने आ रहा है। मगर वह काफी नहीं है। क्योंकि जितनी बड़ी संख्या में टीका लगना चाहिए, संख्या उससे बहुत कम है।

टीके खराब होने का भी खतरा

वैक्सीनेशन को लेकर टारगेट पूरा करना भी अहम् बात है। क्योंकि वैक्सीन की भी अपनी समय सीमा है। यदि तय समय के भीतर वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है तो वह खराब हो जाती है। जिससे आर्थिक रूप से काफी नुकसान है। इस नुकसान को देखते हुए ही सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए सीधे अस्पताल जाकर रजिस्ट्रेशन कराके टीका लगवाने की पॉलिसी बनाई थी।

18 से अधिक आयु वालों मिल नहीं रही

वैक्सीन का टीका लगवाने के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। हालत यह है कि आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन करके एक शहर से दूसरे शहर जाकर टीका लगवा रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 45 वर्ष से अधिक आयु वालों के साथ उलटा हो रहा है। इस आयु के लोग टीकाकरण के लिए आने को तैयार नहीं हैं।

इन गांवों में इतना हुआ वैक्सीनेशन

    गांव संख्या

  • कैली 37
  • सरधना देहात 10
  • नंगला आर्डर 10
  • सलावा 60
  • मिलक 55
  • रार्धना 187
  • छबड़िया 140

बाकी गांवों में भी वैक्सीनेशन के आंकड़ों का यही हालत है।

इनका कहना है:

ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को वैक्सीन के टीक लगाने के लिए कैंप लगवाए जा रहे हैं। मगर, गांवों में वैक्सीनेशन की संख्या बहुत कम है। लोग वैक्सीनेशन कराने को तैयार नहीं है। टीकारण करने के लिए लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि जागरूकता के साथ टारगेट के अनुसार वैक्सीनेशन हो सकेगा।
-डा. राजेश कुमार, प्रभारी सीएचसी सरधना

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