Saturday, October 23, 2021
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भुगतान एक करोड़, 10 दिन में उखड़ी कैंट की सड़क

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  • घटिया निर्माण सामग्री के चलते बनने के 10 दिन में ही बदहाल हो गयी डेयरी फार्म की सड़क

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सड़क निर्माण की मद में कैंट बोर्ड के खजाने से ठेकेदार को करीब 90 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया, लेकिन इतनी बड़ी रकम का भुगतान करने के बाद भी बनायी गयी सड़कें 10 दिन में ही दम तोड़ गयीं। यहां बात की जा रही है कैंट की डेयरी फार्म रोड की। इसको बने बामुश्किल 10 दिन ही अभी हुए हैं और जगह-जगह ये उखड़ना भी शुरू हो गयी है।

इस सड़क के निर्माण को कैंट वासियों के लिए सीईओ नवेन्द्र नाथ की ओर से दीपावली का गिफ्ट के बतौर प्रचारित किया गया था। जनवाणी ने भी प्रमुखता से इसको लेकर समाचार प्रकाशित किया था, लेकिन सीईओ का यह गिफ्ट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इस बात की जांच की जानी चाहिए कि आखिर कैसी निर्माण सामग्री प्रयोग की गयी जो बनने के बाद 10 दिन के भीतर ही सड़क जगह जगह से उखड़ने लगी है।

करीब 90 लाख बताया जा रहा भारी भरकम भुगतान ठेकेदार को किस की संस्तुति पर कर दिया गया। डेयरी फार्म रोड के अलावा रजबन से भगत चौक की ओर जाने वाली सड़क का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। यह सड़क बने भी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं और इसका भी सांसें टूटनी शुरू हो गयी हैं। सवाल पूछा जा रहा है कि इतना भारी भरकम भुगतान सड़क निर्माण की मद में लेने वाले ठेकेदार को घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग के आरोपों के चलते क्या ब्लैक लिस्ट नहीं कर दिया जाना चाहिए।

कुछ तकनीकि विशेषज्ञों ने तो माल रोड समेत कुछ अन्य सड़कों पर तारकोल की लेयर मानकों के अनुरूप न डाले जाने तक का दावा किया है। हालांकि इसकी पुष्टि तो विशेषज्ञों द्वारा जांच कराए जाने के बार ही की जा सकती है, लेकिन करीब 15 साल बनायी गयी जिस सड़क को सीईओ कैंट का दीपावली गिफ्ट माना जा रहा था, उसको यूं जगह-जगह से उखड़ व टूट जाना जरूर गंभीर है।

इन सड़कों के इस प्रकार उखड़ने की वजह तारकोल डालने में ठेकेदार की ओर से कंजूसी बरता जाना है। बनने के 10 दिन के भीतर जिस प्रकार से सड़कें उधड़ रही हैं। उससे साफ है कि भुगतान करने से पहले सड़कों की तकनीकि जांच तथा क्वालिटी कंट्रोल का ध्यान नहीं रखा गया है।

यदि मानकों अनुरूप सड़क बनाने में निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया होता तथा पूर्ण परीक्षण किया जाता तो करीब एक करोड़ का बताया जा रहा भुगतान जो ठेकेदार को कर दिया गया है वो यूं ही अकारण न गया होता। जिस तेजी से सड़कें उधड़ रही हैं, उससे साफ है कि इनकी जिंदगी लंबी नहीं साबित नहीं होगी। आमतौर पर एक सड़क की उम्र पांच साल मानी जाती है, लेकिन जो सड़कें बनी हैं ये यदि साल भर पूरा कर लें तो गनीमत है।

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