Tuesday, April 28, 2026
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कोरोना के नाम पर आगे आने को तैयार नहीं प्राइवेट अस्पताल

  • स्वास्थ्य विभाग की कोशिशें भी लगातार हो रही नाकाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना आइसोलेशन वार्ड बनाने के नाम पर कोई भी प्राइवेट अस्पताल फिलहाल आगे आने को तैयार नहीं। दरअसन संक्रमित मरीजों की तेजी से बढ़ रही संख्या के चलते स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कुछ अन्य प्राइवेट अस्पताल आनंद की तर्ज पर कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड की पहल करें।

इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई भी प्राइवेट हॉस्पिटल कोविड के नाम पर आगे आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, जिसकी वजह से नए प्राइवेट कोविड आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

अधिकृत प्राइवेट कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड की यदि बात की जाए तो फिलहाल सुभारती व एमएसवाई के अलावा आनंद भी इस फेरिस्त में शामिल हैं, लेकिन जिस अनुपात में कोरोना संक्रमित केस सामने आ रहे हैं। उसके चलते स्वास्थ्य विभाग नए कोविड-19 प्राइवेट आसोलेशन की जरूरत महसूस कर रहा है।

फिलहाल जितने संक्रमित आ रहे हैं। उनकी संख्या को देखते हुए पर्याप्त बेड का इंतजाम है, लेकिन नवंबर व दिसंबर में जिस प्रकार से संक्रमण के बढ़ने की आशंका जतायी जा रही है, उसके चलते अभी से प्राइवेट आइसोलेशन वार्ड तलाशे जा रहे हैं।

वहीं, दूसरी ओर इस संबंध में प्राइवेट अस्पताल संचालकों का तर्क है कि कोविड-19 आइसोलेशन बनाने में तमाम खामियां हैं। कोविड मरीजों के आने के बाद अन्य मरीजों का इलाज संभव नहीं। जितना प्रोटोकाल चाहिए उतनी बिल्डिंग तक ज्यादातर पर नहीं। जिसकी वजह से नर्सिंग होम एसोसिएशन ने फिलहाल कोविड आइसोलेशन के नाम पर हाथ खडेÞ कर दिए हैं।

मेडिकल एचओडी के प्राचार्य ने कसे पेंच

शनिवार को कोविड आईसीयू वार्ड में बुलायी गयी सीनियर्स की बैठक में मेडिकल प्राचार्य ने तमाम एचओडी के पेंच कसे। उन्होंने दो टूक कह दिया कि कोरोना मरीजों की वर्तमान मृत्यु दर को घटाकर आधा करने से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं। इसके लिए इफ बट की कोई गुंजाइश नहीं। इस बैठक में मेडिकल के सरदार वल्लभ भाई पटेल के अधीक्षक डा. कैलाश तिवारी, पूर्व सीएमएस डा. धीरजराज, डा. रचना, डा. सुधीर राठी, डा. गौरव गुप्ता, डा. प्रदीप कुमार, डा. ज्ञानेश्वर टाक, डा. तुंगवीर सिंह आर्य, डा. दिनेश राणा कुल करीब 200 सीनियर मौजूद थे।

प्राचार्य ने कहा कि सीनियर को नियमित रूप से कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करनी होगी। प्रत्येक संक्रमित मरीज से सीधा संवाद कायम करना होगा। उन्होंने कहा लास्ट स्टेज मरीज के नाम पर हम अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते। यदि लास्ट स्टेज मरीज मेडिकल में नहीं आएगा तो फिर कहां जाएगा। गंभीर और अति गंभीर संक्रमितों की पूरी देखभाल व पूरा इलाज बेहद जरूरी है। उनका जीवन बचाना हमारा दायित्व है। डाक्टर को धरती का भगवान यूं ही नहीं कहा जाता। इस धारणा को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी भी है।

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