- लालूखेड़ी में आर्य समाज के वार्षिकोत्सव पर भजन एवं प्रवचन
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद हिंदुओं को वेदपाठी बनाना चाहते थे। वैदिक धर्म की रक्षा के लिए युवा आर्य समाज से जुड़े।
तितावी क्षेत्र के लालूखेड़ी गांव में बाबा न्यादर सिंह की स्मृति में आर्य समाज के आठवें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। आमंत्रित विद्वान आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेद ईश्वरीय वाणी है। वेद सनातन सत्य है। परमात्मा ने आदि सृष्टि में प्राणिमात्र के कल्याण के लिए ज्ञान, विज्ञान, धर्म, सदाचार, जड़ और चेतन आदि समस्त विधाएं वेदों में दी है।
वेदों की और लौटो, का आह्वान कर महर्षि दयानंद ने मुगलों और अंग्रेजों की आधीनता में रहे भारत को जगाया। वेदों के सत्य, प्रमाणिक उपदेशकों से राष्ट्र में नई चेतना जागृत की। अंधविश्वास, पाखंड और कुरीतियों के खिलाफ समाज सुधार आंदोलन चलाया। वेदानुकूल आचरण से ही भारत पुन: आयार्वृत बनेगा। उन्होंने स्वराज की घोषणा कर आजादी आंदोलन से युवाओं को जोड़ दिया।
स्वामी अनयानन्द ने कहा कि वेदों से समाज को यज्ञ और योग की विधा मिली है। हरिद्वार से पधारी मनीता आर्या ने कहा कि देश की बेटियां ऋषि दयानंद की ऋणी है, जिन्होंने स्त्री शिक्षा को प्रेरित किया। बाल विवाह को अनुचित बताया और विधवा विवाह को प्रारम्भ कराया था। भजनोपदेशक ऋषिपाल आर्य ने भजन सुनाये। यज्ञमान वेदपाल आर्य तथा यज्ञ ब्रह्म नरेंद्र सिंह आर्य तथा स्वामी ओमानन्द रहे। देवपाल आर्य, वानप्रस्थी करण मुनि, जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व प्रधान आंनद पाल सिंह आर्य ने विचार रखे। कृपाल सिंह आर्य, मंगत सिंह आर्य, डॉ. सतीश कुमार, सोमपाल सिंह, इंद्रेश आर्य आदि मौजूद रहे।

