Wednesday, November 4, 2026
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Tag: द्रौपदी

मन और अन्न

महाभारत का युद्ध अंतिम समय में था। भीष्म पितामह तीरों की शैय्या पर लेटे थे। पांडव भाई उनके चरणों के समीप बैठे उनका धर्मोपदेश...

ईश्वर का कार्य

बात उस समय की है जब द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त श्री कृष्ण अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि, हे पार्थ! तराजू...

संत और यज्ञ

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। पांडवों ने अपनी विजय के उपरांत अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया। सभी ऋषि, मुनियों, साधु, संतों को...

मैं कुछ भी नहीं

अमृतवाणी एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही सबसे बड़े भक्त हैं। श्रीकृष्ण इस बात को भांप गए। एक दिन वह अर्जुन को...
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