Saturday, December 4, 2021
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कोरोना: प्रशासन कहेगा तो अदालतें बंद की जाएंगी

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जनपद न्यायाधीश मयंक जैन ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा लॉकडाउन की अवधि तथा उसके पश्चात समस्त न्यायालयों में न्यायिक कार्य के लिए समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों को अतिक्रमित करते हुए यह निर्देशित किया गया है कि उच्च न्यायालय के अधीनस्थ सभी न्यायालय जिनमें अधिकरण भी सम्मिलित हैं।

समय-समय पर जारी सर्कुलर के अनुसार न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य करेंगे। यदि जिला प्रशासन एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी इस मत के हैं कि जनपद न्यायालय एवं बाह्य न्यायालय को विशिष्ट अवधि के लिये कोविड-19 की परिस्थितियों के आलोक में बंद किया जाना चाहिये।

तदनुसार जनपद न्यायालय एवं बाह्य न्यायालय बंद कर दिये जायेंगे। जिसकी सूचना उच्च न्यायालय, इलाहाबाद को भेजी जायेगी। जनपद न्यायाधीश मयंक जैन ने कहा कि डीएम, अन्य प्रशासनिक अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की मदद से न्यायालय परिसर को दैनिक रूप से व्यापक रूप से सैनिटाइज कराया जायेगा तथा न्यायालय परिसर में आने वाले व्यक्तियों की थर्मल स्कै्रनिंग उपरोक्त अधिकारीगण की मदद से करायी जायेगी।

इसके अतिरिक्त जिला न्यायाधीश यह सुनिश्चित करेंगे कि समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा न्यायिक आदेशों के रूप में जारी दिशा निर्देशों तथा केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन किया जावे। उपरोक्त दिशा निर्देश दो जनवरी 2021 से प्रभावी होंगे।

जनपद न्यायाधीश ने कहा कि तद्नुसार उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा जारी उपरोक्त आदेश के अनुसार जनपद न्यायालय मेरठ एवं बाह्य न्यायालय सरधना एवं मवाना के न्यायिक पीठासीन अधिकारीगण दो जनवरी 2021 से उपरोक्तानुसार न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य करेंगे।

जनपद न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय परिसर की सफाई एवं सैनिटाइजेशन के लिए गठित समिति को निर्देशित किया जाता है कि वे दैनिक रूप से जनपद न्यायालय परिसर, बाह्य न्यायालय सरधना तथा मवाना परिसर के व्यापक सैनिटाइजेशन एवं सफाई का कार्य जिला मजिस्ट्रेट, अन्य प्रशासनिक अधिकारीगण,मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की मदद से सुनिश्चित करेंगे।

कोरोना से एक मौत, 45 नए संक्रमित

कोरोना के चलते एक संक्रमित की उपचार के दौरान मौत हो गयी, जबकि नए संक्रमित केस मिले हैं। मृतक में रुड़की रोड विवेक विहार निवासी 81 वर्षीय बुजुर्ग शामिल है। ये जानकारी कोरोना अपडेट जारी करते हुए सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने दी। उन्होंने बताया कि संक्रमण की रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण किया गया है। हालात तेजी से सुधर रहे हैं। डेथ रेट भी अब काबू है।

केवल उन्हीं संक्रमितों की मौत हो रही है जो बेहद गंभीर या उम्रदराज हैं। डेथ रेट पूरी तरह से अंडर कंट्रोल है। जो संक्रमित मिले हैं उनमें नौकरी पेशा, कारोबारी, छात्र, मजदूर, कैदी, कामकाजी घरेलू महिलाएं भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संक्रमण की जो पुरानी चेन बनी थीं वो सभी नियंत्रित हैं। जो नए केस मिल रहे हैं, उनमें ज्यादातर नए हैं तथा ट्रैवेल हिस्ट्री वाले हैं।

मंगलवार को गोविंदपुरी कंकरखेड़ा, सरस्वती विहार, पुलिस लाइन, गुप्ता कालोनी, गंगानगर, अब्दुल्लापुर, लावड़, हरिवंश विहार सरायकाजी, जागृति विहार, गढ़ रोड हनी गोल्फ ग्रीन, इंद्रापुरम गंगोत्री, तिलक रोड बेगमबाग, चित्रकूट कालोनी गांधी आश्रम, तिरुपति अपार्टमेंट नंगला बट्टू, श्रद्धापुरी, शिवलोक कंकरखेड़ा, छोटा मोहल्ला कंकरखेड़ा, मसूरी, सरधना, ड्रीम सिटी सरधना रोड आदि इलाके भी शामिल हैं।

सरधना में बच्ची निकली कोरोना पॉजिटिव

क्षेत्र में अब तक 300 से अधिक कोरोना केस सामने आ चुके हैं। रोजाना हो रही जांच में नए केस सामने आ रही है। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुल 98 लोगों की कोरोना जांच कराई गई। जिसमें मानपुरी गांव की सात वर्षीय एक बच्ची कोरोना पॉजिटिव निकली।

जांच रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसे तत्काल आइसोलेट करा दिया। साथ ही उसके परिवार को भी होम क्वारंटाइन कर दिया गया। इस संबंध सीएचसी प्रभारी डा. राजेश कुमार का कहना है कि मानपुरी गांव में एक बच्ची पॉजिटिव मिली है। उसके संपर्क में आने वाले लोगों की भी जांच कराई जाएगी।

जान देने वाली कोरोना वॉरियर की फाइल दबा कर बैठे अफसर

लोगों की जिंदगी बचाते-बचाते अपनी जिंदगी को गंवाने वाली मेडिकल की फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर के परिवार को मिलने वाले 50 लाख रुपये की बीमा राशि की रकम की फाइल पर मेडिकल प्रशासन के आला अफसर तीन माह से कुंडली मारे बैठे रहे। मामले की जानकारी होने पर जब प्रदेश के मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के पेंच कसे तब कहीं जाकर नींद टूटी।

ये है पूरा मामला

मेडिकल की सिस्टर इंचार्ज आशा त्यागी निवासी जागृति विहार की ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण के चलते मेडिकल के स्थित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में बनाए गए कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में उपचार के दौरान मौत हो गयी। उनकी ड्यूटी बतौर फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर कोरोना ओपीडी में लगातार ड्यूटी रही थी। इसके अलावा जब संक्रमण पूरे पीक पर था तब उनकी ड्यूटी पूरे मेडिकल अस्पताल में राउंड पर भी रहीं। जिसके चलते वह संक्रमित हो गयी थीं।

तीन माह तक रखा अंधेरे में

कोरोना ड्यूटी के दौरान जान देने वाली सिस्टर इंचार्ज के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल प्रशासन के अफसरों ने तीन माह तक उन्हें अंधेरे में रखा। मृतका के पति सतीश त्यागी जोकि मेडिकल के पूर्व कर्मचारी हैं तथा मेडिकल कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं, ने बताया कि उनकी पत्नी आशा त्यागी को संक्रमण के चलते गत 29 अगस्त को मेडिकल के कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था, लेकिन उपचार के दौरान उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया। एक बार वह टॉयलेट में गिर गयीं। वहां कई घंटे तक पड़ी रहीं, किसी ने संभाल नहीं। सात सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया।

मेडिकल में ही उनकी मौत हुई थी, इसके बाद भी मेडिकल के अधिकारी उनकी बीमा संबंधित पत्रावली को तीन माह तक दबाए बैठे रहे। परिजन लगातार उनके चक्कर काटते रहे।

सीएम को भेजी थी शिकायत

मेडिकल अफसरों के अपने ही कर्मचारी के प्रति इस क्रूर रवैये की शिकायत परिजनों ने सीएम को भेजी थी। जिसका तत्काल असर भी हुआ। सीएम के मुख्य सचिव ने तत्काल सीएमओ कार्यालय को एक नाराजगी भर पत्र भेजकर तत्काल संबंधित पत्रावली शासन को भेजने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव की फटकार के बाद कहीं जाकर अधिकारियों की नींद टूटी। परिजनों का कहना है कि यदि मुख्य सचिव ने पत्र न भेजा होता तो अभी मृतका की फाइल अफसर दबाए रहते।

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