- पेट्रोल और डीजल के दामों में 1.60 रुपये की वृद्धि, सिलेंडर में 50 रुपये बढ़े
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जैसी की सबको उम्मीद थी कि पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के आने के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम बढेÞगे, ठीक वैसा ही हुआ। तेल कंपनियों ने लगातार दूसरे दिन 80 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाये हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को आधार मानकर तेल कंपनियों ने 110 दिनों बाद पेट्रोल के दामों में 1.60 रुपये की वृद्धि और 137 दिनों बाद डीजल के दामों में भी 1.60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है।
अब पेट्रोल 96.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 88.14 पैसे प्रति लीटर हो गया है। इससे पहले पेट्रोल 95.01 रुपये और डीजल 86.54 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। यही नहीं रसोई गैस का सिलेंडर भी 50 रुपये महंगा हुआ है। अब सिलेंडर का दाम अब 949 रुपये 50 पैसे हो गया है।
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद अब रसोई पर भी महंगाई की मार पड़ी है। घरेलू गैस के दाम 50 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। ऐसे में गैस की कीमत हजार के आंकड़े के करीब आ गई है। अक्टूबर के बाद से पहली बार एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ाई गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले करीब पांच महीने से एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया था।
यूक्रेन और रूस के बीच चल रही लड़ाई के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में काफी उछाल आई है। एक वक्त तो यह 139 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी, जो 2008 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। अभी यह 118.50 डॉलर प्रति बैरल है। दो दिन पहले तेल कंपनियों ने बल्क में तेल खरीदने वाली कंपनियों और उद्योगों को मिलने वाले डीजल में 25 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी थी।
21 मार्च को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल पर 80 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि कर दी थी। अगले ही दिन यानि मंगलवार को एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल पर 80 पैसे की वृद्धि की गई है। अब पेट्रोल 96.61 पैसे प्रति लीटर और डीजल 88.14 पैसे प्रति लीटर हो गया है।
पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि करीब चार महीनों के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में दो बार वृद्धि होने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर खासा असर पड़ेगा।गैस सिलेंडर का दाम बढ़ने से रसोईघरों पर सीधा असर पड़ेगा। वैसे भी आटा, चावल, सरसों का तेल, रिफाइंड और दालों के दामों में 10 दिन से वृद्धि हो रही है। ऊपर से सिलेंडर के दाम बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग पर सीधा असर पड़ेगा।
गैस की कीमतें बिगाड़ेगी महिलाओं की रसोई का बजट
रूस और यूक्रेन में जारी जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब घरेलू स्तर पर भी दिखने लगा है। मंगलवार को सरकारी आॅयल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। इसबार घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बता दें कि गत छह अक्टूबर के बाद से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों को नहीं बढ़ाया गया था।
मगर पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा होने के तुरंत बाद गैस के दामों को बढ़ा दिया गया है। हाल ही में दूध कंपनियों ने दूध के रेट में 2-5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। गैस सिलेंडर के दामों को लेकर जब घरेलू महिलाओं से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि महंगाई तो दिन प्रतिदिन बढ़ रही है जब भी नया सामान खरीदने जाते है पता चलता है कि पहले से दाम बढ़ गए है ऐसे में घर कैसे चलाया जाए यही सोचा जा रहा है। क्योंकि आमदनी बढ़ नहीं रही महंगाई बढ़ती जा रही है।
अतुल शर्मा का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार फिर से आने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि कुछ हद तक महंगाई से निजात मिलेगी, लेकिन कम होने की बजाए यह फिर से बढ़ रही है। अलका का कहना है कि गैस ही नहीं घरेलू समान के अधिकाश समानों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में जहां घर का बजट गड़बड़ा रहा है। वहीं, रसोई को चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
प्रतिभा का कहना है कि सरकार लोगों के बारे में नहीं सोच रही है। इस समय बच्चों के स्कूल खुले हैं। उनकी फीस आदि का भार लोगों पर हैं, लेकिन अब गैस और पेट्रोल के दामों ने तो लोगों को परेशान कर दिया है। हर महीने रसोई के बजट कमी आने के बजाए इजाफा हो रहा है। मंजू का कहना है कि सरकार महंगाई को कम करने का उपाय नहीं खोज रही है। लगातार महंगाई बढ़ने की वजह से आम आदमी परेशान है। ऐसे में लोगों को घर चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए जाते हैं और सब्सिडी के नाम पर कुछ नहीं आ रहा है। रेखा का कहना है कि जब तक सरकार महंगाई पर ध्यान नहीं देगी काम नहीं चलेगा। आम जनता महंगाई से त्रस्त हो चुकी है। सरकार को इसके बारे में विचार करना होगा।
महंगाई की मार से कराह रहे पशुपालक
मौसम की विपरीत स्थितियों ने भूसे पर महंगाई की मार छोड़ दी है। महंगाई भी इतनी कि पशुपालक भी कराह रहे हैं। जो भूसा अभी तक कम रेट में बिक रहा था, वह भूसा अब 1300 से 1400 रुपये प्रति कुंतल बिकने लगा है। हालात यह है कि भूसे के अलावा चोकर तक के दाम में बढ़ोतरी हो गई है। चोकर भी आटा के भाव में बिक रहा है। पशुपालन विभाग के अनुसार पशु चारे के रूप में भूसा, हरा चारा, धान की पुआल, गन्ने का गोला मुख्य रूप से प्रयोग में लाया जाता है।
पिछले समय में जिस तरीके से मौसम की विपरीत परिस्थितियां रहीं। कहीं न कहीं वह भी इस महंगाई के पीछे कारण है। कुछ समय से भूसों के दामों में इतनी तेजी के साथ उछाल आया है कि पशुपालक हैरान व परेशान हैं। मौजूदा समय की बात करें तो थोक में ही भूसा 1300 से 1400 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से बिक रहा है। यही भूसा फुटकर में 1500 से 1600 रुपये प्रति कुंतल बिकता है।
जिले की स्थिति पिछले समय में काफी भयावह हो गई थी। अब स्थिति यह है कि पशुपालक अपने मवेशियों का पेट भरने के लिए हर स्तर से परेशान हैं। क्योंकि न तो हरा चारा ही उन्हें पर्याप्त मात्रा में मवेशियों के लिए मिल रहा है और न ही भूसा। ऐसी स्थिति में जो कमजोर जानवर हैं उन्हें छोड़ने की मजबूरी है। पशुपालक भूसे की उछाल मारती कीमतों में कमी की उम्मीद कर रहे हैं। मगर जो स्थितियां दिख रही हैं उससे नहीं लगता है कि फिलहाल स्थिति राहत भरी होगी।
एक मवेशी को औसतन 10 किलो भूसे की जरूरत
मवेशी पालने वालों की माने को एक मवेशी को रोजाना कम से कम 10 किलो भूसे की जरूरत होती है। इस लिहाज से महीने भर में तीन कुंतल भूसा की आवश्यकता है। दुधारू पशुओं से दूध बेचने से भी भूसे और हरे चारे का खर्च निकाल पाना कठिन हो रहा है। पशुपालक तो अब दूध न देने वाली गाय को आवारा छोड़ रहे हैं। यही नहीं भूसा और चोकर में महंगाई के चलते पसुपालक दुधारू मवेशियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं कर रहे हैं।

