जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: किसानों की समस्याओं को लेकर कमिश्नरी पार्क पर धरने पर बैठे किसानों ने दो टूक ऐलान कर दिया कि समस्याओं का निस्तारण नहीं तो किसान कमिश्नरी से नहीं हटेंगे। शनिवार को किसानों और पुलिस-प्रशासन के बीच टकराव के हालात पैदा हो गए थे। कमिश्नरी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस ही पुलिस दिखाई दे रही थी।
कई मौके ऐसे आये, जब टकराव के हालात बने, लेकिन किसानों ने धरना खत्म नहीं किया। कमिश्नरी पर धरना देने वाले किसान नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह गुट के हैं। उन्होंने कहा कि जब तक वार्ता नहीं होगी, तब तक धरना लगातार चलता रहेगा तथा सात तारीख को सभी जिलो में धरना प्रदर्शन होगा। 11:00 से 3:00 तक कहा कि डीएम के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा।

11 तारीख को महापंचायत फिर दोबारा से कमिश्नरी करने का ऐलान कर दिया। कहा कि अगर सरकार संज्ञान में नहीं लेती तो 12 तारीख से किसान भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। कमिश्नरी पर टकराव के हालात बनते रहे, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग रहे। किसानों ने कह दिया कि लाठी से नहीं घबरायेंगे। सरकार लाठी के दम पर किसानों की आवाज दबाना चाहती है, लेकिन किसान झूकेगा नहीं। मर जाएगा।
पुलिस लाठी मारेगी तो उसका जवाब किसान भी देंगे। इस तरह से किसानों की हठ देखते हुए पुलिस भी बैकफुट पर आ गई थी, जिसके बाद पुलिस यहां से हटा ली गई। आला अधिकारी भी किसानों के आंदोलन की खबर बार-बार ले रहे थे। किसानों का ज्ञापन लेने के लिए या फिर बातचीत करने कोई अधिकारी नहीं आया। इसी वजह से आंदोलन लंबा चलाने का ऐलान कर दिया।
ये रही किसानों की मांग
- गन्ना मूल्य 450 रुपये किया जाए।
- 12 हजार करोड़ रुपये गन्ने के बकाया है, जिसे मय ब्याज के दिया जाए।
- बेरोजगारों की पेंशन की जाए।
- बीटेक एमटेक कर रहे हैं छात्र आज भी खेती किसानी कर रहे हैं, उन्हें रोजगार दिया जाए।
- सरकार नौकरी की व्यवस्था नहीं करती है तब तक छात्रों को महीने का 15000 भत्ता दिया जाए।
- जिन किसानों की 50 साल उमर हो चुकी, उन किसानों को 6000 महीना पेंशन दी जाए।
- एमपी व विधायकों को पेंशन मिल रही है, उन पर रोक लगाई जाए।
- किसान पेंशन शुरू कराई जाए।

