- बच्चा वार्ड में भर्ती मासूमों के परिजनों ने लगाया आरोप
- डाक्टरों द्वारा लिखी जा रही ज्यादातर दवाएं बाहर से लेनी पड़ती है
- आयुष्मान लाभार्थी को भी अपनी जेब से खरीदनी पड़ रही दवाएं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकार मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने के लाख दावें करती है लेकिन मेडिकल जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में दवाओं की कमी है। मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदकर लानी पड़ रही है, यहां तक की आशुष्मान योजना के लाभार्थी को भी पहले अपनी जेब से दवाएं खरीदनी पड़ रहीं है उसके बाद वह इनकी कीमत बिलों के आधार पर क्लेम करे यह कहा जा रहा है। जबकि मेडिकल प्रशासन का कहना है जितनी भी दवाएं सरकार द्वारा आती है उनकी कोई कमी नहीं है, कुछ दवाएं है जो उपलब्ध नहीं है।
अंशु निवासी पचगांव पट्टी अमरसिंह का 20 दिन का नवजात बच्चा मेडिकल के बच्चा वार्ड में 2 अप्रैल से भर्ती है। अंशु ने बताया पैदा होने के बाद से ही बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही है। बच्चे का इलाज चल रहा है जिसके लिए लगभग सभी दवाएं बाहर से लानी पड़ रहीं है। यहां तक की मंगलवार रात दो बजे डाक्टरों ने एक इंजेक्शन बाहर से लानें को कहा जिसकी कीमत तो 17 हजार है लेकिन उसे देर रात होने की वजह से ब्लैक में 22 हजार में खरीदना पड़ा। अंशु ने नर्सिंग स्टाफ पर भी ठीक व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाया है।
नीरज निवासी हापुड़ की नवजात बच्ची 11 दिन से बच्चा वार्ड में भर्ती है। नीरज ने बताया बच्ची को सांस लेने में समस्या है उसे वेटिलेटर पर रखा गया है। लेकिन जब से बच्ची यहां भर्ती हुई है उसके लिए जरूरी सभी दवाएं बाहर से लानी पड़ रहीं है कुछ दवाओं को छोड़कर। वह आयुष्मान योजना का लाभार्थी है लेकिन फिलहाल उसे अपनी जेब से ही सारी दवाएं आदि लानी पड़ रहीं है। दवा काउंटर पर एक स्टैंप लगाई जा रही है और कहा जाता है कि आप बाद में सरकार से अपने खर्च हुए पैसे क्लेम कर सकते है। अभी तो दवा नगद ही लेनी पड़ेगी।
विक्रम निवासी अमरोह की 20 दिन की भतीजी बच्चा वार्ड में 1 अप्रैल से भर्ती है। बच्ची के पेट में इन्फैक्शन हो गया है। साथ ही उसे और भी कई समस्याएं है, परिवार का कोई न कोई सदस्य हर समय यहां मौजूद रहता है। लेकिन जब से बच्ची यहां भर्ती हुई है तभी से अधिकतर दवाएं बाहर से ही लानी पड़ रही हैं। अबतक हज्Þाारों रूपये की दवाएं वह बाहर से खरीद कर ला चुके है। मेडिकल में कुछ दवाएं ही मिल रहीं है। ऐसे में गरीब परिवारों के बच्चों को सस्ता इलाज कैसे मिलेगा।

राशिद निवासी शामली का आठ दिन का बेटा भी बच्चा वार्ड में भर्ती है। बच्चे को सांस लेने में समस्या है, साथ ही इन्फैक्शन भी है। फिलहाल उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है लेकिन जब से बच्चा भर्ती हुआ है तभी से दवाओं का सारा खर्च उन्हें ही वहन करना पड़ रहा है। एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है तभी से सारी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रहीं है। राशिद ने बच्चा वार्ड के नर्सिंग स्टाफ पर भी अच्छा व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाया है। ऐसे में पहले से ही परेशान तीमारदारों के साथ नर्सिंग स्टाफ का रूखा व्यवहार उन्हें और दुख देता है।
बन्टी निवासी भावनपुर का नवजात बच्चा भी एक सप्ताह से पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती है। बंटी ने बताया उसका बच्चा समय से पहले पैदा हो गया है जिस वजह से वह कमजोर है। कुछ समस्याएं और है बच्चे को जिस वजह से उसे यहां भर्ती कराना पड़ा है। लेकिन जिस दिन से बच्चा यहां भर्ती हुआ है तभी से वह ज्यादातर दवाएं बाहर से ही खरीदकर ला रहा है। बच्चे को फिलहाल आॅक्सीजन पर रखा गया है। लेकिन दवाओं का खर्च उसे ही वहन करना पड़ रहा है। मेडिकल में सभी तरह का इलाज मुफ्त होने की बात तो कही जाती है लेकिन दवाइयां नहीं मिलती है।

