Tuesday, February 17, 2026
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श्रावण माह का पांचवा मंगला गौरी व्रत आज, जानिए क्यों रखा जाता है यह उपवास

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन है। श्रावण माह चल रहा है। इस पवित्र महिने में सभी सोमवार शिव जी को समर्पित हैं, ठीक उसी प्रकार इस माह के प्रत्येक मंगलवार मां भी पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। सावन के प्रत्येक मंगलवार को मां मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। मंगला गौरी व्रत वाले दिन मां गौरी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

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इस साल सावन में अधिक मास की वजह से कुल नौ मंगला गौरी व्रत पड़ रहे हैं, जिसमें से पांच व्रत बीत चुके हैं। आज पांचवा मंगला गौरी व्रत है। आइये जानते हैं मंगला गौरी व्रत का महत्व और पूजा विधि के बारे में…

मंगला गौरी व्रत में ऐसे करें पूजा-अर्चना 

मंगला गौरी व्रत रखने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले घर की साफ सफाई करें फिर स्नान करके खुद भी स्वच्छ कपड़े पहनें। सुहागिनों को इस दिन लाल या पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए। शिवालय जाकर शिव और पार्वती के दर्शन करें और व्रत रखने का संकल्प लें।

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इसके बाद पूरे विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें। शिवलिंग पर अभिषेक करें और माता पार्वती के प्रिय भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, मिठाई, फूल, धूप दीप दिखाकर पूजा करें।

शिव की पूजा करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और मनचाहा आशीर्वाद देती हैं। वहीं, माता पार्वती की पूजा भी पूरे विधि विधान से करें। पूजा के दौराना माता को 16 श्रृंगार चढ़ाएं, 16 चीजों से माता की पूजा करें और सोलह चूढ़ियां माता पार्वती को अर्पित करें। माता को कुकमुम का तिलक लगाएं। पूरे दिन व्रत रखें और कल यानी कि बुधवार को व्रत का पारण करें।

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यहां जानें मंगला गौरी व्रत का महत्व 

सावन के महीने में मंगला गौरी व्रत का खास महत्व है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक माता गौरी के मंगला गौरी व्रत को रखकर ही महादेव को पति स्वरूप पाया था। इसीलिए महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए इस व्रत को रखती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां इस व्रत को रखकर माता पार्वती से शिव जैसा पति पाने का आशीर्वाद मांगती हैं। वहीं महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत को करती हैं।

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