Wednesday, December 1, 2021
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संसार के अनोखे संग्रहालय

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योगी राज कुमार |

संग्रहालय वह स्थान है जहां विश्व की अनोखी वस्तुओं का संग्रह किया जाता है। वैसे तो विश्व के प्रत्येक देश में अनेक संग्रहालय होते हैं लेकिन हम ऐसे संग्रहालयों के बारे में जानकारी दे रहे हैं जो अपने अनोखे संग्रह के लिये संसार में अपना विशेष स्थान रखते हैं।

मलेशिया देश के कुआलालम्पुर में वर्ष 1982 में एक उच्च शिक्षण संस्थान में एक ऐसे संग्रहालय का निर्माण कराया गया है जहां कलम, दवात तथा अन्य लेखन सामग्रियों का अनोखा संग्रह किया गया है। यहां बारह हजार विभिन्न प्रकार की कलमों व पैनों को रखा गया है। यहां संग्रहीत सामग्री पुरातन सभ्यताओं तथा इस्लामी देशों की जनता द्वारा प्रयोग में लाई जाती थी। ये कलमें तथा लेखन सामग्री कलात्मक तथा रंग बिरंगी होने के कारण दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।

हमारे देश भारत के सुप्रसिद्ध नगर चंडीगढ़ में एक मेहनत तथा लगनशील व्यक्ति ने अपनी कल्पना शक्ति का अनोखा चमत्कार दिखाया है। नेकचंद नामक व्यक्ति ने चंड़ीगढ़ में एक अनोखा संग्रहालय बनाया है। यहां ऐसी चीजों का आकर्षक संग्रह किया गया है जिन्हें हम नित्य प्रति बेकार समझकर कूड़े के ढेर में फेंक देते हैं। नेकचंद ने बेकार व फेंकी जाने वाली वस्तुओं का आकर्षण प्रयोग कर उसे अनेक रूपों में ढाल दिया है।

कप, प्लेट वाशबेसिन, संडास के टुकड़ों, फटी-पुरानी साड़ियों आदि के सुंदर मेल मिलाप तथा प्रयोग से पशु पक्षी तथा मानव प्रतिरूप की आकृतियां बनाई हैं। इन्हीं वस्तुओं के कुशल संयोजन से एक हृदयस्पर्शी मंदिर, एक तालाब, एक गुफा, राजा का महल, राजा रानियां, रनिवास आदि तैयार किये गये हैं।

इन्हीं बेकार की वस्तुओं से राजा की प्रजा, स्त्री पुरूष, बच्चे पशु-सूरज, चंदा तारे आदि बनाकर एक अजीबोगरीब दुनिया का निर्माण नेकचंद ने अपनी कला संग्रहालय मात्र एक मामूली पंजाबी सरकारी कर्मचारी नेकचंद की निष्ठा, लगन तथा अनोखी कल्पना शक्ति का बेजोड़ नमूना है।

आस्ट्रिया देश के विएना नगर में भी एक विशाल अनोखा संग्रहालय है। यहां इतिहास एवं कला की अद्भुत और आश्चर्यजनक कृतिओं का संर्ग्रह किया गया गया है। इस अनोखे संग्रहालय में दस हजार मूर्तियों, दस हजार तेल चित्रों, चार लाख पचास हजार सिक्कों, छ: सौ पचास दुर्लभ वाद्य यंत्रों, आठ सौ टेपेस्टिाओं को संग्रहित किया गया है।

यह संग्रहालय आस्ट्रिया के हाब्स राजघराने की निजी सम्पति थी। हाब्स घराना बहादुर, शक्तिशाली तथा कला प्रिय राजघराना था। यह संर्ग्रहालय यूरोप के इतिहास तथा कला का अनोखा संगम है। विश्व के पर्यटकों के लिये यह एक अनोखा दर्शनीय स्थल बना हुआ है। ऐसा संग्रहालय है जो विश्व में अपना सानी नहीं रखता है। यहां की कलाकृतियां स्वयं अपनी कहानी बताती हैं। सोने, चांदी, कांस्य, आदि धातुओं की प्रतिमाएं स्वयं उनके मूर्तिकारों की कुशलता का बखान करती हैं।

जर्मन जनवादी गणतंत्र में एक ऐसा अनोखा संग्रहालय है जहां विचित्र जूतों का संग्रह देखने को मिलता है। यहां तीन शताब्दियों तक के चार हजार जोड़ी जूतों को रखा गया है। पहले यह संग्रहालय निजी संपति था लेकिन दान और उपार्जनों द्वारा अब यह सार्वजनिक संपति बन गया है।

यह संग्रहालय एक पुराने महल में है। यहां प्राचीन चीनी नारियों के नाजुक आकर्षक जूते, मैक्सिको के घुड़सवारों के रकाब के जूते, अमरीकी रेड इंडियनों के हिरण की खाल के जूते, मध्ययुगीन सामंतों के चर्चित शाही चटखदार जूते भारतीय मंदिरों में नृत्य करने वाली नृत्यांगनाओं के जूते, अफ्रीका के रेशेदार छालों तथा घास से तैयार किये जूते संग्रहित हैं। इस संग्रहालय में सन् 1525 के किसान आंदोलन के समय पहने जाने वाले बूट भी रखे हुये हैं। 1525 के यही बूट मध्य यूरोप में मुक्ति आंदोलन का प्रतीक बने।


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