- क्षतिग्रस्त हालत में पहुुंचा 150 साल पुराना गंगनहर पुल
- तीन दिन में मरम्मत के आश्वासन पर खोला जाम
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: रविवार को क्षतिग्रस्त हालत में पहुंचा 150 साल पुराना ब्रिटिशकालीन पुल की जगह दूसरा पुल बनवाने की मांग को लेकर ग्रामीण धरने पर बैठ गए। भाकियू तोमर के नेतृत्व में चल रहे धरने में अधिकारी नहीं पहुंचे तो ग्रामीणों ने कांवड़ पटरी पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार व सीओ की बात भी नहीं सुनी। कई घंटे चली जद्दोजहद के बाद तहसीलदार ने लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन से संगठन के लोगों की फोन पर वार्ता कराई।
भलसोना गंगनहर पुल करीब 150 साल पुराना है। ब्रिटिशकालीन यह पुल क्षतिग्रस्त हाल में पहुंच चुका है। पुल की रेलिंग से लेकर उस पर बनी सड़क तक पूरी तरह खस्ताहाल हो चुकी है। जिसके चलते ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण लंबे समय से नए पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रविवार को भलसोना, जटपुरा, बाडम, डूंगर, रतनगढ़ी गांव के लोग भाकियू तोमर के नेतृत्व में पुल के निकट धरने पर बैठ गए।
सूचना मिलते ही कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। ग्रामीण मौके पर कम से कम एसडीएम को बुलाने की मांग कर रहे थे। कुछ देर बाद नायब तहसीलदार भुपेंद्र सिंह, तहसीलदार सतेंद्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने वार्ता करने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने इंकार कर दिया। काफी समय बीतने के बाद भी सक्षम अधिकारी नहीं आया तो ग्रामीणों में रोष फैल गया। ग्रामीणों ने कांवड़ पटरी पर जाम लगा दिया।
सीओ संजय जायसवाल ने भी उन्हें समझाया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। ग्रामीणों का कहना था कि सभी पुल बन चुके हैं, लेकिन उनका पुल नहीं बन रहा है। पुल गिरने की कगार पर है। लगातार शिकायत के बाद भी कोई नहीं सुन रहा है। कई घंटे बाद तहसीलदार ने फोन पर लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन से वार्ता कराई। अधिकारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि तीन दिन के भीतर पुल की सड़क बनने की काम शुरू हो जाएगा।
कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले सड़क बन जाएगी। बाकी पुल निर्माण के लिए जल्द फाइल बनाकर भेजी जाएगी। इस आश्वासन पर ग्रामीण माने और जाम खोला। इस मौके पर संगठन के जिलाध्यक्ष ओमवीर सिंह जटपुरा, सुशील प्रधान, मोनू प्रधान बाड़म, सुधीर प्रधान जटपुरा, हरेंद्र सिंह, लीलू त्यागी, आमिर सुहैल, शिवम आदि मौजूद रहे।
हादसे का हो रहा इंतजार
भलसोना गंगनहर पुल करीब 150 साल पुराना है। इस पुल की बियात बहुत पहले खत्म हो चुकी है। पुल के साथ वाले पुल की जगह नए पुल बन चुके हैं। नानू, सरधना से लेकर अन्य स्थान पर पुराने पुल की जगह नए पुल बन गए हैं। मगर इस पुल के दिन नहीं सुधर रहे हैं। वर्तमान में पुल क्षतिग्रस्त हालत में है। पुल में नीचे दरार पड़ रही हैं। घाट खत्म हो चुके हैं। ऊपर रेलिंग क्षतिग्रस्त हालत में है। पुल पर बनी सड़क भी चकरोड में तब्दील हो चुकी है। जिसके चलते यहां हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
सालों से उठा रहे पुल की मांग
आसपास ग्रामीण के लोग करीब एक दशक से नए पुल की मांग कर रहे हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कुछ साल पहले सरधना व नानू गंगनहर पुल का निर्माण किया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि सभी पुल बन रहे हैं तो उनके यहां भी पुल का निर्माण होगी, लेकिन यहां कोई पुल नहीं बनाया गया।
जाम के चलते हुआ बुरा हाल
रविवार को कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी पर अधिक ट्रैफिक रहता है। दिल्ली वाले उत्तराखंड छुट्टी मनाने निकलते हैं। पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जाम लगाया तो पटरी पर वाहनों की कतार लग गई। जाम में फंसे लोगों का भीषण गर्मी में बुरा हाल हो गया। मजबूरी में पुलिस को रूट डायवर्ड करना पड़ा।

