- कायदे कानून बनाने वाले अधिकारी ही पालन कराने में नजर आए लाचार, सख्ती से लागू नहीं हुआ प्लान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कांवड़ यात्रा से पहले यात्रा को लेकर कायदे कानून बनाने वाले अधिकारी ही कायदे कानूनों का पालन कराने में लाचार नजर आए। गत छह जुलाई को कमिश्नरी सभागार में प्रदेश के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक की मौजूदगी में हुई चार राज्यों के अधिकारियों की बैठक में जो प्लान तय किया गया था, खासतौर से डीजे और ऊंची कांवड़ों को लेकर उस प्लान को सख्ती से लागू कराने के मामले में पूरा सिस्टम लाचार नजर आया।
कांवड़ की ऊंचाई 12 फीट तय की गयी थी। इसी तरह से जो साउंड सिस्टम कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ कांवड़िया लेकर चलते हैं। उसकी कितनी आवाज होनी चाहिए ये तमाम चीजें पहले ही तय कर दी गयी थीं। डीजे किराए पर देने वालों के साथ प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने मीटिंग व मुख्य सचिव तथा डीजीपी की मंशा की जानकारी दे दिए जाने का दावा किया था। उसके बाद भी कांवड़ यात्रा के दौरान तय ऊंचाई से ज्यादा ऊंची कांवड़ आयीं।
बागपत फ्लाईओवर पर दिल्ली की जिस कांवड़ में करंट उतरा था, उसकी ऊंचाई 35 फीट थी। ऐसी कई कांवड़ ड्यूटी में मुस्तैद अफसरों की आंखों में आंखें डालकर निकाली गयीं। कांवड़ से ज्यादा बुरा हाल तो डीजे का था। कई डीजे इतनी ज्यादा साउंड के चल रहे थे कि मकानों की खिड़की शीशे तक हिल जा रहे थे। ऐसा लगता था मानों निकल कर गिर ही जाएंगे।
किसकी अनुमति से डीजे मुकाबले
सिवाया टोल पर डीजे के साथ चलने वालों के मुकाबले हो रहे थे। कई ऐसे ग्रुप इसमें शामिल रहे जिनके बीच घमासान की बात कही जा रही थी। यदि वाकई ऐसा था कि तो फिर डीजे के मुकाबले रोके क्यों नहीं गए या फिर सिस्टम चलाने वालों का खुफिया सिस्टम यात्रा के दौरान फेल हो गया था। डीजे सारजन और डीजे रावण कांवड़ में मुकाबला व घमासान की आशंका जतायी गयी। जबकि इनके बीच हरिद्वार से मुजफ्फरनगर के खतौली तक दोनों ग्रुप के युवाओं के बीच कई बार हाथापाई भी हो चुकी थी। उसके बाद भी इन डीजे के साउंड सिस्टम उतरवाए क्यों नहीं गए।
क्यों उन्हें सिवाया टोल प्लाजा तक पहुंचने का रास्ता दिया गया। बताया गया है कि टोल प्लाजा पर डीजे प्रतिस्पर्धा 12 साल से हो रही है। तमाम पाबंदियों के बाद भी हर वर्ष यहां डीजे प्रतिस्पर्धा होती है। एक डीजे पर 150 से 400 युवकों की टोली डांस करती है। ऐसे में अत्यधिक साउंड के चलते युवा जोश से भर जाते हैं। घंटों तक प्रतिस्पर्धा चलती है। बाइपास पर कांवड़ सेवा शिविरों में लगे डीजे के साथ भी प्रतिस्पर्धा की जाती है। जिस डीजे की साउंड अधिक होती है तो दूसरा डीजे वाला अपना साउंड बंद कर हार स्वीकार करता है और टीम आगे बढ़ जाती है।
खिर्वा फ्लाईओवर पर पुलिस ने ऊंचे डीजे उतारवाए, हंगामा
पुलिस ने खिर्वा फ्लाईओवर के पास ऊंचे और चौड़े डीजे वाली कांवड़ को रोका। दोनों कांवड़ के कांवड़िये शहर के अंदर से जाने की जिद कर रहे थे। पुलिस ने कांवड़ को शहर के अंदर ले जाने को कहा, मगर डीजे को 12 फीट ऊंचा ही जाने देने की बात कही। इसी बात पर कांवड़ियों की सीओ दौराला शुचिता सिंह और पल्लवपुरम एसओ मुन्नेश सिंह से बहस हुई। जबकि कंकरखेड़ा में इंस्पेक्टर से बहसबाजी हुई। पुलिस ने दोनों ही डीजे से ऊपर की कालम उतरवाई। उसके बाद ही शहर में जाने दिया। जबकि खिर्वा फ्लाईओवर के पास से एक डीजे पुलिस को चकमा देकर निकल गया। जबकि एक डीजे की गाड़ी से डीजे की एक परत उतरवा दी। जिसके बाद उन्हें जाने दिया।

