- पांडव टीले पर निकले अवशेषों की जांच को पहुंची विशेषज्ञों की टीम
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: कस्बे के प्राचीन पांडव टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग मेरठ सर्किल द्वारा चल रही खुदाई में अभी तक निकले अवशेषों की जांच में मंगलवार को विशेषज्ञों की एक टीम पहुंची। टीम ने अभी तक निकले प्राचीन अवशेषों की जांच की। जिनमें से कई अवशेषों को पुरातत्व विभाग की लैब में जांच करने के लिए अपने साथ ले गई। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही कई बड़े रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना है।
कस्बे के पांडव टीले पर करीब पिछले डेढ़ महीने से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग मेरठ सर्किल द्वारा खुदाई कार्य चल रहा है। जिसमें पुरातत्व विभाग की टीम को खुदाई के दौरान कई प्राचीन साक्ष्य प्राप्त हो चुके हैं। वहीं, इस खुदाई में अभी तक कई ऐसे साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। जिनकी स्पष्ट जानकारी विभाग के अधिकारियों को प्राप्त नहीं हो रही है। वहीं, खुदाई में प्राप्त हुए प्राचीन तथ्यों की स्पष्ट जांच के लिए पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की एक टीम पांडव टीले पर पहुंची।

टीम ने पांडव टीले पर खुदाई के लिए लगाए गए ट्रेंचो का निरीक्षण किया। वहीं, पुरातत्व विभाग के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे उत्खनन की विधि को गहनता से देखा और जांच की उसके बाद टीम ने पुरातत्व विभाग के कार्यालय पर रखें अभी तक खुदाई में प्राप्त हुए अवशेषों की गहनता से जांच की।
जिनमें से कई प्राचीन अवशेषों में हड्डी, प्राचीन पत्थर, मनके, सहित अन्य दर्जनों अवशेष ऐसे थे जिनकी स्पष्ट स्थिति जानने के लिए विशेषज्ञों की टीम लैब में जांच के लिए अपने साथ ले गई। वहीं, मिट्टी के सैंपल और अन्य कई ऐसे अवशेष थे। जिन्हें कार्बन डेटिंग के लिए भेजा गया।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पांडव टीले की खुदाई में अभी तक प्राप्त हुए अवशेष विभिन्न काल खंडों से संबंधित है। जिनमें करीब 2500 साल पुराने अवशेष भी शामिल है। पुरातत्व विभाग की टीम को अभी तक पांडव ठेले पर ऐतिहासिक काल, मध्यकाल, राजपूत काल, मौर्य काल, गुप्तकाल, बड़े प्राप्त हुए हैं।
गहराई पर खुदाई जाने पर निकल रहे बड़े अवशेष
पांडव टीले पर कई ट्रेंचो में खुदाई करीब 25 फीट नीचे तक पहुंच गई है। जहां पर लगातार प्राचीन दीवारें मृदभांड टेराकोटा रिंगवेल प्राप्त हो रहे हैं। अभी तक तीन टेराकोटा के रिंग वेल प्राप्त हो चुके हैं। जिनमें से एक रिंगवेल को पूरा साफ किया जा चुका है। जिसकी लंबाई करीब साढ़े आठ फीट और 17 गोलाकार रिंग मौजूद है।

