- चार साल से लगा रहे भर्ती के लिए दौड़
- सरकार से भविष्य को संवारने की उठाई मांग
- कोरोना काल में भी खूब किया अभ्यास, भर्ती निकालने की मांग
जनवाणी संवाददाता |
मवाना: लहरों से डरकर कभी नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहींं होती। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की उक्त पंक्तियां देश सेवा को दौड़ लगाकर पसीना बहा रहे युवाओंं पर बिल्कुल सटीक बैठती है। चार साल से आर्मी, पुलिस आदि में भर्ती होने के लिए दौड़ लगा रहे युवाओं को दो वर्ष से निराशा हाथ लगी। एक भी भर्ती सेना में व पुलिस में नहीं निकली।

ऐसे में युवाओं की उम्र भी निकल गई हैं। युवा हताश और निराश हैं। फिर भी रात-दिन सड़क पर लक्ष्य पाने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। अब युवा मांग कर रहे हैं कि सरकार जल्द भर्ती निकालने। युवाओं का कहना हैं कि सर्दी हो या गर्मी उनकी दौड़ लगातार चल रही है, लेकिन सरकार की लापरवाही के चलते युवाओंं की मेहनत फैल होती नजर आ रही है।
युवाओंं की टीम के कोच सतीश भाटी ने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए जल्द भर्ती निकालने की मांग उठाई है। सैन्य सेवाओं में भर्ती कराने के लिए कुछ कोचिंग सेंटर भी चल रहे हैं। मैदान में अभ्यास भी कराया जाता हैं।
60 युवाओंं को एक साथ करा रहे तैयारी
युवाओंं को आर्मी एवं पुलिस में भर्ती कराने के लिए हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े दर्जनभर अलग-अलग गावों के साठ बच्चों को दौड़ एवं अभ्यास कराकर सुबह शाम जीआईसी ग्राउंड में खूब पसीना निकलवा रहे हैं। जनवाणी संवाददाता ने ग्राउंड जीरो पर पडताल करने के युवाओंं से विशेष बातचीत करते हुए कोच सतीश भाटी से विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए पूरी जानकारी ली।
कोच सतीश भाटी ने कहा कि ग्रुप में शामिल 60 बच्चे अनुशासन में होकर भर्ती के लिए अग्रसारित है। हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र के गांव तजपुरा, माखननगर, रहमापुर, दरियापुर, निडावली, गणेशपुर, हस्तिनापुर, मवाना, सैफपुर, बहसूमा आदि देहात क्षेत्र के युवाओंं को साथ सुबह शाम दौड़ लगवाए जाने का कार्यक्रम होता है। इस दौरान जीआईसी ग्राउंड में दौड़ लगा रहे युवा अनुज कुमार, अक्षित कुमार, मनीष, मोहित, अतुल, कपिल, सागर, अनुभव, मोनू, ॠषभ, आशीष आदि ने बताया कि आर्मी एवं पुलिस में भर्ती होने के लिए पिछले तीन-चार साल से लगातार दौड़ एवं अभ्यास कर खूब पसीना बहा रहे हैं, लेकिन उनकी मेहनत फेल हो रही है।
कहा कि सरकार बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए जल्दी भर्ती निकाले। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बाद उनकी तैयारी जारी रही। कोच सतीश भाटी ने बताया कि गांव में भर्ती का प्रयास कर रहे सभी युवा गरीब परिवार से जुड़े हैं। देश सेवा करने का जज्बा कूट-कूटकर भरा है।
ये होती है युवाओंं के लिए डायट
दौड़ टीम के कोच सतीश भाटी ने बताया कि युवा पीढ़ी कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है। दौड़ में निकलने वाले पसीने एवं स्वास्थ्य को संतुलित करने के लिए टीम में शामिल युवाओंं को सुबह के समय दलिया, तीन अंडे एवं ग्लूकोज एवं शाम को दौड़ करने के बाद केला, सेब, मिक्स जूस आदि का सेवन कराया जाता है। जबकि हफ्ते में एक बार चिकन का सेवन कराने के साथ दूध, दही भी दी जाती है।
ये कराया जाता है अभ्यास
कोच सतीश भाटी ने बताया कि ग्रुप में शामिल साठ बच्चों को भर्ती कराने के लिए आॅल आउट दौड़ यानि 1600 मीटर दौड़ के लिए 4 मिनट 35 सेकंड की तैयारियों कराई जाती है, जोकि आर्मी भर्ती के लिए होती है। नये युवाओं को समय अनुसार पहले 100 मीटर दौड़ एवं अन्य अभ्यास से शुरुआत कराई जाती है।
कोच सतीश भाटी के अथक प्रयास से उनके ग्रुप में शामिल हिमांशु नागर ने 500 मीटर दौड़ में प्रदेश स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीत चुका है। उनका कहना है कि हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र के गांवों के बच्चों को सरकारी नौकरी दिलाने उनकी पहली प्राथमिकता है।
गजब: बेरोजगारी बढ़ा रहे रिटायर्ड कर्मचारी
बेरोजगारी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है और खत्म हो भी कैसे ? क्योंकि सरकारी विभागों में तो रिटायर्ड कर्मचारियों से ही कार्य लिया जाता है। मेरठ में कई ऐसे विभाग हैं, जहां काफी संख्या में रिटायर्ड कर्मचारी संविदा पर कार्य कर रहे हैं। इन कर्मचारियों के कारण विभागों में जगह खाली नहीं हो पाती और युवाओं को नौकरी में आने का मौका नहीं मिल पाता है, जिस कारण बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।
हर साल सभी सरकारी विभागों से काफी संख्या में कर्मचारी रिटायर्ड होते हैं, लेकिन उन कर्मचारियों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए विभाग उन्हें फिर से संविदा पर कार्य करने के लिए रख लेता है। जिससे विभाग के पास जगह खाली नहीं हो पाती। विभाग उसी कर्मचारी को संविदा पर रखकर कम तनख्वाह में सारे कार्य कराता है और रिटायर्ड कर्मचारी भी संविदा पर बतौर संविदाकर्मी आसानी से कार्य करता है। मेरठ में कई ऐसे विभाग हैं, जहां संविदा कर्मचारी कार्य कर रहे हैं और विभाग के गोपनीय कार्य तक संविदा कर्मचारी संभालते हैं।
आरटीओ में प्राइवेट लोग कर रहे संविदा पर कार्य
आरटीओ के अंदर कई डिपार्टमेंट ऐसे हैं, जहां से संविदा पर प्राइवेट व्यक्ति काम कर रहे हैं। यहां भी वैक्सी हैं, जिनकी जगह खाली हैं। वहां पर सरकारी कर्मचारियों के पदों को भरा जा सकता हैं। ये लोग कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं। काम तमाम गोपनीय भी किये जाते हैं।
निगम में भी संविदा पर सरकारी कार्य
नगर निगम में संविदा पर करीब साठ से ज्यादा लोग कार्य कर रहे हैं। इन पदों पर सरकार वैक्सी निकाल सकती हैं, मगर संविदा पर भर्ती कर काम लिया जा रहा हैं। संविदा पर 10 हजार में काम करा लिया जाता हैं, जबकि सरकारी कर्मचारी को तीस से चालीस हजार रुपये देने पड़ते हैं। फिर इसी नीति के चलते बेरोजगारी बढ़ रही हैं। नगर निगम के प्रत्येक अनुभाग में संविदा पर लोग काम कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो रिटायर्ड हो चुके, उनको भी संविदा पर रखकर काम लिया जा रहा है।
एमडीए और आवास विकास में भी कई क्लर्क कर रहे कार्य
मेरठ विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद की बात करें तो यहां भी लंबे अरसे से ऐसे कर्मचारी कार्य करते आ रहे हैं, जो पहले रिटायर्ड हो चुके थे और अब विभाग में संविदा पर कार्य कर रहे हैं। एमडीए के कई जोन कार्यालयों में कई क्लर्क व अन्य कर्मचारी संविदा पर अब भी कार्य कर रहे हैं जो यहां रिटायर्ड हो गये थे। विभाग में वह वही कार्य संभाल रहे हैं, जो पहले संभाल रहे थे। आवास विकास के संपत्ति विभाग में भी एक क्लर्क रिटायर्ड होने के बाद कई सालों तक यहां संविदा पर कार्य करता रहा। आवास विकास की ओर से उन्हें वही कार्य सौंपा गया, जोकि कार्य वो अपने समय से करते आ रहे थे।
इनके कारण नहीं भरे जाते खाली पद
मेरठ की ही बात की जाये तो यहां बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। साल दर साल रोजगार कार्यालयों के आंकड़ों को देखें तो हर साल यहां बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। उधर, रोजगार कार्यालय में भी रोजगार मेला लगाया जाता है, लेकिन यहां युवाओं को रोजगार मिलना तय नहीं होता।
साल 2021 की ही बात की जाये तो मंडल में 108 रोजगार मेले लगे, लेकिन यहां आधे से भी कम युवाओं को नौकरी मिल पाई वो भी केवल निजी कंपनियों में। सरकारी भर्ती की बात की जाये तो सरकार की ओर से जो भर्तियां निकाली जाती हैं वो या तो रद हो जाती है। यहां पेपर लीक होने के कारण ठंडे बस्ते में चली जाती है। ऊपर से सरकारी विभागों में रिटायर्ड कर्मचारियों को फिर से नौकरी पर रख लेने से बेरोजगारी और अधिक बढ़ रही है, युवाओं को मौका तक नहीं मिल पाता है।

