Friday, March 6, 2026
- Advertisement -

मास्टर प्लान 2031, मिली एमडीए बोर्ड की स्वीकृति

  • मोहिउद्दीनपुर और दौराला में विशेष विकास क्षेत्र
  • काली नदी-गंगा एक्सप्रेस-वे किनारे का क्षेत्र बनेगा औद्योगिक क्षेत्र
  • मेरठ महायोजना 2021 के भू-उपयोग में किसी तरह का बदलाव नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आखिर सोमवार को मास्टर प्लान 2031 पर एमडीए बोर्ड बैठक में स्वीकृति की मुहर लगा दी गई। मेरठ महायोजना-2031 को अब पंख लग सकेंगे। एमडीए की 120वीं बोर्ड बैठक में इसके ड्राफ्ट को स्वीकृति दे दी गई। नई महायोजना में भू-उपयोग उन क्षेत्रों में लगाया गया है, जो नए विस्तारित क्षेत्र हैं। मेरठ महायोजना 2021 के तय किए गए भू-उपयोग में कोई बदलाव (रैपिड रेल कॉरिडोर छोड़कर) नहीं किया गया है।

नई महायोजना 2031 में मोहिउद्दीनपुर व दौराला में विशेष विकास क्षेत्र एसडीए प्रस्तावित किया गया है। दोनों स्थानों पर यह 400 हेक्टेयर का होगा। इसमें मिश्रित भू-उपयोग होगा। रैपिड रेल कारिडोर व ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट नीति (टीओडी) के तहत इसे महायोजना में शामिल किया गया। ये दोनों विकास क्षेत्र रैपिड रेल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर व नेशनल हाईवे के बाइपास को ध्यान में रखकर रखा गया है।

रैपिड रेल कारिडोर के सभी स्टेशनों के 1.50 किमी परिधि तक विशेष इंफ्लूएंसर जोन रखा गया है। इसमें विशेष सुविधाओं का विकास हो सकेगा। कुछ माह में इसमें टीओडी नीति के प्रविधान लागू होंगे। इसलिए वर्तमान में चल रहे भूउपयोग हट जाएंगे। भूउपयोग मिश्रित हो जाएंगे। काली नदी के किनारे औद्योगिक भूउपयोग रखा गया है। हापुड़ रोड पर जहां से गंगा एक्सप्रेस-वे शुरू हो रहा है, उसके इंटरचेंज के पास औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है।

ये रहेगा सुविधा क्षेत्र

एक्सप्रेस-वे और सभी हाइवे, हाइवे के बाइपास के दोनों तरफ 300 मीटर तक के क्षेत्र को सुविधा क्षेत्र में शामिल किया गया है। इसमें होटल, मोटेल, पेट्रोल पंप, सीएनजी आदि के लिए विशेष छूट रहेगी। इन सभी के साथ ग्रीन बेल्ट का भी प्रविधान किया गया है।

हरियाली-आक्सीजन का रखा ध्यान

एक्सप्रेस-वे व हाइवे, रिंग रोड किनारे ग्रीन बेल्ट तो हमेशा की तरह रखा ही गया है। इस बार आवासीय व औद्योगिक क्षेत्र को अलग करने के लिए दोनों के बीच ग्रीन बफर जोन रखा गया है। काली नदी व सभी नहरों के किनारे ग्रीन बेल्ट रखी गई है। सोफीपुर फायरिंग रेंज के पास रक्षा मंत्रालय द्वारा चिह्नित क्षेत्र में किसी भी तरह का मानचित्र स्वीकृत नहीं होगा।

उसे खुले क्षेत्र, पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। प्राधिकरण क्षेत्र के सभी नगरों में पार्क, खुले क्षेत्र, हरित क्षेत्र के लिए भूउपयोग कम से कम उसके क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत अनिवार्य किया गया है। हापुड़ की ओर जाने वाली रेलवे लाइन के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट रखा गया है। सभी प्रमुख मार्गों पर ग्रीन एरिया विकसित किया जाएगा।

सरधना चर्च: पर्यटन केंद्र के रूप में किया जाएगा विकसित

मेरठ से सरधना तक जाने वाली सड़क की चौड़ाई 38 मीटर करने का प्रविधान किया गया है। सरधना चर्च के आसपास व्यावसायिक भू-उपयोग रखा गया है। ताकि इसे पर्यटन केंद्र के रूप में बढ़ने में मदद मिल सके। इससे यहां पर होटल, रेस्टोरेंट आदि खुल सकेंगे। सरधना में औद्योगिक भू-उपयोग नहर के पश्चिम की ओर प्रस्तावित किया गया है।

हस्तिनापुर, लावड़ और बहसूमा के विकास पर नजर

हस्तिनापुर में वन भूउपयोग से संबंधित क्षेत्र में खुले स्थान, पार्क का भूउपयोग रहेगा। वहां के वन क्षेत्र को देखकर बाकी भूउपयोग निर्धारित होगा। लावड़ नगर का विकास बेहतर हो और आर्थिक गतिविधियां गति पकड़ें इसके लिए यहां पर सामुदायिक सुविधा व व्यावसायिक भूउपयोग का विशेष प्रविधान किया गया है। महसूमा नगर के चारों तरफ आवासीय , व्यावसायिक, औद्योगिक आदि भूउपयोग रहेगा। इन सब नगरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लाट व कूड़ा निस्तारण प्लांट का प्रविधान किया गया है।

अब कराने होंगे एमडीए से मानचित्र स्वीकृत

सरधना, हस्तिनापुर, लावड़, बहसूमा मेरठ विकास प्राधिकरण के विस्तारित क्षेत्र में वैसे तो पहले से शामिल थे, मगर इनका भूउपयोग तय न होने से यहां मानचित्र एमडीए की ओर से स्वीकृत नहीं हो रहा था। वहीं जिला पंचायत से भी मानचित्र स्वीकृत नहीं हो पा रहा था। अब नई महायोजना में इन सभी नगरों व संबंधित गांवों के लिए भूउपयोग निर्धारित हो गया है। इससे अब एमडीए यहां भी मानचित्र स्वीकृत करेगा।

20 मई से देखिए जांचिए सुझाव दीजिए

महायोजना को 20 मई से जनता के लिए सार्वजनिक किया जाएगा। इसके लिए एक माह तक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। महायोजना की पुस्तिका रहेगी जिसे लोग खरीद सकेंगे। उस आधार पर लोगों से सुझाव व आपत्तियां ली जाएंगी। आपत्ति व सुझाव पर सुनवाई होने के बाद महायोजना का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। फिर इसे लागू किया जाएगा।

मोबाइल पर देख सकेंगे भू-उपयोग

यह महायोजना डिजिटल है। महायोजना में किस स्थान के लिए क्या प्राविधान किया गया है उसे आनलाइन देख सकेंगे। किस भूमि का उपयोग किस रूप में किया जा सकता है यानी उसका भू-उपयोग भी देखा जा सकेगा। इससे जमीन बिक्री का फजीर्वाड़ा भी रुकेगा। इसे हिसाब से अपने व्यवसाय की योजना बना सकेंगे।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

बच्चों को भी देना चाहिए सम्मान

सिद्धार्थ ताबिश मेरा बड़ा बेटा इस बात को सुनकर बड़ा...

युद्ध का सीजन बारहों महीना

जो युद्ध के कारोबारी हैं, उनका सीजन बारहों महीना...

मध्य पूर्व के सतत झगड़े के वैश्विक निहितार्थ

मध्यपूर्व जिसे भारत के संदर्भ में पश्चिमी एशिया कहा...

नीतीश युग का अवसान

बिहार की राजनीति लंबे समय से व्यक्तित्व-केन्द्रित और गठबंधन-आधारित...
spot_imgspot_img