Monday, March 16, 2026
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जानिए, कांग्रेस के चिंतन शिविर में उठी यह मांग

  • हिंदुओं के कार्यक्रमों में शामिल हों पार्टी नेता, मिलेगा सॉफ्ट हिन्दुत्व का फायदा

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: राजस्थान के उदयपुर में चल रहे कांग्रेस के नव संकल्प शिविर में जहां एक ओर प्रस्ताव रखा गया कि चुनावों के दौरान पार्टी नेतृत्व मंदिर, मस्जिद, चर्च या गिरिजाघर जैसे किसी धार्मिक स्थल के दौरे ना किया करें, वहीं सूत्रों के मुताबिक पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं ने इससे पलट सुझाव दिया कि कांग्रेस नेताओं को हिन्दुओं के कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के चिंतन शिविर में चर्चाओ के दौरान वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सलाह दी है कि पार्टी नेताओं को हिन्दुओं के कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए, इससे सॉफ्ट हिन्दुत्व में फायदा मिलेगा।

आपको बता दें कि इसी चिंतन शिविर में कुछ अन्य नेताओं द्वारा इससे ठीक पलट ये प्रस्ताव दिया गया है कि कांग्रेस को RSS और BJP के हिन्दुत्व की राजनीति की फांस में ना आकर सभी धर्मों के प्रति समान रुख रखना चाहिए और बीजेपी को टक्कर देने के लिए एक मज़बूत धर्मनिरपेक्ष स्टैंड लेना चाहिए।

कांग्रेस का ये चिंतन शिविर तीन दिन का है, जिसकी शुरुआत 13 मई को हुई। शिविर का आज आखिरी दिन है। तीन दिवसीय चिंतन शिविर में छह अलग अलग समूहों में नेता विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। इस चर्चा से निकलने वाले निष्कर्ष को ‘नवसंकल्प’ के रूप में कांग्रेस कार्य समिति रविवार को मंजूरी देगी।

चुनाव के वक्त धार्मिक स्थलों में ना जाने की भी मिली थी सलाह

इससे पहले चिंतन शिविर में मांग की गई कि चुनावों के वक्त पार्टी नेतृत्व मंदिर, मस्जिद, चर्च या दूसरे धार्मिक स्थलों में ना घूमे। चिंतन शिविर में मौजूद कुछ सदस्यों ने ये प्रस्ताव रखते हुए कहा है कि ऐसा करने से कांग्रेस के वोटर भ्रमित होते हैं और इससे सही संदेश नहीं जाता।

इस प्रस्ताव में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कांग्रेस को बीजेपी के सामने एक मजबूत धर्मनिरपेक्ष स्टैंड लेना चाहिए। बता दें कि बीजेपी के धार्मिक राजनीतिक रुख को देखते हुए पिछले कुछ सालों में हुए चुनावों में अक्सर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर जाकर दर्शन करते देखा गया है। माना जाता है कि इसके पीछे कांग्रेस की सोची समझी रणनीति थी, लेकिन चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो कांग्रेस को इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

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