- स्टेडियम में शूटरों को नहीं मिल रही सुविधाएं
- आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी का टूट रहा मनोबल
- घायल होने के बाद इलाज के लिए भी पैसे नहीं
- देश के लिए खेलने का सपना बिखरने के कगार पर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शूटिंग जैसे महंगे खेल में आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी केवल सपने ही देख सकते हैं। इन सपनों को पूरा करने के लिए यह कितने भी जतन कर ले, लेकिन इनका सपना तो सपना ही रहता है। ऐसे ही एक खिलाड़ी ने अपनी आपबीती बताते हुए जो हालात बयां किए। वह किसी दर्द से कम नहीं है। यह खिलाड़ी इस समय घायल है, लेकिन इसे उम्मीद है कि एक न एक दिन सरकार इन जैसे खिलाड़ियों की सुध जरूर लेगी।
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले शूटर आनंद सागर ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से है। वह पिछले काफी समय से मेरठ के नौचंदी ग्राउंड के पास रहते हैं। उनके पिता छोटा-मोटा कारोबार करते हैं, लेकिन उसने शूटिंग में देश के लिए मेडल जीतने का सपना संजोया है। किसी तरह आनंद ने शूटिंग के लिए जरूरी पिस्टल तो खरीद ली, लेकिन उसे प्रैक्टिस करने के लिए न तो शूटिंग रेंज मिली न ही कोच।

यूपी में पहले स्टेट लेवल की प्रतियोगिता होती थी, लेकिन अब इसे प्री-स्टेट कर दिया गया है। यह इसलिए किया गया है कि शूटिंग जैसे खेल में केवल ऐसे खिलाड़ी ही शामिल हो सके, जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत है। प्री-स्टेट प्रतियोगिता प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आयोजित की जाती है। इसमें शामिल होने के लिए खिलाड़ियों को कोई पैसा नहीं मिलता।
खिलाड़ियों को मिलनी चाहिए यह सुविधाएं
शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ियों को एक जगह से दूसरी जगह जाना होता है। जिसका खर्च भी उन्हें ही वहन करना पड़ता है, कितनी भी काबलियत हो, लेकिन सरकार से कोई मदद नहीं मिलती। दूसरे जिले में जाने के लिए किराए से लेकर रहने, खाने, कोच व अन्य संसाधनों की जरूरत पड़ती है जो नहीं मिल रहे। डाइट से लेकर अन्य खर्च के लिए भी सरकार को आर्थिक मदद करनी चाहिए।
कैलाश प्र्रकाश स्टेडियम में नहीं है सुविधाएं
शूटर आनंद ने बताया कि वह पहले स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए जाते थे, लेकिन वहां सुविधाओं का आभाव है। न कोच है, न रेंज की व्यवस्था है। जिस वजह से वहां प्रैक्टिस करने को नहीं मिलती। इसलिए उन्होंने निजी रेंज में दाखिला लिया, लेकिन उसकी फीस चुकाने में वह असमर्थ है। आनंद ने बताया कि वह जिन हालातों में अपने खेल के सपने को जीवित रखे हैं। वह हर किसी के बस की बात नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे इस खेल को न चुने।
2018 से घायल शूटर की सुध लेने वाला कोई नहीं
खिलाड़ी ने भरे मन से बताया कि वह ओलंपिक खिलाड़ी सौरभ चौधरी के साथ के ही खिलाड़ी है, लेकिन उन्हें न तो कहीं से मदद मिली न ही सरकार से कोई सुविधा। उनकी आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है, ऐसे में घायल होने के बाद उन्हें इलाज तक नहीं मिल सका। किसी तरह इलाज करा रहे हैं, अब 15 प्रतिशत चोट रह गई है, जो ठीक हो जाएगी, लेकिन उनकी मदद किसी ने नहीं की। परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहा है।

