Wednesday, March 4, 2026
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जिन्हें हमारा मजहब नहीं पसंद, वह मुल्क छोड़ कर चले जाएं: मदनी

  • धार्मिक स्थलों की हिफाजत के संकल्प के साथ जमीयत का अधिवेशन संपन्न
  • संवैधानिक दायरे में रहकर कॉमन सिविल कोड का विरोध करने का निर्णय 

मुख्य संवाददाता  |

देवबंद:  जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय सदर महमूद असद मदनी ने कहा कि-मुसलमानों का खानपान अलग है। पहनावा अलग है। पूजा पद्धति भी अलग है। जिन लोगों को हमारा मजबह नहीं पसंद है, वह खुद मुल्क छोड़कर चले जाएं। हम हिंदु्स्तान छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले। बंटवारे के दौरान हमने पाक को रिजेक्ट किया है। नफरत फैला रहे लोगों को यह मौका नहीं मिला था।

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जमीयत प्रमुख, महमूद असद मदनी देवबंद के ईदगाह मैदान में आयोजित राष्ट्रीय प्रबंध कमेटी के दो दिवसीय इजलास को रविवार को संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षीय भाषण में जमीयत प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने देश के वर्तमान हालात और मीडिया द्वारा अपना काम ईमानदारी से न करने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक कहा कि बात-बात पर हमें पाकिस्तान चले जाने की नसीहत दी जाती है। ऐसा करने वाले अच्छी तरह समझ लें कि हम कहीं जाने वाले नहीं है।

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क्योंकि ये देश हमारा है और हम यहीं के बाशिंदे हैं। हमें अल्पसंख्यक माना और कहा जाता है लेकिन सच यह है कि हम देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी हैं। हां हमारा खानपान अलग है, पहनावा अलग है, मजहब अलग है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि जो लोग हमें और हमारे मजहब को पसंद नहीं करते वह खुद देश छोड़कर चलें जाएं। कहा कि राष्ट्रप्रेम की बात करने पर हमें ढोंगी कहा जाता है|

लेकिन मैं कहता हूं कि इस देश के लिए अगर मेरा खून बहेगा तो वह मेरे लिए सौभाग्य होगा। मौलाना ने देश की एकता अखंडता को मजबूत करने के लिए सभी वर्गों और धर्मों के साथ मिलकर भाईचारे के साथ काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। बता दें कि नगर के ईदगाह मैदान में शनिवार को प्रारंभ हुआ जमीयत का अधिवेशन रविवार की दोपहर तीसरे और अंतिम चरण के बाद संपन्न हो गया।

कुछ खास-खास:-

1-अधिवेशन में मुल्कभर से पहुंचे जमीयत पदाधिकारियों और उलेमा ने कॉमन सिविल कोड को किसी भी सूरत में स्वीकार न करने का संकल्प लिया।

2-बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की शाही ईदगाह समेत देश में मौजूद तमाम इबादतगाहों की हिफाजत पर जोर दिया।

3-इस्लामी शिक्षा के खिलाफ फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने, फलस्तीन, सीरिया व यमन के हाल पर चिंता व्यक्त करते हुए मुस्लिम देशों के शासकों से इनके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की।

4- अधिवेशन में कुल 11 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। जमीयत पदाधिकारियों द्वारा लाए गए प्रस्तावों का अधिवेशन में मौजूद उलेमा और अवाम ने एक सुर में समर्थन किया।

5-अधिवेशन में जमीयत प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के अलावा कई और इस्लामिक विद्वानों ने तकरीर की।

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