Tuesday, June 16, 2026
- Advertisement -

लावारिस शवों को ऐसे मिलती है मुक्ति?

  • मोर्चरी में शवों को तीन दिन तक रखा जाता है सुरक्षित पहचान के लिए

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने की जिम्मेदारी पुलिस की है, जिसके लिए सरकार से दो हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन इन शवों का अंतिम संस्कार सामाजिक संगठन, समाजसेवी व पुलिस मिलकर कराती है। अभी तक ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है।

जिससे यह साबित हो सके कि शासन द्वारा मिलने वाला पैसा कभी किसी थाने की पुलिस ने लिया हो। यह मानवता की एक ऐसी मिसाल है। जिसमें कोई धर्म भी आड़े नहीं आता, केवल इंसानित के नाते लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है।

मोर्चरी पर आता है लावारिस शव

किसी लावारिस शव के मिलने के बाद संबंधित थाने की पुलिस को सूचना दी जाती है। इसके बाद पुलिस शव को मोर्चरी लेकर आती है। यहां पर शव को तीन दिन तक पहचान होने के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इस दौरान पुलिस शव की फोटो अखबारों व अन्य दूसरे साधनों के जरिए पहचान कराने की कोशिश करती है।

12 17

इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है। जिसके बाद शव को श्मशान घाट भेजा जाता है। मानव सेवा समिति के द्वारा शव का अंतिम संस्कार कराया जाता है। इस दौरान शव से मिले कपड़े आदि अन्य चीजों को सुरक्षित रख लिया जाता है, जिससे यदि कोई शख्स किसी अपने की तालाश में आए तो वह इन चीजों के द्वारा मृतक की शिनाख्त कर सके।

सामाजिक संगठन को थाने से भेजी जाती है सूचना

मानव सेवा समिति के सदस्य अजय अग्रवाल ने बताया कि शव मोर्चरी में आने के बाद थाने की पुलिस उन्हें एक पत्र द्वारा सूचित करती है। इसके बाद समिति श्मशान घाट में अंतिम क्रिया कराने वाले पंडित की फीस, अंतिम क्रिया सामाग्री व चिता के लिए लकड़ी का इंतजाम करती है। संस्था में कुल 12 सदस्य है, जो पिछले कई सालों से इस काम को अंजाम दे रहे हैं। समिति को दान में मिलने वाले फंड से ही सारा खर्च वहन किया जाता है।

तीन से चार कुंतल लगती है लकड़ी

एक स्वास्थ्य मानव शरीर का अंतिम संस्कार करने के लिए अमूमन तीन से चार कुंतल लकड़ियां लगती है। एक कुंतल लकड़ी की कीमत 800 रुपये है, जबकि अन्य सामान की कीमत व पंडितों को पांच सौ रूपये अंतिम क्रिया का अलग से दिया जाता है। हालांकि पोस्टमार्टम होने के बाद शरीर हल्का हो जाता है इसलिए लकड़ी कम भी हो जाती है।

एक शव का अंतिम संस्कार करने का खर्च 23 सौ रुपये आता है, जो संस्था ही वहन करती है। आठ साल से एक महीने में 15 से 18 लावारिस शव आ रहे हैं। जबकि कोरोना काल में यह संख्या कहीं ज्यादा हो गई थी।

शव की पहचान मुस्लिम के रूप में होने पर कमेटी को सौंपते हैं

लावारिस शव का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए उसका अंतिम संस्कार मानव सेवा समिति द्वारा हिंदू रीति-रिवाज से किया जाता है, लेकिन शव किसी मुस्लिम का होने पर पहले कब्रिस्तान में व्यवस्था की जाती थी। मगर कुछ समय पहले कुछ मुस्लिम एडवोकेटों ने इस काम को खुद करने की जिम्मेदारी ली जिसके बाद अब शव उन्हें सौंप दिया जाता है। मुस्लिम शवों को सपुर्देखाक करने के लिए उनके रिवाजों का पालन करना होता है इसलिए भी संस्था द्वारा शव मुस्लिमों की तीन सदस्यों की कमेटी को सौंप दिया जाता है।

अंतिम क्रिया के लिए कोई पैसा क्लेम नहीं किया

किसी भी अंतिम क्रिया को करने के लिए पुलिस को शासने से दो हजार रूपये मिलते है, लेकिन कई सालों से पुलिस ने किसी भी लावारिस शव का अंतिम संस्कार करने का पैसा क्लेम नहीं किया है। यहां तक की कई जहगों पर पुलिसकर्मी आपस में अपनी जेब से पैसे मिलाकर अंतिमक्रिया कराते है।

यहां तक की ऐसे भी मामले है जब लावारिस शव का अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिसकर्मी संस्था को पैसे देते है। हमने कई पुलिस कर्मियों से जानकारी की तो पता चला कि कितना पैसा शासन से पुलिस को मिलता है उन्हें यह भी नहीं पता।

शव को मोर्चरी और श्मशान लाने की जिम्मेदारी पुलिस की

जिस जगह शव मिलता है, उस जगह से मोर्चरी व पोस्टमार्टम के बाद शव को श्मशानघाट पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। पुलिस किसी भी तरह व्यवस्था करते हुए शव को पहुंचाती है। इस दौरान कई बार पुलिस अपने पास से भी पैसे खर्च करती है। जिससे शव को समय पर सही जगह पहुंचाया जा सके।

लावारिस शव के अंतिम संस्कार के मिलते हैं दो हजार

नियमों के अनुसार पुलिस को एक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए दो हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन इन्हें क्लेम कैसे किया जाता है?

13a

यह उन्हें भी नहीं पता, क्योंकि कभी पुलिस ने यह पैसा शासन से नहीं लिया।
-विनीत भटनागर, एसपी सिटी

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Saharanpur News: मुठभेड़ में गौकशी के आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक साथी फरार

जनवाणी संवाददाता | सहारनपुर: थाना फतेहपुर क्षेत्र में पुलिस और...

Noida International Airport: ज़मीन से आसमान तक, नोएडा एयरपोर्ट पर किसानों की ऐतिहासिक उड़ान

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास...

Share Market: शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान पर खुले

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार...

सोमवती अमावस्या 2026: आज बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Weather Update: दिल्ली-एनसीआर में मौसम का बदला मिजाज, बारिश से मिली राहत

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: सोमवार की सुबह दिल्ली-एनसीआर में...
spot_imgspot_img