- संभल से मेरठ पहुंचा परिवार एमआरआई कराने को मेडिकल, जिला अस्पताल के बीच फंसा
- तीन दिन तक बिना छत, अनजान शहर में छोटे बच्चों के साथ कहां रहेगा मरीज
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रदेश सरकार गरीब व असहाय मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लाख दावें करती है, लेकिन इन दावों की कलई खोल रहा है एक ऐसा परिवार जो दो दिनों से मेडिकल व जिला अस्पताल के बीच फुटबॉल बनकर रह गया है। संभल से मेरठ पहुंचे परिवार को एमआरआई कराने के लिए दर-दर की ठोकरे खानी पड़ रही है। साथ में मरीज के दो छोटे बच्चे व पत्नी और भाई है जो शुक्रवार से परेशान है।
अब यह मरीज इस अंजान शहर में शनिवार की रात को किसी तरह बिता रहा है, लेकिन रविवार का पूरा दिन और रात कहां और कैसे बिताएगा यह किसी को नहीं पता। शनिवार को मेडिकल की ओपीडी में मौजूद स्टाफ ने समय समाप्त होने की बात कहते हुए सोमवार को फिर से आने को कहा है।
इलाज के नाम पर किस तहर गरीब मरीज का उत्पीड़न होता है यह इसका जीता-जागता उदाहरण है। शनिवार को जिला अस्पताल में संभल से अपने परिवार के साथ एमआरआई कराने के लिए पहुंचे मरीज मनोज ने बताया कि किस तरह वह दो अस्पतालों के बीच फुटबॉल बनकर रह गया है।
ये है घटना
चलने फिरने से भी लाचार मरीज मनोज ने बताया कि कुछ दिनों पहले संभल में किसी वजह से एक दूसरे परिवार के साथ विवाद हो गया था। इसमें जमकर मारपीट हो गई जिसमे उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई। इस कारण वह चलने-फिरने से भी लाचार हो गया। परिजनों ने संभल में ही किसी डाक्टर से इलाज कराया तो उसने मरीज का एमआरआई करने को लिख दिया। साथ ही मेडिकल कॉलेज मेरठ के लिए रैफर कर दिया।
शुक्रवार दोपहर मरीज अनपे तीन साल के बेटे व एक साल की बेटी व पत्नी और भाई के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंच गया। यहां पर इमरजेंसी में बने आर्थोपेडी विभाग के डाक्टरों ने ओपीडी कमरा नंबर एक में भेज दिया। ओपीडी में आने पर मरीज को मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की सुविधा नहीं होने का हवाला देकर जिला अस्पताल भेज दिया गया।
किसी तरह रात सड़क पर काटने के बाद मरीज शनिवार जिला अस्पताल पहुंचा तो यहां पर डाक्टरों ने उसे मेडिकल जाने के लिए कह दिया, क्योंकि जिला अस्पताल में एमआरआई की सुविधा ही नहीं है। इसके बाद मरीज किसी तरह मेडिकल कॉलेज की एक नंबर ओपीडी में पहुंचा तो फिर से उसे समय समाप्त होने की बात कहते हुए सोमवार को बुलाया गया।
तीन दिन तक सड़क पर परिवार
मनोज ने कहा कि वह यहां अनजान है, शुक्रवार की रात को किसी तरह काट ली। अब पूरे दिन छोटे बच्चों के साथ परिवार जिला अस्पताल व मेडिकल के बीच फंसकर रह गया है। वहीं शनिवार के बाद रविवार का भी पूरा दिन बिताना है। मरीज के पास पैसे भी खत्म हो गए हैं, जितने पैसे है वह इलाज के लिए ही कम पड़ रहे हैं। ऐसे में वह सोमवार तक किस तरह परिवार के साथ रहेगा यह सोचने वाली बात है।
मेडिकल में ही एमआरआई की सुविधा है, ऐसे में यहां से मरीज को किन परिस्थितियों में जिला अस्पताल भेजा गया यह कहा नहीं जा सकता। हो सकता है कि ओपीडी में डाक्टरों ने मरीज को किसी और वजह से जिला अस्पताल भेज दिया हो। अब मरीज ओपीडी में सोमवार को आएगा तो उसकी पूरी मदद की जाएगी।
-डा. ज्ञानेश्वर, एचओडी रेडियोलॉजी विभाग

