- लाखों के खंभे और तार ऊर्जा निगम अफसरों ने करा दिये गायब?
- यदि बिजली घर चालू था तो करंट दौड़ते खंभे और तार कैसे ले गए चोर?
- ठेकेदार और बिजली विभाग के भ्रष्ट अफसरों का मेरठ में चल रहा बड़ा सिंडीकेट
- कुछ माह से बंद पड़ा 44/11 केवी का बिजली घर
- ऊर्जा मंत्री और पीवीवीएनएल एमडी के पहुंचने से पहले हो गया चालू
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ऊर्जा निगम में किस कदर भ्रष्टाचार व्याप्त है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इन अफसरों को नहीं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खौफ है। मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस की नीति को ऊर्जा निगम के अफसर पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा तब है जब इनके सिर पर मेरठ में प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री डा. सोमेंद्र तोमर बैठे हैं। उनकी भी आंखों में यह अफसर धूल झोंक रहे हैं और भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जागृति विहार एक्सटेंशन का, जहां 44/11 केवी के बिजलीघर अधूरा है और हैंडओवर के नाम पर ‘महाखेल’ कर दिया गया है। इस भ्रष्टाचार के खेल में कौन कौन अधिकारी शामिल है? यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन दर परत दर जांच में कई नाम सामने आ जाएंगे, लेकिन इतना अवश्य है कि भ्रष्टाचार निचले स्तर से नहीं, बल्कि ऊपर से हुआ है। जेई, एसडीओ और एक्सईएन तो इसमें सरेआम लिप्त हैं। क्योंकि इस भ्रष्टाचार की पोल वर्तमान में एक्सईएन वीके गुप्ता के पत्र ने भ्रष्टाचार पर पड़े पर्दे को उठा दिया।
इसके बाद ऊर्जा निगम के अधिकारी भ्रष्टाचार की बात सामने आने पर किरकिरी होने से कैसे बचें? इस जुगत में लग गए। क्योंकि खंभों से तार और खंभे भी यहां से चोरी हो गए? जब बिजली का करंट इनमें दौड़ रहा था तो फिर कैसे खंभे और बिजली के तार चोरी हो सकते हैं? यह बड़ा सवाल है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसमें ऊर्जा निगम के अफसरों ने सेंटिंग कर के खंभे और बिजली के तार बेच दिए। इस तरह से लाखों का घोटाला कर दिया गया।
क्योंकि अधिकारियों को भी नहीं पता कि कहा बिजली के खंभे लग रहे हैं और कहा तार खींच रहे हैं? यही नहीं, हाल ही में एक्सईएन वीके गुप्ता ने जब चार्ज संभाला तो वह टीम लेकर जागृति विहार एक्सटेंशन में स्थित बिजलीघर को देखने पहुंच गए, जहां पर बिजली घर जब हैंडओवर हो चुका है, उसकी हालत कैसी है? तब वहां जाने के बाद मालूम हुआ कि इसमें तो करंट ही नहीं दौड़ रहा है फिर हैंडओवर कैसे हो गया?
दरअसल, लाखों का घालमेल करने के लिए ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने कागजों में हैंडओवर दिखा दिया और धरातल पर हर रोज कभी खंभे गायब तो कभी तार चोरी, इसकी मेडिकल थाने में तहरीर दी जाने लगी। क्योंकि जब तक हैंडओवर नहीं था तब तक ठेकेदार का सामान चोरी हो रहा था। इसके बाद ठेकेदार ने ऊर्जा निगम के अफसरों से सेटिंग का खेल कर चोरी हुए सामान को भी ऊर्जा निगम के खाते में डाल दिया।
इस तरह से लाखों का घोटाला कर दिया गया। अब घोटाला खुला है तो आंख मूंदे बैठे ऊर्जा निगम के एमडी भी नींद से बाहर आए और आनन-फानन में प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर के साथ जागृति विहार स्थित बिजली घर एक्सटेंशन में बिजली घर पर पहुंचे और देखा कि आनन-फानन में बिजली घर पर करंट तोड़ रहा है। यह कैसे चमत्कार हुआ? मंत्री और एमडी के आने की सूचना इन भ्रष्ट अफसरों को पहले ही लग गई थी या फिर सूचना दी गई?
यह बड़ा सवाल है। गोपनीय दौरे की भनक कैसे लगी? जिसके बाद रातों-रात बिजली चालू करने का काम कर दिया। यहां पर तारों में बिजली दौड़ रही थी तो फिर बिजली के तार और खंभे कैसे चोरी हो गए? जिनकी तहरीर मेडिकल थाने में दी गई है। इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की बात सामने आने के बाद सरकार की भी खासी किरकिरी हो रही है? क्योंकि विपक्ष भी इसको मुद्दा बना रहा है।
डा. सोमेन्द्र तोमर की छवि को भी लगा रहे अफसर बट्टा
भ्रष्टाचार के मामले में खासी किरकिरी होने के बाद अब प्रदेश के राज्य मंत्री डा. सोमेंद्र तोमर डैमेज कंट्रोल करने में जुट गए हैं। क्योंकि उनका मेरठ गृह जनपद है और फिर वह ऊर्जा राज्यमंत्री के पद की जिम्मेदारी का भी निर्वहन कर रहे हैं। इसी वजह से ऊर्जा निगम की छवि तो पहले ही खराब है। ऐसे में डा. सोमेंद्र तोमर की छवि को भी ऊर्जा निगम के अफसर पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
क्योंकि भ्रष्ट अफसरों और ठेकेदारों का एक बड़ा सिंडीकेट ऊर्जा निगम में काम कर रहा है, जिसके चलते यह सिंडिकेट ऊर्जा मंत्री पर भी भारी पड़ता दिख रहा है, जो अफसर चाहते हैं वही ऊर्जा निगम में हो रहा है। जब अधूरा बिजली घर था तो हैंडओवर फिर कैसे हो गया? बिजली विभाग के अफसरों की भूमिका संदेह के दायरे में है। स्पष्ट है कि ठेकेदारों से ऊर्जा निगम के अफसरों की मिलीभगत है, जिसके बाद ही कागजों में बिजली घर हैंडओवर कर दिया गया।

