Tuesday, March 3, 2026
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एनएचएआई की ना, तो खड़ौली कट खोला किसने ?

  • हाइवे पर अवैध कट बने मौत का सबब, दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ा जाम बना प्रमुख समस्या

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: अपनी सुविधा के लिए लोग दूसरों की जान जोखिम में डालने में कोई गुरेज नहीं करते। इसकी बानगी फोरलेन हाइवे पर देखी जा सकती है। कई जगह अवैध कट होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं, फिर भी इस ओर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। हाइवे के अवैध कट, हादसों का कारण बनते हैं।

यहीं हादसे कई बार इतने खतरनाक होते हैं कि मौत का कारण भी बनते हैं। धुंध के बीच हादसों की संभावना कहीं अधिक बढ़ जाती है, लेकिन इसके बावजूद हाइवे पर अवैध कटों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। मौत के सबब बने अवैध कट आखिर कब बंद होंगे ये एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

लगता है कि हाइवे अथारिटी आम जनता के प्रति कतई संवेदनशील नहीं हैं। भयावह हादसों के सबब बने अवैध कट को बंद कराने के अभी तक कोई सार्थक प्रयास नहीं किए हैं।

एनएच-58 पर अवैध रूप से खुले कट मौत का सबब बने हुए हैं। जिसके चलते जहां आए दिन दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है। वही इन कटों के खुलने से हाइवे पर जाम की भी भयंकर स्थिति देखने को मिल रही है।

हालांकि टोलवे प्रबंधन का कहना है कि हाइवे पर जो अवैध रूप से कट खुले हुए हैं। उन कटों को वह बंद कर रहे हैं, लेकिन बार-बार स्थानीय लोग इन कटों को खोल देते हैं। जिसके चलते हाइवे पर परेशानी खड़ी हो जाती है। जनपद के पुलिस प्रशासन को पत्र लिखकर इसमें मदद की मांग की गई है।

परतापुर बाइपास से लेकर रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर) तक का करीब 72 किमी का यह हाईवे हादसों का सबब बनता जा रहा है। परतापुर से लेकर मोदीपुरम चेकपोस्ट तक हाइवे पर अवैध रूप से कट खुले हुए हैं। इन कटों को बंद किया गया, लेकिन यह कट बार-बार खोल दिए गए। जिसके चलते यहां दुर्घटना बढ़ रही है। जाम तो अब आम बात हो चली है। ऐसे में लोगों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।

हाइवे पर पुलिस नजर नहीं डालती

एनएच-58 पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर हाइवे पुलिस सक्रिय रहने का दावा करती है, लेकिन इन कट पर वह भी नजर नहीं डालती है। हाइवे हो या साधारण मार्ग सार्वजनिक सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाना दंडनीय अपराध है, फिर भी इस खतरनाक अपराध करने वालों की अनदेखी की जा रही है।

एफआईआर क्यों नहीं कराई नेशनल हाइवे ने

एनएच-58 के साथ कोई भी छेड़छाड़ करता है तो नेशनल हाइवे अथारिटी को एफआईआर दर्ज कराने के अधिकार मिले हुए हैं, लेकिन खड़ौली कट को खोलने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई जा रही है? आखिर कट को ओपन करने की किसने अनुमति दी?

इसमें सख्त कदम उठाये जाने चाहिए थे, मगर नेशनल हाइवे अथारिटी ने सिर्फ एक पत्र प्रशासनिक अफसरों को लिखकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। खड़ौली कट को लेकर जो कार्रवाई यहां कट ओपन करने के वालों पर सीधे कार्रवाई करनी चाहिए थी। कट को हटाने वालों का पता नहीं कहकर आखिर इस पूरे मामले पर लीपापोती की जा रही है।

ऐसा तब है जब यहां पर पुलिस चौकी मौजूद है। पुलिस कर्मी 24 घंटे यहां पर तैनात रहते हैं, मगर बंद कट को खोलने वालों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। पत्र व्यवहार करने का मतलब है कि इस मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। इसमें लापरवाही लोगों की जान भी ले सकती है। क्योंकि खड़ौली कट बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

उच्च अधिकारियों को भेजा पत्र
एनएचएआई के परियोजना निदेशक डीके चतुर्वेदी का कहना है कि खड़ौली मार्ग पर अवैध रूप से स्थानीय लोगों द्वारा जबरन कट खोला गया है। इस कट को एनएचएआई द्वारा नही खुलवाया गया है। इसे बंद कराने के लिए पुलिस की मदद की मांग की गई है। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर भेजा गया है।

यहां खुले हैं अवैध कट

  • खड़ौली चौराहे पर
  • मेरठ वन कालोनी के सामने
  • सिवाया गांव के सामने
  • चौहान मार्केट के सामने

कई बार बंद कराए अवैध कट
Vaibhav
क्यूब हाइवे कंपनी के डायरेक्टर वैभव शर्मा का कहना है कि टोलवे कंपनी द्वारा जहां अवैध रूप से कट खुले हुए हैं। उन्हे कई बार बंद करा दिया है, लेकिन स्थानीय लोग बार-बार इन्हे खोल लेते है। जिसके चलते यहां दुर्घटनाए बढ़ जाती है और जाम की समस्या उत्पन हो जाती है। इन कटों को बंद कराने के लिए जनपद के पुलिस प्रशासन को पत्र लिखा गया है। जिसमें मांग कि गई है कि इन कटों को बंद कराया जाए।

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