जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मोदीपुरम में इस बार आलू की खेती वेस्ट यूपी में किसान बड़ी तादाद में कर रहे है। पांच नवंबर तक आलू की फसल की बुवाई करने का समय है। अच्छी किस्म की प्रजाति लगाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। सरदार पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के प्रो. डा. आरएस सेंगर का कहना है कि आलू की बुवाई का सही समय आ गया है। किसान खेत को तैयार कर बुवाई करें। वैज्ञािनक तरीके से बुवाई कर उत्पादन में भी अच्छा लाभ ले सकते हैं।

खेत की करे गहरी जुताई
मिट्टी जनित रोगों व चिस्थायी खरपतवारों के प्रकोप को कम करने लिए दो-तीन बार खेत की गहरी जुताई करें। खेत की पलेवा आलू की बिजाई से पांच से सात दिन पहले करना लाभकारी है। ऐसा करने से अंकुरण जल्दी व एक समान होता है। इससे पहले समतल खेत की एक गहरी जुताई करें। इसके बाद 15 से 20 सेमी की गहराई तक दो से तीन बार हैरों या तीन से चार बार कल्टीवेटर से जुताई करके खेत अच्छी तरह तैयार करें तथा एक या दो बार पाटा लगा दें।
उत्पादन संस्था से लेकर ही बीज लगाए
आलू का बीज हमेशा विश्वनीय संस्थाओं या सरकारी बीज उत्पादन संस्था से ही लेकर लगाएं। हर तीन चार वर्षो के बाद आलू का बीज बदलना फायदेमंद रहता है। बीजों के लिए अच्छी तरीके से अंकुरित 30.50 ग्राम भार वाले बीज आलू सर्वेश्रेष्ठ है। बिजाई से कम से कम 10 दिन पहले बीज आलू को शीत भंडार से निकाल लें।
इस बात का विशेष ध्यान देना जरुरी है कि तापमान की अधिकता के कारण सड़ने का अंदेशा रहता है। अंकुरण के लिए बीज को किसी छायादार ठंडे स्थान में पतली तह में फैला दें। सड़े गले व बिना अंकुरण वाले कंदों को छांटकर अलग कर दें। बीज के अंकुर टूटने से बचाने के लिए अंकुरित बीज खेत तक ले जाने के लिए लकड़ी या प्लास्टिक की ट्रे या टोकरी आदि काम में लाएं।
10 से 12 दिन के बाद करें सिंचाई
पहली सिंचाई बिजाई के 10 से 12 दिन के बाद करें। यदि पलेवा नहीं की गई है तो बिजाई के तुरंत बाद अथवा अगले दिन सिंचाई कर दें। बाद की सिंचाई 10 से 15 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए। सिंचाई करते समय इस बात का ध्यान रखें कि गूल दो तिहाई से ज्यादा पानी में न डूबे। खुदाई के 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें।
70 दिन बाद करें फसल की खुदाई
अगेती फसल की 65 से 70 दिन बाद भी फसल की खुदाई की जा सकती है। मुख्य फसल में खुदाई के बाद आलू को किसी छायादार स्थान पर 10 से 15 दिन तक ढेरी में रखें। ढेर की ऊंचाई 15 मीटर तथा चौड़ाई चार से पांच मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। खुदाई तथा भंडारण का कार्य दिन के अधिकतम तापमान 30 डिग्री होने से पहले निपटा लेना चाहिए। खुदाई के समय बाजार भाव को देखते हुए उचित रेट पर आलू की कुछ मात्रा की बिक्री की जा सकती है।

