- प्रथम दृष्टता मामले में लिपिक की घोर लापरवाही हुई उजागर
- लिपिक ने मामले को दबाने के लिये लगा दिया था ऐड़ी चोटी तक का जोर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में एक के बाद एक मामले में भ्रष्टाचार के मजबूत गठजोड़ के मामले सामने आ रहे हैं। उसके बावजूद कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों की कार्य प्रणाली में सुधार होता दिखाई नहीं पड़ रहा है। एक स्थाई कर्मचारी के नाम से जो शिकायती पत्र जनसुनवाई के दौरान नगरायुक्त को दिया गया था,
जिसमें उसने शिकायती पत्र में कहा कि साहब! मेरे रिटायरमेंट की तिथि बीत गई, लेकिन एक लिपिक की लापरवाही से उसको जानकारी तक नहीं हो सकी। मामला गुपचुप तरीके से चल रहा था। मामला ‘जनवाणी’ तक पहुंचा तो इस मामले की तह तक जाने का प्रयास किया। संबंधित लिपिक ने पहले तो गोलमोल जवाब देने का प्रयास किया, लेकिन फिर सच्चाई सामने आ गई।
दरअसल, नगर निगम में सेटिंग का खेल चल रहा हैं, जिसकी सेटिंग हैं, फिर कुछ भी संभव हैं। पीड़ित को नियमानुसार कार्य कराने के लिये ऐड़ी चोटी तक का जोर लगाना पड़ता है, जो सामान्य शिकायतकर्ता अपनी शिकायत लेकर उसका समाधान कराने के लिये निगम में शिकायती पत्र दिये हैं। उनको जांच के नाम पर टरकाना आम बात हैं। सेटिंग है तो काम होगा, अन्यथा नहीं।
यदि कोई शिकायतकर्ता उनके सेटिंग के खेल में नहीं फंसता तो उसे निगम के हजार चक्कर काटने के बाद भी न्याय नहीं मिलता। कुछ लोगों का कहना है कि सामान्य व्यक्ति को तो छोड़िये साहब! यहां पर तो कर्मचारी को अपना हक लेने के लिये ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगाना पड़ता है, जिसमें निगम के गाड़ी चालक गफ्फार का मामला हो या अन्य कुछ कर्मचारियों का।

गफ्फार ने जनसुनवाई में शिकायती पत्र दिया था, जिसमें उसने बताया था कि 15 वर्षों में उसे मात्र एक बार ही वेतन मिला और उसके बाद वह अपने परिवार के साथ जैसे-तैसे गुजर बसर कर रहा है। खबर प्रकाशित हुई तो उसके द्वारा मीडिया से दूरी बना ली और अधिकारियों एवं कुछ कर्मचारियों ने मीडिया के सामने नहीं आने की शर्त पर मदद करने का आश्वासन दिया। वहीं, जनसुनवाई के दौरान दिये गये शिकायती पत्र पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी।
फिलहाल वह हर रोज न जाने कितने चक्कर निगम के अधिकारियों के काट रहा है, लेकिन उसे अभी तक सफलता नहीं मिली। दूसरा मामला कुछ इसी तरह का 31 मार्च 2023 को सेवानिवृत्त हुये स्थाई सफाई कर्मचारियों से जुड़ा है। 31 मार्च को 11 सफाई कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने पर नगर निगम में विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसकी सूचना विधिवत रूप से निगम द्वारा गई।
इसमें एक शिकायती पत्र मंगलदिवस में होने वाली जनसुनवाई में पहुंचा और उसको निगम कार्यालय में रिसीव भी कराया गया। शिकायती पत्र देने वाले ने वार्ड-58 सूरजकुंड जोन में स्थाई सफाई कर्मचारी बताते हुये लिपिक प्रदीप कुमार के नाम से शिकायत की और उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरोप लगाया कि उसका रिटायरमेंट 31 मार्च को होना था, लेकिन लिपिक की लापरवाही के कारण नहीं हो सका।
यह मामला किसी तरह से यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल पत्र के माध्यम से दैनिक जनवाणी तक पहुंचा कि निगम में मजबूत भ्रष्टाचार के गठजोड़ के चलते एक स्थाई सफाई कर्मचारी परेशान है। ‘जनवाणी’ ने मामले की पड़ताल शुरू की तो शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं हो सका कि उसका शिकायती पत्र पर मोबाइल नंबर नहीं था। संबंधित जोन के लिपिक प्रदीप से बात की गई तो उसने बताया कि 400 कर्मचारी हैं।
वह मौखिक जानकारी नहीं दे सकता। उसके बाद लिपिक के द्वारा मामला मीडिया में न आये उसके लिये तमाम प्रयास किये, लेकिन मामला सोशल मीडिया पर पत्र वायरल के आधार पर प्रकाशित किया। उसके बाद गुरुवार को लिपिक प्रदीप से संपर्क किया तो उसने गोलमोल जवाब देना शुरू कर दिया। बताया कि वह उक्त नाम के व्यक्ति को जानता नहीं,कभी वह व्यक्ति हस्ताक्षर करता है, लिखना नहीं जानता शिकायत फर्जी है। मामला शुक्रवार को फिर से छपा तो निगम के आला अधिकारियों ने संज्ञान लिया।
जिसमें लिपिक प्रदीप उक्त नाम के स्थाई सफाई कर्मचारी श्यामलाल पुत्र ननका की फाइल लेकर पहुंचा तो उस समय जनवाणी के संवाददाता व अन्य कुछ व्यक्ति प्रभारी मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. हरपाल के कार्यालय में बैठे थे, जिसके बाद लिपिक के हाथ में श्यामलाल के नाम की जो फाइल थी। उसने कार्यालय में दी तो वह हक्का-बक्का रह गया। कि जिस फाइल को वह दबाये बैठा था वह मीडिया के सामने आखिरकार आ ही गई।
मामला बेहद गंभीर है। जिस स्थाई सफाई कर्मचारी का 31 मार्च को रिटायरमेंट होना था, लेकिन उसे पता तक नहीं है। मामले में प्रथम दृष्टता लिपिक प्रदीप की लापरवाही जो सामने आई है।
उससे इस संबंध में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है, जवाब मिलते ही उस पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। -डा. हरपाल सिंह प्रभारी स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी नगर निगम मेरठ।


