Wednesday, April 22, 2026
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गठबंधन वोटरों को रास नहीं आया आसपा प्रत्याशी

  • भोकरहेड़ी में हासिल कर पाया केवल 177 वोट

  • निर्दलीय प्रत्याशी के खेमे में पहुंचा गठबंधन वोटर

जनवाणी संवाददाता |

मोरना: जनपद की एक मात्र सीट पर चुनाव लड़ रहा आसपा प्रत्याशी गठबंधन के वोटरों को रास नहीं आया और उन्होंने इस प्रत्याशी को पूरी तरह से नकार दिया। आसपा प्रत्याशी इस सीट पर केवल 177 वोट हासिल करने में कामयाब रहा। गठबंधन नेताओं द्वारा भी इस प्रत्याशी के चुनाव को लेकर कोई खास उत्साह नहीं दिखाया गया, जिसके चलते वोटरों में भी उत्साह नहीं रहा। इस प्रत्याशी की हार के बाद आसपा कार्यकर्ताओं में मायूसी है।

बता दें कि जनपद की खतौली सीट पर हुए उपचुनाव के दौरान आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर रावण द्वारा सपा व रालोद के साथ गठबंधन कर लिया गया था। खतौली उपचुनाव में चन्द्रशेखर रावण ने पूरी ताकत झोंक दी थी और परिणामस्वरूप उनके कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत व लगन के साथ गठबंधन प्रत्याशी को जीत दिलाने का काम किया था। खतौली विधायक बने मदन भैया भी जीत के तुरन्त बाद चन्द्रशेखर रावण का धन्यवाद करने के लिए पहुंचे थे।

खतौली उपचुनाव से पहले आजाद समाज पार्टी अपने दाम पर जिला पंचायत के सदस्यों के लिए चुनाव लड़ी थी ओर कई सदस्यों को जिताने में कामयाब भी रही थी। नगर निकाय चुनाव आये, तो यह गठबंधन यहां भी जारी रहा। गठबंधन के चलते मुजफ्फरनगर की भोकरहेड़ी नगर पंचायत सीट आजाद समाज पार्टी के हिस्से में आयी थी, जहां से मीना देवी पत्नी कविन्द्र को गठबंधन प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया गया। मीना देवी इस चुनाव में कुछ खास नहीं कर पायी और बुरी तरह से चुनाव हार गयी। मीना देवी को इस चुनाव में केवल 177 वोट ही मिल पाये हैं, जिसके चलते गठबंधन को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गये हैं।

ये हैं भोकरहेड़ी के जातीय समीकरण

भोकरहेड़ी की नगर पंचायत की यदि बात की जाये, तो इस सीट पर गठबंधन का पारम्परिक वोट बैंक यहां पर पर्याप्त है और वह इस स्थिति में है कि वह अपने दम पर अपने प्रत्याशी को चुनाव जिता सकता है। इस सीट पर कुल 15337 वोट हैं, जिनमें से दलितों के 3250 वोट, मुस्लिमों के 5000 वोट व जाटों के 4500 वोट हैं। दलित वोट बैंक हालांकि बसपा का वोट बैंक माना जाता है, परन्तु दलितों से काफी लोग अब आसपा में अपना विश्वास जताने लगे हैं।

मुस्लिम वोट बैंक को सपा का पारम्परिक वोट बैंक कहा जाता है, जबकि जाटों को रालोद का पारम्पिरिक वोट बैंक माना जाता है। यदि तीनों को जोड़ लिया जाये, तो इस सीट पर गठबंधन का वोटबैंक 12750 है, जो कुल वोटरों का एक तिहाई वोट बैंक है। इस चुनाव की बात की जाये, तो इसमें दलितों के लगभग 2400 वोट, मुस्लिामें के 3800 वोट व जाटों के 3500 वोट डले थे। यदि इन वोटों का 30 प्रतिशत भी गठबंधन प्रत्याशी को मिल जाता, तो शायह वह जीत का स्वाद चख सकता था, परन्तु माÞत्र 177 वोट मिलने गठबंधन धर्म पर सवाल उठा रहा है।

किस प्रत्याशी को कितने मिले वोट

भोकरहेड़ी नगर पंचायत पर कुल 18 प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया था, जिनमें भाजपा की संतोष को 2586 मत मिले। बसपा की सुरोज बाला को 491 मत मिले और आजाद समाज पार्टी की मीना केवल 177 मत ही प्राप्त कर पाई। इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों में ओमकारी को 21, केला देवी को 40, चमनो को 13, निरुपा को 82, पूजा महिपाल को 993, बाला देवी को 18, राजकली को 36, रीटा देवी को 110, लोकेश को 102, बिमलेश को 52, सरला को 3181, सरला रविदत्त को 61, सीता को 35, सुनीता पंखा को 20 व सुनीता हल को 2741 मत मिले। यहां पर निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा रहा और निर्दलीय प्रत्याशी सरला 3181 मत पाकर 440 वोट से विजयी रही।

दूसरे नम्बर पर रही निर्दलीय प्रत्याशी सुनीता ने भी 2741 मत प्राप्त किये, जबकि भाजपा प्रत्याशी 2586 मत ही हासिल कर पाई। यहां 23 लोगों ने नोटा को चुना, जबकि 538 वोट निरस्त हुए। देखने वाली बात यह है कि गठबंधन का जादू इस चुनाव में कहीं भी नजर नहीं आया। यदि गठबंधन वोट बैंक गठबंधन धर्म निभाते हुए आजाद समाज पार्टी की प्रत्याशी को मिल जाता, तो उसकी ऐतिहासिक जीत हो जाती। इस नगर पंचायत पर आजाद समाज पार्टी को इतनी कम संख्या में वोट मिलने से पार्टी के प्रत्याशियों में मायूसी है।

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