
मित्र ऐसा मोती है, जिसे गहरे सागर में डूबकर ही पाया जा सकता है। सच्ची मित्रता जीवन का वरदान है। एक सच्चा मित्र मिलना सौभाग्य की बात होती है। सच्चा मित्र मनुष्य की सोयी किस्मत को जगा सकता है और भटके को सही राह दिखा सकता है। तिरुवल्लुवर ने कहा था- ‘जो तुम्हें बुराई से बचाता है, नेक राह पर चलाता है और जो मुसीबत के समय तुम्हारा साथ देता है, बस वही मित्र है।’ सच कहें तो मित्रता दो हृदयों को बांधनेवाली प्रेम की डोर होती है। मित्रता वह बंधन है जो दो समान विचारों वालों को परस्पर साथ ला देता है। एक दूसरे के सुख-दु:ख का साथी बना देता है। भर्तृहरि ने कहा है कि जो सुख तथा दु:ख में साथ दे तथा समान क्रियावाला हो, उसे मित्र कहते हैं।