- बकायेदारों से रेवेन्यू वसूली के लिए पीवीएनएल के अभियान के संकेत
- रिकवरी में पिछले साल के मुकाबले 25 % बढ़ोतरी के लिए मेरठ समेत सभी 14 जनपदों में अभियान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: यदि बिल नहीं भरा तो घर हो या दफ्तर बिजली का फ्यूज उड़ जाएगा और आप अंधेर में ही बैठोगे। दरअसल, रेवेनयू कलेक्शन खासतौर से बकायेदारों से पीवीएनएल के निपटने के अंदाज में अभियान की आहट सुनाई दे रही है। मंगलवार को लखनऊ में हुई बैठक में इस तरह के अभियान पर मोहर लग गयी है।
हालांकि इस अभियान को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या बड़े बकायेदारों खासतौर से सरकारी महकमों पर जो अकेले मेरठ में जो लगभग 64 करोड़ का बकाया है उसकी भी वसूली की जाएगी या फिर रेवेन्यू रिकबरी अभियान केवल मीडियम क्लास या गरीब बकायेदारों का ही फ्यूज उड़ाएगा।
नहीं दिखाई दिलचस्पी
एकमुश्त समाधान योजना के माध्यम से भी उपभोक्ताओं से बिल जमा कराने की अपील की गई थी। यही नहीं, पहली बार ऐसा हुआ था कि उपभोक्ता 6 और 10 किस्तों के माध्यम से भी अपना बकाया जमा कर सकते थे। इसमें 100 फीसदी तक सरचार्ज में छूट प्रदान की गयी थी। बावजूद इसके बड़े बकायेदारों ने बिल जमा नहीं कराया।
सवाल भी कम नहीं
बकायेदारों से वसली व रेवेन्यू जेनरेट करने के नाम पर जो अभियान पहले चलाए गए हैं और जिन नए अभियानों की आहट सुनाई दे रही है उसको लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और आगे भी सवाल ना उठे इसकी कोई गारंटी नहीं। दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि पीवीएनएल के कर्मचारी उन घरों के बिजली कनेक्शन काट रहे हैं, जिन पर विभाग का 10,000 या उससे ज्यादा बकाया हो गया है। जबकि सरकारी विभागों के लिए कोई सख्ती नहीं की जा रही है। सख्ती तो दूर विभाग यहां से करोड़ों की बड़ी वसूली के लिए कोई विशेष अभियान छेड़ता हुआ नजर भी नहीं आ रहा है।

आम उपभोक्ताओं पर करीब 30 करोड़ रुपये की राशि बकाया हो गई है, जिसे वसूलने के लिए विभाग ने विशेष अभियान छेड़ा है। जिन घरों में बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं, वो लोग बिजली विभाग के चक्कर लगाकर वापस बिजली बहाल करवाने के लिए परेशान हो रहे हैं। ऐसे उपभोक्तओं का सीधा आरोप है कि विभाग बड़ी बकायेदारों को छोड़कर मामूली लोगों को बगैर टाइम दिए इस तरह की कार्रवाई कर रहा है।
मेरठियों पर 64 का बकाया
पीवीएनएल का जनपद के उपभोक्ताओं पर करीब 64 करोड़ रुपए बकाया हैं। आम और खास यानि सरकारी महकमों में अंतर है। सरकारी महकमों पर 11.91 करोड का बकाया है। इनमें मेरठ में पुलिस महकमे पर सबसे ज्यादा बिजली का बिल बकाया, अकेले खाकी पर 5.90 करोड़, शिक्षा विभाग पर 2.14 करोड़, कृषि विभाग पर 12 करोड़, स्वास्थ्य/चिकित्सा विभाग पर 2 करोड़, जिला कारागार पर 46 लाख, कृषि/दुग्ध 31.19 लाख, पंचायती राज विभाग 24.20 लाख, आबकारी 14 लाख, सिंचाई 7.59 लाख बकाया है। भुगतान न होने के कारण यह रकम बढ़ती ही जा रही है।
10 हजार करोड़ से ज्यादा का है बकाया
पश्चिमांचल से संबंधित सूत्रों की मानें तो 14 जिलों में उपभोक्ताओं पर 10 हजार करोड़ से ज्यादा बकाया है। इसमें मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बागपत, अमरोहा, रामपुर, मुरादाबाद, हापुड़, नोएडा सहित 14 जिले शामिल हैं। इतनी बड़ी रकम की वसूली के लिए संगठित स्तर पर अभियान की तैयारी है। दरअसल, पीवीएनएल अफसरों का कहना है कि बिजली कैश में खरीदनी पड़ती है और यह काम डे बाई डे होता है। इसलिए शत प्रतिशत रिकबरी जरूरी है।
डोर-टू-डोर कनेक्शन काट रहा विभाग
बिजली विभाग द्वारा बकायेदारों की एक लिस्ट बनाई गई है। विभाग की ओर से सभी को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस के बावजूद जो उपभोक्ता बिल नहीं जमा करेगा। ऐसे बकायेदारों को चिन्हित कर डोर-टू-डोर कनेक्शन काटे जाएंगे।
स्कीमों के बाद भी हालात बद से बदतर
दरअसल शासन के निर्देश पर पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा अनेकों स्कीम चलाई गई, ताकि जिन उपभोक्ताओं का बिजली बिक बकाया है, वह अपना बिल जमा कर दें। हालांकि देखा जा रहा है कि काफी ऐसे बड़े उपभोक्ता हैं, जिन्होंने अपना बकाया बिल जमा नहीं किया है.
लिहाजा बिजली विभाग ने ऐसे उपभोक्ताओं पर अब शिकंजा कसने की कवायद शुरू करेगा। इसके लिए नई रणनीति तैयार की जा रही है। वहीं, इस संबंध में चीफ इंजीनियर अनुराग अग्रवाल ने बताया कि 25 फीसदी रेवेन्यू बढ़ाए जाने के निर्देश आज मंगलवार को लखनऊ में हुई बैठक में दिए गए हैं।
पीवीएनएल के सरकारी कर्जदार महकमे
- गृह विभाग पुलिस 4.5 करोड़
- चिकित्सा शिक्षा विभाग 4 करोड़
- कृषि पंचायत राज विभाग 4.5 करोड़
- बाकी अन्य 36 सरकारी विभागों पर कुल 18 करोड़
- सूत्रों ने बताया कि अन्य 36 सरकारी विभागों कुल लगभग 18 करोड़ का बकाया है। उन्होंने समय से बिजली के बिलों का भुगतान नहीं किया है। मार्च 2022 के बाद से भुगतान की व्यवस्था बदलने के बाद से ही लगातार विभागों को लिखा जा रहा है, लेकिन अब तक बकाया की समस्या बनी हुई है। हालांकि सामान्य उपभोक्तओं से की जा रही वसूली पर वह यही बोले कि सामान्य कंज्यूमरों से विभाग को 30 करोड़ वसूलने हैं।
एमडी पावर की पहल का दिखाई देने लगा असर
मेरठ: एमडी पश्चिमांचल के प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। प्रबंध निदेशक चैत्रा वी के निर्देशन में मंगलवार सुबह 10 बजे से दोहपर 12 बजे तक ऊर्जा भवन मुख्यालय में संभव कार्यक्रम के तहत जन सुनवाई आयोजित हुई। पीवीएनएल पीआरओ एसके सिंह ने बताया कि जन सुनवाई में विद्युत संयोजन निजी नलकूप एवं विद्युत चोरी से संबंधित पांचआवेदन जनपद मेरठ व हापुड़ से प्राप्त हुए जिनमें से दो शिकायतों का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। शेष शिकायतों के निस्तरण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए।
संंभव कार्यक्रम के अंतर्गत 4 सितंबर को समस्त 33/11 केबी उपकेंद्रों पर प्रात दस बजे से दोपहर 12 बजे तक उपखंड अधिकारी, अवर अभियंता द्वारा एक बजे से तीन बजे तक वितरण खंडों में अधिशासी अभियंताओं द्वारा एवं सांय चार बजे से छह बजे तक मंडल कार्यालयों में अधीक्षण अभियंताओं द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनी गयीं। जिनमें 33/11 केवी उपकेंद्रों वितरण खंडों एवं मंडल कार्यालयों में कुल 6163 शिकायतें प्राप्त हुर्इं। जिनमेंं से 6103 शिकायतों का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया।

