- उसकी ही किस्त हो रही पास, जिसकी वोट का मिलेगा साथ
- नये आवेदनों के लग रहे हैं ढेर, नहीं हो रही है कोई सुनवाई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जब सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी में पार्टी विशेष से प्रभावित होकर कार्य करेंगे और आदर्श आचार चुनाव संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए पार्टी विश्ोष का नाम लेकर उसकी उपलब्धियां गिनायेंगे। यहां तक कि सरकारी योजना से लाभान्वित लोगों को यह भी सलाह दी जायेगी कि अमुक पार्टी के नेता की बदौलत ही तुम्हें छत नसीब हो रही है। फिर उसी पार्टी के नेता को वोट देने की अपील भी की जायेगी तो फिर मतदाता का प्रभावित होना लाजिमी है।
कुछ ऐसा ही कारनामा इन दिनों जिला नगरीय विकास अभिकरण डूडा के अधिकारियों व स्टाफ के माध्यम से किया जा रहा है। पीएम आवास योजना का सर्वे कर रही टीमें शहर में खुलेआम पार्टी विशेष का प्रचार कर रही हैं। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वे के नाम पर खुलेआम पार्टी विशेष का नाम लेकर उसकी उपलब्धियां भी गिनाई जा रही हैं। अपने नगर निगम के जिम्मे शहर का रखरखाव करना है।
नगर निगम शहर की सड़कें, पार्क, पर्याप्त रोशनी, पार्क आदि की व्यवस्था करना नगर निगम के जिम्मे है। इसके लिए नगर निगम बाकायदा हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, सीवर टैक्स और सफाई टैक्स वसूलता है। साथ ही नागरिकों के पार्कों का रखखाव व निर्माण कराना भी नगर निगम के जिम्मे है। नगर निगम के अन्तर्गत ही डूडा को भी शहर में कार्य करने होते हैं।
गरीबों को आवास बनाने की योजना
सरकार ने ऐसे शहरी लोगों को सहूलियत देते हुए योजना शुरू की है, जिनके पास जमीन तो है, लेकिन मकान बनवाने के लिए धन नहीं है। इसके अलावा झोपड़पट्टी, कच्चे और टूटे-फूटे मकानों में रहने वाले लोग भी नए मकान का सपना हक के साथ देख सकेंगे। उन्हें यह हक दिलाने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना लेकर आई है। इसकी खासियत यह है आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तीन लाख रुपये वार्षिक आय वाले परिवारों को इसमें पात्र माना जाएगा, जबकि इससे पहले की योजनाओं में आय सीमा काफी कम रहती थी। इसके चलते तमाम लोग योजनाओं का लाभ मिलने से वंचित रह जाते थे।
इस तरह होता है धनराशि का आवंटन
मकान बनाने के लिए अब केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत अनुदान दे रही है। इससे पहले 50- 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी तय हुई थी लेकिन बाद में इसे संशोधित कर दिया गया। इस योजना में बनने वाले प्रति मकान की लागत करीब 3.49 लाख रुपये तय की गई है। इसमें से करीब 1.5 लाख केंद्र और 1 लाख रुपये राज्य सरकार अनुदान के रूप में देगी।

योजना में पात्र परिवारों को 30 वर्ग मीटर की जमीन पर मकान के निर्माण को ढाई लाख रुपये की मदद दी जाती है। शेष खर्च लाभार्थी को उठाना होगा। स्थानीय स्तर पर जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) को योजना की जिम्मेदारी दी गई है, जो आवेदन पत्र प्राप्त होने पर जांच आदि कराकर एकीकृत शहरी आवास परियोजना तैयार करेगा। मकान शहर के मानकों के अनुरूप बनाए जाएंगे।
चुनाव में लाभ लेने के लिए बनाई रणनीति
राज्य सरकार के इस रवैये पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने उसे कई पत्र लिखे। इसके बावजूद योजना ने गति नहीं पकड़ी। अब इसी वर्ष अप्रैल माह में लोकसभा चुनाव को देखते हुए केन्द्र व प्रदेश की भाजपा सरकारें चाहती हैं कि प्रधानमंत्री के नाम पर गरीबों के लिए शुरू हुई आवासीय योजना में इसी नीति के तहत कार्य किया जाये।
शहर में पीएम आवास योजना के लिए लगी 50 टीमें
सालाना तीन लाख से कम आय वाले शहर वासियों के लिए शुरू की गई इस योजना में बनने वाले मकानों का निर्माण लाभार्थी को खुद कराना है। केन्द्र और राज्य सरकार सिर्फ अनुदान देंगी। मकान बनाने के लिए करीब 30 लाख लोगों ने आवेदन कर रखे हैं। शासन के निर्देश पर इन दिनों नगर निगम और डूडा की टीमें सर्वे के लिए लगाई गई हैं। टीम के पास पूरे नगर की अलग-अलग क्षेत्रों की सूचियां सौंपी गई हैं। सर्वे के लिए पहुंचने वाली टीमें जहां भी जा रही हैं, वहां वह यह बताने में बिल्कुल भी संकोच नहीं कर रही हैं कि यह पीएम आवासीय योजना में उनका चयन हो रहा है
तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बदौलत ही गरीबों के लिए यह कार्य संभव हो सका है। सर्वे करने वालो को खास तौर पर यह बात समझाई गई है कि लोगों को किस तरह से पीएम आवास योजना के बारे में समझाना है। और उन्हें यह भी समझाना है कि उनका फार्म सबमिट होने के बाद भी यदि किसी कारणवश नंबर नहीं आ पाता है तो अगली बार सरकार बनने पर पहले इसी सर्वे वाले फार्म पर ही क्रियान्वयन किया जायेगा।
गरीब को मकान मिलना उसका अधिकार: फजल करीम
आॅल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के पार्षद फजल करीम का कहना है कि नगर निगम सीमा में रहने वाले हर गरीब को मकान बनवाकर देना प्रदेश और केन्द्र सरकार की जिम्मेदारी है। यह आजादी के बाद से हो रहा है। लेकिन वर्तमान में गरीबों की वोट हासिल करने के लिए यह ओछी हरकतें की जा रही हैं। हमने अपनी एआईएमआईएम की पार्षदों व नगर कमेटी की टीम को सक्रिय कर रखा है तथा नागरिकों से भी हमने कह रखा है कि यदि मकान सर्वे के लिए आने वाला कोई भी व्यक्ति वोट के लिए किसी नेता की पैरवी करे तो हमें तत्काल खबर दें। हम उस व्यक्ति को खुद ही पकड़कर जेल भिजवायेंगे।
सात माह में 90 करोड़ का कराया भुगतान: डूडा पीओ
जिला नगरीय विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी हर्ष अरविन्द इस बात से साफ इंकार करते हैं कि सर्वे करने वाले डूडा के कोई भी सदस्य किसी पार्टी विशेष का प्रचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि महज सात माह के कार्यकाल में उन्होंने 90 करोड़ रूपये की धनराशि गरीबों को उनके आवास योजना के लिए आवंटित कराई है। यह डूडा का अब तक का सर्वाधिक धनराशि आवंटन का रिकार्ड है। उनका कहना है कि यदि किसी के पास साक्ष्य हो तो वह उनसे सीधे मिले। दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी।

