- ठगी की तहरीर की रिसीव देने के तीन साल बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: साइबर सेल की कारगुजारी का खामियाजा सदर बाजार के एक व्यापारी को भुगतना पड़ रहा है। अपने साथ हुए एक फ्रॉड की शिकायत करने के बाद भी व्यापारी को मदद नहीं मिली। अब जब तीन वर्ष बीत गये तो क्रेडिट कार्ड यूनिट फोन कर मानसिक उत्पीड़न कर रही है और सेटलमेंट का दबाव बना रही है। चौकाने वाली बात यह है कि शिकायत रिसीव होने के तीन साल में भी मुकदमा पंजीकृत नहीं हुआ।
मोदीपुरम निवासी अमित गोयल का सदर बाजार इलाके में जनरल स्टोर है। अमित ने बताया कि वर्ष 2021 में उन्होंने एसबीआई के क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया। जनवरी में क्रेडिट कार्ड बनकर आ गया। कुछ समय बाद उन्होंने देखा कि क्रेडिट कार्ड में 5500 रुपये का अतिरिक्त चार्ज लगाया गया है। अमित का कहना है कि उन्होंने शिकायत दर्ज कराने के लिए गूगल से टोल फ्री नंबर निकाला और उस पर कस्टमर केयर पर बात की। कस्टमर केयर की साइड से एक लड़की ने उनसे बात की और धोखे से उनके मोबाइल पर आया ओटीपी प्राप्त कर 85 हजार की ठगी कर दी।
वह तभी साइबर सेल पहुंचे और लिखित शिकायत की। उन्हें शिकायत रिसीव करके दी गई। करीब दो माह उन्होंने चक्कर काटे। हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर लौटा दिया गया। बाद में साइबर सेल के कर्मचारियों ने ठगे गये रुपये वापस दिलाने से हाथ खड़े कर दिये। अमित ने उनसे कहा कि कम से कम उनका मुकदमा तो पंजीकृत करा दें। साइबर सेल के कर्मचारी ने 10 दिन बाद संबंधित थाने जाकर एफआईआर की कॉपी लेने की बात कहकर अमित को चलता कर दिया।
तीन साल बाद मानसिक उत्पीड़न
अमित का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने ध्यान नहीं दिया। बैंक की तरफ से भी कोई फोन नहीं आया तो वह समझ गये कि साइबर ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से उनके पास क्रेडिट कार्ड यूनिट फोन कर 1.65 लाख रुपये जमा कराने का दबाव बनाने लगी। परेशान होकर वह साइबर सेल पहुंचे तो पता चला कि साइबर सेल की कोई रिपोर्ट थाने नहीं पहुंची और इस कारण उनका मुकदमा भी दर्ज नहीं हुआ।
दिनभर बहाली के लिए जुगाड़ तलाशते रहे निलंबित कर्मचारी
फलावदा: ईवीएम ड्यूटी के दौरान जाम शराब पीकर मारपीट करने के मामले में निलंबित किए गए कर्मचारी अपनी बहाली के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर मेडिकल मुआयना नही हो पाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में पहुंच गया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में सेक्टर मजिस्ट्रेट को ईवीएम उपलब्ध कराने की ड्यूटी में तैनात किए गए नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा शराब पीकर आपस में मारपीट किए जाने के मामले में निलंबित कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
बताया गया है कि शहर के सकेत मेरठ स्थित आईटीआई में तैनात किए गए फलावदा नगर पंचायत के कई कर्मचारी फलावदा से ही मदिरापान करके रवाना हुए थे। गाज गिरने के बाद स्थानीय नगर पंचायत के आरोपी कर्मचारी अपनी बहाली के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं। फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई है। कहा जा रहा है कि रसूखदारी के चलते यह मामला ठंडा बस्ते में पहुंचता जा रहा है। हालांकि नगर पंचायत के ईओ सचिन पवार द्वारा नगर में स्थित स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर आरोपी कर्मचारी का मेडीकल परीक्षण कराने के लिए उन्हें अस्पताल भेजा लेकिन कस्बे में सुविधा न होने के कारण अस्पताल से सभी कर्मचारियों को बैरंग लौटा दिया गया।
तत्पश्चात कर्मचारियों के मेडिकल का मामला ठंडा बस्ते में पहुंचने के कयास लग रहे हैं। दरअसल, शराब पीकर उत्पात मचाने वाले किसी भी कर्मचारी की मेडिकल जांच नहीं कराई गई है। दर्जन भर कर्मचारियों के निलंबन का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

