Tuesday, March 17, 2026
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कर्मचारियों से वेतन वसूली अब बड़ी चुनौती

  • 23 कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले में सीबीसीआईडी ने दर्ज कराया था मुकदमा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में फर्जीवाड़ा कर भर्ती किये गये 23 कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले में सीबीसीआईडी ने मुकदमा तो दर्ज करा दिया है, लेकिन इन कर्मचारियों को दो दशक से ज्यादा समय से दिये गये वेतन व अन्य भत्तों की वसूली अब बड़ी चुनौती बन गई है। वेतन रिलीज करने में शामिल नगर निगम में तैनात रहे तमाम पूर्व व वर्तमान नगर आयुक्तों के साथ-साथ मुख्य नगर लेखा परीक्षक व लेखा नियंत्रक की कर्तव्यनिष्ठा भी संदिग्ध बन गई है।

नगर निगम में फर्जी तरीके से भर्ती हुए 23 कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे. ने इन 23 फर्जी तरीके से भर्ती किये गये कर्मचारियों से जो वित्तीय हानि हुई हैं, उसको लेकर गंभीरता दिखाई हैं। वेतन के रूप में जो वित्तीय क्षति नगर निगम के खजाने को हुई है, उसकी वसूली के आदेश दे दिए हैं। इसका एक पत्र नगर निगम में आॅडिटर एवं लेखा अधिकारी के पास पहुंचा है। इस पत्र ने 23 उन कर्मचारियों की नींद उड़ा दी हैं, जो फर्जी तरीके से नगर निगम में सेवा पा रहे थे। ये सभी संविदा कर्मी थे, जिनको स्थाई कैसे कर दिया गया ?

इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय से इनकी जांच पड़ताल भी कई स्तर से चल रही थी। लेकिन कोई भी जांच पूर्ण नहीं हो सकी। अब सीबीसीआईडी ने खुद ही जब इस मामले में थाना देहली गेट में 23 कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई तो इन सभी फर्जी तरीके से भर्ती किये गये कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर अपर आयुक्त महेंद्र प्रसाद ने हाल ही में एक पत्र नगर निगम नगर आयुक्त डा. अमित पाल शर्मा को लिखा है,

जिसमें कहा गया है कि नगर निगम में आॅडिटर व लेखाधिकारी द्वारा आपत्ति आख्या अनुसार अवैध नियम विरुद्ध नियुक्ति की खुली जांच के मामले में भेजा है। इसी पत्र में फर्जी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों का पूरा कच्चा चिट्ठा दिया गया है। इनमें तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिन्हें दरअसल, 23 कर्मचारी संविदा पर रखे गए थे।

हादसे और मारपीट में उलझा मामला, सेटिंग का आरोप

किठौर: पुश्तैनी कृषिभूमि को कब्जामुक्त कराने का प्रयास कर रहे किसान को विरोधियों ने कार की टक्कर मारकर बाइक से गिराया फिर लाठी-डंडों से पीटकर उसे लहूलुहान कर दिया। सूचना पर पहुंचे परिजन घायल को सरकारी एंबुलेंस से मेडिकल ले गए। जहां उसका उपचार चल रहा है। इस प्रकरण में पुलिस पर आरोपियों से सेटिंग कर लीपापोती के आरोप लग रहे हैं।

ग्राम पंचायत बोंद्रा के नंगला सलेमपुर निवासी हाफिज खलीक दशकों से अपना पैतृक गांव छोड़कर राधना में रहते हैं। नंगला सलेमपुर में उनकी पैतृक कृषिभूमि है। खानदान के अन्य परिवार वहीं रहते हैं। बताया गया कि हाफिज खलीक के चचेरे भाई जाने आलम व मलिक पुत्र औसाफ अपनी पुश्तैनी कृषिभूमि परिवार के ही फरीद, आदिल, तारिक, शहजाद और हसीन पुत्र रईस को बेचकर डासना गाजियाबाद में जा बसे। बताया ये भी गया कि खलीक के चचेरे भाइयों ने गांव की आबादी के निकट करीब तीन बीघा भूमि जो बेची है उसमें खलीक और उसके बहन-भाईयों का भी आधा हिस्सा है।

जिसको के्रता पक्ष रईस आदि ने बेवजह कब्जा रखा है। इसको लेकर पहले भी दोनों पक्षों में विवाद चला। राजस्व टीम ने मौके पर पैमाइश कर दोनों पक्षों को उनके हिस्सों की भूमि सौंप दी। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों पक्षों ने सहमति से मेढ पर खंभे भी गाड़ लिए। मगर कुछ दिन बाद भूमि अदला-बदली को लेकर दोनों पक्षों में पुन: विवाद हुआ और रईस पक्ष ने मेढ के खंभे उखाड़कर पुन: पूरा भू-भाग कब्जा लिया। तब से दोनों में फिर रंजिश हो गई।

परिजनों ने बताया कि गुरुवार सुबह खलीक बाइक से अपने खेत पर काम करने जा रहा था तभी रास्ते में कार में पहले से घात लगाए बैठे रईस और उसके बेटों आदिल, हसीन, तारिक ने खलीक की बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। जिससे वह खेत में गिर गया तत्पश्चात आरोपियों ने खलीक को लाठी-डंडों से पीटकर लहूलुहान कर दिया। पिटाई के दौरान शोर सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामींणों ने पीड़ित के परिजनों व ऐंबुलेंस को फोन किया।

सूचना पर पहुंचे परिजनों ने पुलिस को भी घटनास्थल पर बुलाया। जिसके बाद घायल को एंबुलेंस से 50 शैय्या अस्पताल किठौर ले जाया गया। मगर नाजुक स्थिति के चलते डाक्टरों नें उसे मेडिकल रेफर कर दिया। घायल के एक हाथ व पैर में फ्रैक्चर और शरीर के अन्य भागों पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि मारपीट के तुरंत बाद तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने तीन दिन से रिपोर्ट दर्ज नही की है।

परिजन पुलिस पर आरोपियों से सेटिंग कर मामले में लीपापोती का आरोप लगा रहे हैं। गांव में चर्चा ये भी है कि घटना से एक पूर्व हल्का दारोगा घंटों आरोपी पक्ष के घर पर देखा गया। इस संबंध में इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह का कहना है कि पीड़ित के पुत्र ने 112 पर एक्सीडेंट की सूचना दी थी उसी के आधार पर मुकदमा लिख दिया गया। मारपीट की संभावना कम है फिर भी यदि जांच में आएगा तो मुकदमा मारपीट में तब्दील कर दिया जाएगा।

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