Monday, March 16, 2026
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सालों से प्लांट नहीं हुआ आबाद, पैसा हो रहा बर्बाद

  • अनदेखी की भेंट चढ़ रहा निर्माणाधीन कूड़ा निस्तारण प्लांट
  • तीन साल से अधर में लटका है कूड़ा निस्तारण प्लांट
  • भूमि विवादों में आने के कारण करीब एक करोड़ की हो गई बर्बादी
  • आसपास के लोग धीरे-धीरे प्लांट पर जमा रहे कब्जा

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: नगर को स्वच्छ बनाने का सपना पालिका प्रशासन की आंखों से बाहर नहीं आ रहा है। नगर पालिका के प्रोजेक्ट परवान चढ़ने से पहले विवादों की भेंट चढ़ जाते हैं। झिटकरी रोड पर करीब तीन साल से अधर में लटका कूड़ा निस्तारण प्लांट आबाद नहीं हो पा रहा है। भूमि को लेकर शुरू हुआ विवाद आज तक समाप्त नहीं हो सका है। जिसके चलते प्लांट पर खर्च हुए करीब एक करोड़ रुपये बर्बाद हो रहे हैं।

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निर्माणाधीन प्लांट की बाउंड्री को तोड़कर कब्जा भी शुरू हो गया है। लोगों ने यहां गोबर व अन्य सामान डालकर कब्जा शुरू कर दिया है। समय के साथ अधर में लटका यह प्लांट खुद कूड़ा हो रहा है। जमीन बचाने में नाकाम नगर पालिका प्रशासन मोटी रकम खर्च करके खड़े किए इस प्लांट को भी नहीं बचा पा रहा है। जिसका नतीजा यह है कि आज आबादी के बीच लोग कूड़े के पहाड़ से जूझ रहे हैं।

करीब तीन साल पहले नगर पालिका प्रशासन ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया था। जिसके तहत झिटकरी रोड पर स्थित डंपिंग ग्राउंड को एमआरएफ सेंटर में तब्दील किया जाना था। जिसके लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये के चार टेंडर छोड़े गए थे। प्लांट का आधे से अधिक काम पूरा हो चुका था। तभी इस पर विवाद खड़ा हो गया। कुछ लोगों ने उक्त भूमि को अपनी बताते हुए कोर्ट से स्टे ले लिया। तब से आज तक यह प्लांट आबाद नहीं हो सका है। लचर पैरवी का नतीजा यह है कि नगर पालिका आज तक साबित नहीं कर पाया कि यह भूमि उनकी है।

भूमि को बचाने में नाकाम साबित हो रहा नगर पालिका प्रशासन उस पर बने प्लांट को भी नहीं बचा पा रहा है। अधूरा पड़ा यह प्लांट देखरेख केअभाव में खंडहर हो रहा है। आसपास के लोगों ने यहा गोबर व बिटौरे डालकर कब्जा करना शुरू कर दिया है। आरोपियों ने पूरी बाउंड्री तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दी है। अंदर प्लांट में झाड़ फूंस उग आई है। जिसके चलते जनता के पैसे से बना यह प्लांट खुद कूड़ा हो रहा है। मगर नगर पालिका प्रशासन इस प्लांट को बचाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।

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कुछ दिन पूर्व बची भूमि पर हुआ कब्जे का प्रयास

कूड़ा निस्तारण प्लांट को बचाने में नाकाम नगर पालिका प्रशासन बची भूमि को भी नहीं संभाल पा रहा है। खाली पड़ी बची भूमि पर कुछ दिन पूर्व स्थानीय लोगों ने कब्जा करते हुए निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। भूमि पर काफी निर्माण भी हो चुका था। हालांकि बात में सूचना मिलने पर पालिका टीम निर्माण कार्य रुकवा आई थी।

करीब सवा करोड़ के चार टेंडर

  • कूड़ा निस्तारण प्लांट बनाने के लिए बीएस कांट्रैक्टर बड़ौत की फर्म को रीसाइक्लिंग यूनिट लगाने के लिए 55.71 लाख रुपये का ठेका छोड़ा गया। रनिंग पैमेंट के नाम पर 13 लाख का भुगतान भी हो चुका है।
  • दूसरा ठेका अरुण सोम को दिया गया। एमआरएफ प्लांट यानी मैटेरियल रिकवरी फेसेलिटी का टेंडर 29.68 लाख में छोड़ा गया। सितंबर 2020 में वर्क आॅर्डर जारी हुआ। इसमें भी आंशिक भुगतान के रूप में 11.26 लाख रुपये जारी किए जा चके हैं। इसके अलावा प्लांट पर भराव व सीसी रोड बनाने के लिए 24 लाख का ठेका छूटा था।
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