- अभी तक जनपद में योजना के अंतर्गत करीब 1500 उपभोक्ताओं ने कराया पंजीकरण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अक्षय ऊर्जा का उपयोग करने को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई सोलर रूफटॉप योजना के अंतर्गत जनपद में वर्ष 2027 तक एक लाख घरों का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक जनपद में इस योजना के अंतर्गत करीब 1500 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया है। वहीं बीते वित्तीय वर्ष में सोलर सिटी योजना के अंतर्गत महानगर में 450 स्थानों पर सोलर लाइट लगाने का काम किया गया है।
यूपीनेडा के परियोजना अधिकारी प्रमोद भूषण शर्मा के अनुसार इस योजना के अंतर्गत घरेलू प्रयोग के छतों पर सोलर पैनल लगाने की सुविधा मुहैया कराई जाती है। योजना उन उपभोक्ताओं के लिए हैं, जिनके पास पहले से ही बिजली के कनेक्शन हैं। उनके कनेक्शन की क्षमता के अनुसार ही सोर रूफटॉप प्लांट लगाने का प्रावधान है। जिसके तहत कोई भी नागरिक अपनी छत पर सोलर पैनल लगवा सकते हैं। पैनल लगाने के लिए 10 वर्ग मीटर स्थान में एक किलोवाट का प्लांट लगाया जा सकता है। पैनल का लाभ 25 सालों तक उठाया जाएगा।
सोलर पैनल की लागत लगभग 5-6 सालों में पूरी हो जाती है। जिसके बाद लोग 19 से 20 साल तक मुफ्त बिजली का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना को प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्येक उपभोक्ता को दो किलोवाट तक के प्लांट को लगवाने पर केन्द्र की ओर से 60 हजार और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। करीब दो मेगावाट के सोलर प्लांट लग जाने से अभी तक करीब दो करोड़ रुपये की सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं को मिल चुका है। उन्होंने बताया कि सोलर सिटी योजना में वर्ष 2023-24 के अंतर्गत मेरठ महानगर की सीमा क्षेत्र में 450 सोलर लाइटों को लगाने का काम किया गया है।
पीएम कुसुम सी-2 योजना के अंतर्गत मेरठ जनपद के 61 बिजलीघरों में पृथक कृषक फीडर का सोलराइजेशन करके 222 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। यूपीनेडा के परियोजना प्रभारी प्रमोद भूषण शर्मा के अनुसार छुर में 9.3, भामौरी में 8.7, सीना में 8.4, शाहकुलीपुर में 8.6, कैकवाड़ी में 8.5 मेगावाट के बड़े प्लांट लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए प्रति मेगावाट सोलराइजेशन के लिए चार एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। उन्होंने दावा किया कि दो मेगावाट सोलर प्लंट लगाने के लिए भूमि देने वाले किसान को सामान्य फसल से चार गुना अधिक आय प्राप्त हो सकती है। इसके लिए चिंहित बिजलीघर के 3-4 किमी दायरे तक में आने वाले किसान योजना का लाभ ले सकते हैं।
डेढ़ करोड़ रुपये प्रति मेगावाट मिलेगी सब्सिडी
चिंहित बिजलीघरों के लिए किसान अपनी भूमि अगर रेंट पर देना चाहें, तो उन्हें 50 से 70 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष मिलेंगे। अगर किसान पार्टनर बनना चाहे, तो प्रति मेगावाट सोलर प्लांट में चार करोड़ रुपये निवेश करने होंगे, जिसमें प्रति मेगावाट 1.5 करोड़ रुपये सब्सिडी का भी प्रावधान रखा गया है।

