- निकलते हैं अधिकारी, नहीं पड़तीं निगाहें
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शासन द्वारा छोटे पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए अलग से बजट दिया जाता है, लेकिन वह सभी कागजों में सिमटकर रहे जाते हैं। कोई भी अधिकारी छोटे पार्कों की तरफ निगाह उठाकर तक नहीं देखते हैं। ऐसे शहर के अन्दर अनेक छोटे पार्क बने हैं, इन्हें राहगीरों के आराम करने के लिए बनाया गया, लेकिन ऐसे अधिकतर पार्कों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है।
जलीकोठी का मोड़, मेहताब चौराहा, बेगमपुल पर शास्त्री की मूर्ति व शहर के अन्य कई जगह पर ये पार्क बना हुए हैं, लेकिन अगर अब देखा जाये तो यह पार्क सिर्फ और सिर्फ नाम के लिए ही रह गए हैं। इन पार्कों के अधिकांश हिस्सों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। हैरत की बात तो ये है कि इन जगहों से तमाम अधिकारी रोजाना गुजरते हैं, लेकिन किसी की नजर इन पर नहीं पड़ती है। ऐसे में पार्कों में किसी ने सामान भर रखा है तो किसी ने ठेले लगा लिये हैं। लोगों ने बताया कि यह पार्क पहले साफ-सुथरे रहते थे और क्षेत्र के बुजुर्ग सुबह और शाम इन पार्कों में बैठकर ताजी हवा का आनंद लेते थे,
लेकिन धीरे-धीरे इन पार्कों पर कब्जे होते चले गए। जलीकोठी का मोड़ व तहसील के पास बने पार्क में नेता हकीमुद्दीन मार्ग व उन्ही के नाम पर बने पार्क पर जलीकोठी के कबाड़ियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं पार्क के आसपास व अन्दर कबाड़ का सामान भर रखा है। जबकि इन रास्तों से कई अधिकारियों का रोज निकलना होता है, उसके बाद भी अधिकारी कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।
मेहताब चौराहे पर बने पार्क की दीवार तोड़कर कब्जा कर लिया गया है और अब वहां ठेले लग रहे हैं। बेगमपुल शास्त्री की मूर्ति के चारों तरफ बने पार्क के अंदर देहात से पैंठ में सामान खरीदने आए लोग तेज धूप के चलते पेड़ के नीचे बैठ जाते थे, लेकिन अब दुकानदारों व ठेले वालों ने अवैध कब्जा करके वहां जाने का रास्ता भी बंद कर दिया है।

