- संतों में उबाल, तीन गिरफ्तार, आरोपियों को छुड़ाने को सैकड़ों की भीड़ ने पांच घंटे घेरे रखा थाना लिसाड़ीगेट
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रहलाद नगर में साधुओं की पिटाई का मामला मेरठ से लेकर लखनऊ तक गूंज रहा है। साधुओं की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संतों में भी उबाल है। सबसे ज्यादा नाराज अयोध्या व वृंदावन के संत बताए जाते हैं। भाजपा के कुछ बडेÞ स्थानीय नेताओं ने भी स्वीकार किया कि हां साधुओं की पिटाई से संत समाज में जबरदस्त नाराजगी है।
वहीं, लखनऊ में बैठे प्रशासन व पुलिस के उच्च पदस्थ अफसरों के अलावा भाजपा के नेताओं से संगठन के प्रांत पदाधिकारियों ने जानकारी ली है। मामले की लखनऊ तक गूंज सुनाई देने के बाद यहां पुलिस अधिकारी एकाएक हरकत में आ गए, जिसका नतीजा यह हुआ कि पिटाई की घटना के तीन दिन बाद लिसाड़ीगेट पुलिस ने रविवार सुबह साधुओं से मारपीट के आरोपी बताए जा रहे तीन लोगों पुनीत, निक्की व हिमांशु को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इस मामले की असली मुसीबत प्रहलादनगर निवासी इन तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई।
500 लोगों की भीड़ जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं उन्होंने थाने का घेराव कर दिया। घेराव हंगामा व नारेबाजी करने वाले गिरफ्तार किए गए लोगों को छुड़ाने की मांग कर रहे थे। इन्होंने पांच घंटे तक थाना घेरे रखा। पुलिस ने बमुश्किल समझा-बुझाकर वहां से लोगों को हटाया। वहीं, दूसरी ओर मामले के तूल पकडेÞ जाने के बाद पुलिस ने आनन-फानन मेें गिरफ्तार तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
सीओ कोतवाली को जांच कुछ और गिरफ्तारी संभव
लखनऊ में बैठे अफसरों द्वारा साधुओं की पिटाई मामले में जवाब तलब कर लिए जाने के बाद मेरठ के अफसरों ने ताबड़तोड़ एक्शन शुरू कर दिए। मामले की जांच सीओ कोतवाली को सौंप दी गयी। इस मामले में अभी और भी गिरफ्तारियां संभव हैं। दरअसल, शहर में इन दिनों मोहर्रम के जुलूस निकल रहे हैं। कांवड़ यात्रा 22 जुलाई से शुरू होने जा रही है। कुछ दिन पहले ही प्रदेश के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक का मेरठ दौरा हुआ था। शनिवार को एडीजी टैÑफिक लखनऊ से मेरठ समीक्षा के लिए आए हुए थे।
लखनऊ के अफसरों के ताबड़तोड़ दौरे और साधुओं की पिटाई सरीखी घटनाएं कहीं कोई बड़ा बवाल ना करा दें, इसलिए अफसर ताबड़तोड़ एक्शन मोड में हैं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें साधुओं के साथ मारपीट की जा रही है। इस मामले में तीन आरोपी पुनीत, निक्की व हिमांशु को गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच सीओ कोतवाली कर रहे हैं।
देर रात भीड़ ने घेरा लिसाड़ीगेट थाना
200 लोगों की भीड़ ने रविवार देर रात थाना लिसाड़ीगेट घेर लिया। भीड़ में शामिल लोग तीन साधुओं की पिटाई मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों लोगों को छुड़ाने को आए थे। दरअसल, तीनों के खिलाफ पुलिस पहले ही मुकदमा दर्ज कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों को छुड़ाने के लिए भीड़ में शामिल लोग थाने के भीतर घुस गए। उन्होने हंगामा शुरू कर दिया। इन लोगों का कहना रात के वक्त तीनों को घर भेज दिया जाए, सुबह तीनों को दोबारा पुलिस को सौंप दिया जाएगा, लेकिन पुलिस वालों ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया।
सोशल मीडिया पर फजीहत के बाद टूटी पुलिस की नींद
प्रहलाद नगर में तीन साधुओं की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही पुलिस की नींद टूटी। आनन-फानन में रविवार को मारपीट के तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया। लिसाड़ी गेट क्षेत्र के प्रह्लादनगर में शुक्रवार को लोगों ने तीन साधुओं को पकड़ लिया। आरोप है कि तीनों की डंडे से बुरी तरह पिटाई की। फर्जी साधु बनकर हिंदू समाज को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए पुलिस को सौंप दिया।
लिसाड़ी गेट पुलिस को तीनों साधुओं ने अपने नाम गौरव, गोपी और सुनील निवासी हरियाणा के यमुनानगर के दरवामाजिरी गांव से बताया। पुलिस ने गांव के प्रधान से बात की तो तीनों युवकों की बात सही निकली। जिसके बाद साधुओं को पुलिस ने छोड़ दिया था। शुक्रवार की घटना रविवार को जब मीडिया की सुर्खियां बनीं और पुलिस के बड़े अफसरों ने फटकार लगायी तब कही जाकर लिसाड़ीगेट पुलिस को ड्यूटी करने का ख्याल आया और तीन को हिरासत मे ले लिया।
सूत्रों ने जानकारी दी है कि ये तीनों वही हैं जो मारपीट के बाद साधुओं को लेकर खुद थाना लिसाड़ीगेट पहुंचे थे। तब पुलिस ने इन्हें छुआ भी नहीं। मामले में कार्रवाई के बजाए लिसाड़ीगेट पुलिस ने पूरा ध्यान इस मामले को दफन करने पर दिया। यदि शुक्रवार को ही इस मामले में कार्रवाई की गई होती तो शायद फजीहत से बचा जा सकता था। लिसाड़ीगेट पुलिस ने कार्रवाई तो की मगर अफसरों की फटकार के बाद। शुक्रवार को नाथ समुदाय के तीन साधुओं को फर्जी और संदिग्ध बताकर पिटाई किए जाने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस की नींद खुल गई।
पिटाई की घटना से इनकार करने वाली पुलिस का झूठ सामने आए वीडियो से उजागर हो गया। रविवार को पुलिस ने इस मामले में तीन युवकों पुनीत, निक्की व हिमांशु को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। साधुओं की डंडे से पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद भी पुलिस में आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। पुलिस का कहना था कि डंडा दिखाकर डराया गया है मारपीट नहीं की गई। पिटाई की वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस बैकफुट पर आई।

