Wednesday, April 29, 2026
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ज्ञापन और सांकेतिक प्रदर्शन पर सिमटा भारत बंद

  • बसपा, सपा, असपा और 20 संगठनों ने जुलूस निकालकर किया प्रदर्शन, अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी, एसटी आरक्षण के वर्गीकरण पर दिए गए फैसले के विरोध में बुधवार को भारत बंद के आह्वान को यहां व्यापारियों ने सिरे से खारिज कर दिया। बंद बेअसर रहा। दुकानें, कारखाने व प्राइवेट दफ्तर रोजमर्रा की तरह खुले, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बसपा, सपा, असपा, भीम आर्मी और 20 संगठनों के हजारों कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों से जुलूस निकालकर कमिश्नरी चौराहे और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर उक्त फैसले को निरस्त करने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में आहूत बंद को यहां व्यापारियों ने समर्थन नहीं दिया। सपा, बसपा, असपा और अन्य दलितों से जुड़े संगठनों ने बंद को समर्थन दिया, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं ने दुकानें व अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद नहीं कराए। हालांकि इनके कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर धरना प्रदर्शन करके विरोध दर्ज कराने में अपनी ताकत का अहसास जरूर कराया। बसपा ने फूल बाग कालोनी स्थित पार्टी के जिला कार्यालय से जुलूस निकाला। कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जुलूस आंबेडकर पार्क पहुंचा, जहां बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मुनकाद अली, सेक्टर प्रभारी मोहित,

मंडल कोआर्डिनेटर शाहजहां सैफी, मोहित जाटव, जिला प्रभारी जगरूप, जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह, डा. सुभाष, प्रबुद्ध आदि ने डा. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद जुलूस कलेक्ट्रेट पहुंचा। जहां प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन एडीएम सिटी को दिया। ज्ञापन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों में द्वेष की भावना बढ़ेगी।

सपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं व दलित समाज के लोगों ने जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। योगेश वर्मा ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन एडीएम को दिया। ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट से अपना फैसला वापस लेने, केन्द्र सरकार कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्टशन को रद्द करने, एससी एसटी आरक्षण को संविधान की नौवीं सूची में शामिल करने समेत 10 मांगे की गईं। जुलूस में बाबा साहेब आंबेडकर वाहिनी के जिलाध्यक्ष अजय सागर, रतनपाल सिंह, संगीता राहुल, लोकेन्द्र कुमार, मनोज प्रधान, नरेन्द्र कुमार, कुलदीप, प्रदीप, जितेन्द्र, किशन सिंह, राहुल गौतम आदि शामिल रहे।

इससे पूर्व सपा के जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी, समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष शशिकांत गौतम, हिमांशु सिद्धार्थ, निरंजन सिंह, अतुल गौतम, साजिद, गुलजार मलिक, संदीप यादव आदि ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। इसके अलावा बहुजन जनता दल खोड़ावाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल खोड़ावाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।

भारतीय बौद्ध शिक्षा संस्थान के महासचिव बेगराज सिंह के नेतृत्व में आदि कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। भीम आर्मी जय भीम संगठन के जिलाध्यक्ष अंकुर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर कमिश्नरी चौराहा और कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। डा. आंबेडकर राष्ट्रीय अधिवक्ता संघ के मंडल संयोजक रविन्द्र वर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रति विरोध जताया। उन्होंने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।

आंबेडकर वाहिनी के जिलाध्यक्ष को किया नजरबंद

बाबा साहेब आंबेडकर वाहिनी के जिलाध्यक्ष अजय सागर का सुबह सपाई इंतजार करते रहे। सुबह साढ़े दस बजे जब सपाइयों ने मोबाइल पर कॉल की तो उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें तोहफापुर गांव में नजरबंद कर दिया, लेकिन वह एक घंटे बाद ही कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन में शामिल हुए। कलेक्ट्रेट में उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें डेढ़ घंटा नजरबंद रखा, वह पुलिस को चकमा देकर आए हैं।

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