Tuesday, April 28, 2026
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ऊंची रे अररीया, ओह पर चढ़लो न जाए…

  • गीतों और ढोल, नगाड़ों के साथ दिया गया सूर्यदेव को पहला अर्घ्य

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कहते हैं कि दुनिया उगते सूर्य को प्रणाम करती है व सूर्य अस्त होने के समय लोग खिड़की दरवाजे भी बंद कर लेते हैं। परन्तु यह भारत की संस्कृति ही है जो डूबते हुए सूर्य को भी प्रणाम करती है। गुरुवार को गगोल तीर्थ सरोवर के चारों ओर अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण करती हुई श्रद्धालुओं की भीड़ ढोल-बाजों की थाप पर छठ मैया के गीत ऊंची रे अररीया, ओह पर चढ़लो न जाए…पर बधाई गाते हुए किन्नर, ऐसा नजारा मानो स्वयं सूर्यदेव अपनी छठा के साथ हर दिशा से प्रसन्न हो रहे हों।

प्रकृति, लोक-आस्था और कठिन तप के महत्व को दर्शाने वाला महापर्व छठ उत्साह के साथ अपने अंतिम पड़ाव की और बढ़ा। नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व, खरवा के बाद गुरुवार को तीसरे दिन अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। जिसके लिये हजारों की संख्या में महिलाएं परिवार सहित गगोल तीर्थ पहुंची। उन्होंने सूर्यास्त से पहले सरोवर में खड़े होकर पूजा-अर्चना कर अस्तगामी सूर्य को अर्घ दिया। इससे पहले बुधवार को घरों में सुबह से ही पूजन की तैयारी आरंभ हो गई थी। व्रत रखने वाले भक्तजनों ने छठ माता को अर्पित करने के लिये सुबह से ही पूआ, पूड़ी, ठेकुआ जैसे पकवान बनाए।

इसी क्रम में दोपहर बाद से लोग नारियल, कच्ची हल्दी, सिंघाड़ा, अनानास, केला, मूली जैसे मौसम के फलों को सूप, कोनिया, डलिया में सजा कर गंगा घाटों पर पहुंचे। जिसके बाद दीप जलाकर घरों की और प्रस्थान करते हुए घर जाकर डाला जगाया गया। जिसमें छठ मैया के पास पूजी हुई टोकरी रखकर घर के सदस्यों को भोजन कराने के बाद परंपरा अनुसार महिलाओं द्वारा छठी मैया के पांच गीत गाए गये व उनसे घर व परिवार में सुख समृद्धि व उन्नति की प्रार्थना की गयी। वहीं, गगोल तीर्थ परिसर में मेला भी सजाया गया। जिसमें छोटे बड़े झूलों सहित बच्चों के खिलौने, खाने की दुकान, पूजा सामग्री की दुकानें सजाई गयी। स्वामी शिवदास ने बताया कि यह मेला 15 नवंबर तक लगाया जाएगा।

अलग-अलग तरह से उठाई छठ

छठ उठाने की भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। व्रत करने वाली महिलाएं अपनी बोली हुई मन्नत अनुसार दंडवत छठ अर्थात जिसमें अर्घ्य स्थल तक दंडवत होकर पहुंचते है। नंगे पैर छठ लाना, मन्नत पूरी होने पर बैंड बाजों के साथ छठ स्थल जाना, घर में जश्न रखना व व्रत करने वाली महिला के आंचल पर नाचना छठ का चलन है।

महिलाओं के लिये चेंजिंग बूथ व रुकने की व्यवस्था

छठ पूजा के मद्देनजर गुरुवार शाम अस्तगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया। जिसके पश्चात आज सुबह 4 बजे से दूसरे अर्घ्य के साथ व्रत का समापन किया जाएगा। इस दौरान दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रुकने की व्यवस्था तीर्थ परिसर में ही की गई है व महिलाओं के कपडेÞ बदलने के लिये बूथ व शौचालय बनाए गये।

कड़ी सुरक्षा के बीच दिया गया अर्घ

एएसपी अंतरिक्ष जैन ने बताया कि दो शिफ्ट में पुलिस फोर्स लगाई गई है। जिसमें रात 12 बजे तक पहली शिफ्ट के पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे व दूसरी शिफ्ट में रात्रि 12 बजे से सुबह 8 बजे तक ड्यूटी दी जाएगी। इसमें 40 से 60 पुलिसकर्मी मंदिर परिसर में आसपास मुस्तैद है। लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर गोताखोर, ट्यूब, रस्सी, नगर निगम की टीम, एलआईयू, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, ट्रैफिक पुलिस सहित सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

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